सीजफायर के बाद ट्रंप का नया कदम, ईरान को हथियार भेजने वाले देशों पर सख्त टैरिफ
सारांश
Key Takeaways
- ट्रंप ने ईरान को हथियार सप्लाई करने वाले देशों पर 50%25 टैरिफ लगाने का ऐलान किया।
- ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा हुई है।
- इजरायल ने युद्धविराम के फैसले का समर्थन किया है।
- ट्रंप ने ईरान के साथ सहयोग की बात की है।
- यह स्थिति वैश्विक कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में 40 दिन तक चले तनाव और संघर्ष के परिणामस्वरूप, जब दुनिया ने ईरान-अमेरिका सीजफायर की सूचना सुनी, तो राहत की एक किरण दिखी। लेकिन इस ऐलान के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया बयान चिंता का कारण बन गया।
शांति की आशा रखने वालों के समक्ष एक बार फिर ट्रंप का 'टैरिफ जीन' सामने आ चुका है। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सभी सामानों पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जाएगा, जिसमें कोई छूट नहीं मिलेगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कहा, "जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार देगा, अमेरिका में बेचे जाने वाले उसके सभी सामानों पर तुरंत प्रभाव से 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। इसमें कोई रियायत नहीं होगी।"
संघर्ष विराम की घोषणा पर अमेरिकी सांसदों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ ने कूटनीति का समर्थन किया, जबकि अन्य ने सतर्क रहने की सलाह दी।
इजरायल, जो अमेरिका के साथ खड़ा है, ने भी युद्धविराम के फैसले का समर्थन किया है।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से चर्चा की थी, जिसके बाद ईरान के साथ युद्धविराम ढांचे पर समझौते की दिशा में कदम उठाए गए।
अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा के बाद, ट्रंप ने इसे विश्व में शांति के लिए एक महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि ईरान अब इस स्थिति से थक चुका है और वह भी शांति चाहता है, इसलिए तेहरान पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
ट्रंप ने शांति और सहयोग की दिशा में बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ मिलकर काम करेगा और कई मुद्दों पर पहले ही सहमति बन चुकी है।