उत्तर प्रदेश का एसआईआर 2026 अभियान सफल, मतदाता संख्या 13.39 करोड़ के पार
सारांश
Key Takeaways
- एसआईआर 2026 अभियान की सफलता ने लोकतंत्र को सशक्त किया।
- मतदाताओं की संख्या 13.39 करोड़ तक पहुंच गई।
- युवा मतदाताओं की बढ़ती संख्या महत्वपूर्ण है।
- राजनीतिक दलों की भागीदारी से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी।
- जेंडर रेशियो में सुधार दर्शाता है कि महिलाएं भी सक्रिय रूप से मतदान कर रही हैं।
लखनऊ, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में एसआईआर 2026 अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है और शुक्रवार को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया है। इस व्यापक अभियान के चलते राज्य में मतदाताओं की संख्या अब 13,39,84,792 तक पहुंच गई है।
नवीनतम सूची के अनुसार, पुरुष मतदाताओं की संख्या 7.30 करोड़ (54.54 प्रतिशत) और महिला मतदाताओं की संख्या 6.09 करोड़ (45.46 प्रतिशत) के रूप में दर्ज की गई है। जेंडर रेशियो में भी सुधार हुआ है, जो अब 834 तक पहुंच गया है। इस बार कुल मतदाताओं की संख्या में 84.28 लाख की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि 18-19 आयु वर्ग के नए मतदाताओं की संख्या में 14.29 लाख का इजाफा हुआ है।
राज्य के प्रमुख जिलों में जहां सबसे ज्यादा नए मतदाता जुड़े हैं, उनमें प्रयागराज, लखनऊ, बरेली, गाजियाबाद और जौनपुर शामिल हैं।
पुनरीक्षण प्रक्रिया की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी। इसके तहत गणना चरण 4 नवंबर 2025 से 26 दिसंबर 2025 तक चला। इसके बाद 6 जनवरी 2026 को मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया, जिसमें कुल 12,55,56,025 मतदाता दर्ज थे। उस समय पुरुष मतदाता 6,88,43,159 (54.83 प्रतिशत) और महिला मतदाता 5,67,08,747 (45.17 प्रतिशत) थे, जबकि थर्ड जेंडर के 4,119 मतदाता शामिल किए गए थे। 18-19 आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या उस समय 3,33,981 थी और जेंडर रेशियो 824 था।
मसौदा सूची के बाद 6 जनवरी से 6 मार्च 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज करने का अवसर प्रदान किया गया। इसके बाद 27 मार्च 2026 तक सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण, सुनवाई और सत्यापन किया गया। पूरी प्रक्रिया के बाद 10 अप्रैल
इस अभियान में राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी भी देखी गई। राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त दलों के साथ 5 महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं, जबकि जिला स्तर पर 904 और ईआरओ स्तर पर 2186 बैठकें हुईं।
बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। कुल 5,82,877 बीएलए इस प्रक्रिया में शामिल हुए, जिनमें भाजपा के 1,61,581, सपा के 1,57,631, बसपा के 1,54,224, कांग्रेस के 97,153 और 'आप' के 6,480 एजेंट शामिल थे।
विशेष बात यह है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों को हर चरण की जानकारी दी गई और उनके सुझावों को भी शामिल किया गया।