एनएमडीसी ने 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का नया कीर्तिमान स्थापित किया
सारांश
Key Takeaways
- एनएमडीसी ने 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का नया कीर्तिमान स्थापित किया।
- कंपनी की स्थापना 1958 में हुई थी।
- एनएमडीसी का मुख्यालय नई दिल्ली में है।
- कंपनी की खदानें छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित हैं।
- भारत का इस्पात उत्पादन लक्ष्य 2030 तक 300 मिलियन टन है।
नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत की प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक कंपनी एनएमडीसी ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 समाप्त होने से पहले ही 50 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ, एनएमडीसी एक वित्त वर्ष में 50 मिलियन टन उत्पादन करने वाली भारत की पहली खनन कंपनी बन गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल कंपनी की उत्पादन क्षमता को ही नहीं, बल्कि भारत की लौह अयस्क सप्लाई चेन में एनएमडीसी की महत्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाती है।
एनएमडीसी की स्थापना 1958 में देश के लौह अयस्क संसाधनों के विकास के उद्देश्य से की गई थी। इस सरकारी कंपनी को इस्पात मंत्रालय के अधीन 'नवरत्न सीपीएसई' का दर्जा प्राप्त है।
कंपनी ने 1978 में लगभग 10 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन किया था, लेकिन पिछले कई दशक में उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है। अब वित्त वर्ष 2025-26 में उत्पादन बढ़कर 50 मिलियन टन तक पहुँच गया है, जो लगभग पांच गुना वृद्धि को दर्शाता है।
सरकारी बयान में बताया गया है कि यह उपलब्धि एनएमडीसी के धीरे-धीरे भारत की लौह अयस्क सप्लाई चेन की रीढ़ बनने की यात्रा को दर्शाती है।
एनएमडीसी की वृद्धि पिछले कुछ वर्षों में काफी तेज रही है। कंपनी का उत्पादन 2015 में लगभग 30 मिलियन टन था, जो अब बढ़कर 50 मिलियन टन तक पहुँच गया है।
पिछले एक दशक में उत्पादन में लगभग दो-तिहाई की वृद्धि हुई है। यह ध्यान देने योग्य है कि वर्तमान उत्पादन क्षमता का लगभग एक-पांचवां हिस्सा पिछले चार वर्षों में जोड़ा गया, जो कंपनी के इतिहास में सबसे तेज विस्तार माना जा रहा है।
एनएमडीसी लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अमितवा मुखर्जी ने इस उपलब्धि को कंपनी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा, "50 मिलियन टन उत्पादन तक पहुँचना एक बड़ी उपलब्धि है और यह एनएमडीसी 2.0 के तहत हमारे मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है। जिस क्षमता को बनाने में पहले दशक लगे, उसे हमने बेहतर कार्यान्वयन, जिम्मेदार खनन और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति प्रतिबद्धता के द्वारा कुछ ही वर्षों में तेज कर दिया है।"
उन्होंने यह भी कहा कि देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी होने के नाते एनएमडीसी पर बड़ी जिम्मेदारी है।
कंपनी की खदानें मुख्य रूप से खनिज संपन्न राज्यों छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित हैं, जहाँ अत्याधुनिक और बड़े पैमाने पर मशीनरी के द्वारा खनन किया जाता है। एनएमडीसी देश की लौह अयस्क सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कंपनी ने कहा कि भविष्य में उसका ध्यान ऑपरेशनल उत्कृष्टता, नई तकनीकों के उपयोग और जिम्मेदार खनन पर रहेगा, ताकि विकास के अगले चरण को प्राप्त किया जा सके।
भारत ने 2030 तक इस्पात उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में देश में लौह अयस्क की स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना एक रणनीतिक प्राथमिकता है, जिसमें एनएमडीसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।