बर्धमान-दुर्गापुर का चुनावी परिदृश्य: टीएमसी का 6 में से 5 सीटों पर कब्जा, भाजपा का एक शहरी गढ़
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बर्धमान-दुर्गापुर संसदीय क्षेत्र (संख्या 39), जो 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया, का चुनावी परिदृश्य किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं है। यहां के मतदाता किसी एक विचारधारा के प्रति वचनबद्ध नहीं हैं, बल्कि अपनी आवश्यकताओं के अनुसार सत्ता का चयन करते हैं।
2009 के लोकसभा चुनाव में यह वामपंथ (सीपीआई-एम) का एक मजबूत गढ़ था, जिसने ममता बनर्जी की लहर को भी रोकने में सफलता पाई।
2014 में, ममता बनर्जी की चुनावी लहर ने इस लाल दुर्ग को ध्वस्त कर दिया, और तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार यहां जीत हासिल की।
2019 के चुनाव में, राष्ट्रवाद और सत्ता-विरोधी लहर ने वामपंथ के वोटरों को भाजपा की ओर मोड़ दिया। भाजपा के एसएस अहलूवालिया ने केवल 2,439 वोटों के अंतर से टीएमसी को हराया।
2024 के लोकसभा चुनाव में, टीएमसी ने 1.37 लाख से अधिक वोटों के विशाल अंतर से अपनी स्थिति को मजबूत किया।
इस लोकसभा क्षेत्र का असली गणित इसके 7 विधानसभा क्षेत्रों में छिपा हुआ है। इसमें 5 ग्रामीण (पूर्व बर्धमान) और 2 शहरी/औद्योगिक (पश्चिम बर्धमान) सीटें शामिल हैं, जो इसे एक राजनीतिक भूलभुलैया बनाते हैं।
बर्धमान दक्षिण: यह पूर्व बर्धमान का वाणिज्यिक केंद्र है, जहां मध्यम वर्ग और व्यापारियों की अच्छी खासी संख्या है। यहां टीएमसी से खोकन दास वर्तमान विधायक हैं।
मोंटेश्वर: यह एक कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां अल्पसंख्यक मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां टीएमसी से सिद्दीकउल्लाह चौधरी विधायक हैं।
बर्धमान उत्तर (एससी): यह एक आरक्षित सीट है, जहां दलित मतदाताओं की बड़ी संख्या है। यहां का मिजाज उपनगरीय है और वर्तमान विधायक टीएमसी के निशिथ कुमार मलिक हैं।
भातर: यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से धान की खेती पर निर्भर करती है। चुनाव यहां विचारधारा पर नहीं, बल्कि 'कृषक बंधु' जैसी योजनाओं और खाद की कीमतों पर लड़े जाते हैं। वर्तमान टीएमसी विधायक मानगोबिंद अधिकारी हैं।
गलसी (एसी): यह एक आरक्षित ग्रामीण सीट है, जहां भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और सीमांत किसानों की बड़ी आबादी है। वर्तमान विधायक टीएमसी के नेपाल घोरुई हैं।
दुर्गापुर पूर्व: यहां औद्योगिक क्षेत्र के कुछ हिस्से और ग्रामीण इलाकों का मिश्रण है। वर्तमान विधायक टीएमसी के प्रदीप मजूमदार हैं।
दुर्गापुर पश्चिम: यह पूरे लोकसभा क्षेत्र की एकमात्र पूर्णतः शहरी, औद्योगिक और हिंदी भाषी सीट है। भाजपा के लक्ष्मण चंद्र घोरुई यहां के विधायक हैं।
7 में से 6 विधानसभा सीटों पर टीएमसी का नियंत्रण है, जबकि भाजपा केवल एक शहरी सीट (दुर्गापुर पश्चिम) तक सीमित रह गई है।
2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने बड़े दांव खेले हैं। भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद को हटाकर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को चुनावी मैदान में उतारा, जबकि टीएमसी ने पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद को उम्मीदवार बनाया।
जब सभी विचारधारात्मक समीकरण विफल हो गए, तब राज्य सरकार का 'कल्याणकारी अर्थशास्त्र' सामने आया। टीएमसी ने 2024 का चुनाव 'लक्खीर भंडार' (महिलाओं को नकद सहायता), 'स्वास्थ्य साथी' और 'खाद्य साथी' जैसी योजनाओं के माध्यम से जनमत संग्रह में बदल दिया। यहां से कीर्ति आजाद ने जीत हासिल की।