क्या मध्य प्रदेश में मैनुअल फिटनेस की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी?: उदय प्रताप

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क्या मध्य प्रदेश में मैनुअल फिटनेस की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी?: उदय प्रताप

सारांश

मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से वाहनों की मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया को जारी रखने की गुजारिश की है, जब तक हर जिले में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित नहीं हो जाते। यह प्रक्रिया वाहन स्वामियों के लिए समय और संसाधनों की बचत में मदद करेगी।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश में मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया जारी रहेगी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अनुमति दी है।
नौ जिलों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की कमी है।
वाहन स्वामियों को सुविधाएँ प्रदान करने की दिशा में कदम।
फिटनेस प्रक्रिया से समय और संसाधनों की बचत होगी।

भोपाल 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राज्य में वाहनों की मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया को बनाए रखने की केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मांग की है।

मंत्री उदय प्रताप सिंह ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों एवं परिवहन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री गडकरी को 1 जनवरी को जारी पत्र के बारे में बताया कि जिला परिवहन कार्यालयों में वाहनों की मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया को समाप्त करके केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के माध्यम से फिटनेस परीक्षण कराने का प्रावधान किया गया है।

उन्हें बताया कि वर्तमान में यह व्यवस्था मध्य प्रदेश के नौ जिले, जैसे ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, सतना, सिंगरौली, देवास एवं धार में चल रही है। इन जिलों में वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया पूरी तरह से ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के माध्यम से ही की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश भौगोलिक दृष्टि से बड़ा है, जहां कई जिलों के बीच की दूरी 150 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में एटीएस विहीन जिलों के वाहन स्वामियों को फिटनेस परीक्षण के लिए अन्य जिलों में अपने वाहनों को ले जाना पड़ता है। इससे समय और ईंधन दोनों की अधिक खपत होती है।

अतिरिक्त, यात्री वाहनों के परमिट विशेष मार्गों के लिए जारी किए जाते हैं। यदि यात्री वाहन अपने निर्धारित मार्ग से अलग किसी अन्य मार्ग पर फिटनेस परीक्षण के लिए जाते हैं, तो यह वैधानिक रूप से अनुचित होगा।

परिवहन मंत्री ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से अनुरोध किया है कि जब तक राज्य के हर जिले में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की स्थापना नहीं हो जाती, तब तक एटीएस विहीन जिलों में वाहन स्वामियों के लिए मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी जाए। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इस प्रक्रिया को शीघ्र अनुमति प्रदान करने पर सहमति दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह राज्य के वाहन स्वामियों के लिए भी राहत की बात है। मैनुअल प्रक्रिया को बनाए रखना आवश्यक है, जब तक हर जिले में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित नहीं होते। यह निर्णय न केवल सुविधाजनक है, बल्कि यह समय और संसाधनों की भी बचत करेगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया क्यों जारी रखी जा रही है?
क्योंकि सभी जिलों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की उपलब्धता नहीं है, जिससे वाहन स्वामियों को समस्याएँ आ रही हैं।
कितने जिलों में यह प्रक्रिया चल रही है?
यह प्रक्रिया वर्तमान में मध्य प्रदेश के नौ जिलों में चल रही है।
क्या मैनुअल फिटनेस चेकिंग वैध है?
हां, जब तक सभी जिलों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन नहीं होते, तब तक यह वैध है।
नितिन गडकरी ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की है।
वाहन स्वामियों को क्या करना चाहिए?
वाहन स्वामियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वाहनों की फिटनेस चेकिंग समय पर कराएँ।
राष्ट्र प्रेस
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