उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा: सुरक्षा चिंताओं के बीच होगा ऐतिहासिक दौरा
सारांश
Key Takeaways
- उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा महत्वपूर्ण है।
- सुरक्षा चिंताएँ इस दौरे का प्रमुख मुद्दा हैं।
- यह यात्रा वर्षों बाद अमेरिका के किसी शीर्ष अधिकारी का पाकिस्तान दौरा है।
- आतंकवाद और अपराध के खतरे से संबंधित सुरक्षा सलाह जारी की गई है।
- अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के मुद्दे पर चर्चा होगी।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह के अंत में पाकिस्तान में बातचीत आयोजित होने वाली है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने डेलिगेशन के साथ इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना है। उपराष्ट्रपति वेंस के इस दौरे से संबंधित सुरक्षा चिंताओं का सामना किया जा रहा है। वर्षों के बाद अमेरिका का कोई उच्च अधिकारी पाकिस्तान का दौरा कर सकता है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस दौरे पर जाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा चिंताओं के कारण सलाह दी है कि उन्हें नहीं जाना चाहिए।
हालाँकि, यह पुष्टि नहीं हुई है कि वेंस इस बैठक में भाग लेंगे या नहीं, लेकिन व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद जाएंगे।
किसी भी अमेरिकी अधिकारी के लिए पाकिस्तान की यात्रा पर जाने से पहले प्रमुख खतरों में से एक आतंकवाद है। पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों की सक्रियता की वजह से वहां किसी दूसरे देश के नेता की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता है।
वेंस उस समय पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं जब अमेरिका ने इस देश के लिए 'लेवल 3: यात्रा पर पुनर्विचार करें' की एडवाइजरी जारी की है। इसका मुख्य कारण आतंकवाद, अपराध और अशांति का खतरा है।
इसके अलावा, अमेरिका ने हाल ही में लाहौर और कराची के वाणिज्य दूतावास से गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से हटा लिया था। यही सब कारण हैं जिनकी वजह से कोई भी अमेरिकी नेता या अधिकारी पाकिस्तान जाने से बचते हैं।
पाकिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों और दूतावास पर हमले की कई घटनाएं इतिहास में सामने आई हैं। हालिया मामला तब का है जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उग्र भीड़ ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को घेर लिया और तोड़फोड़ की। इसके बाद पेशावर में अमेरिकी कांसुलेट बंद कर दिया गया और कराची और लाहौर में वीजा सेवाएं निलंबित हो गईं।
आतंकवाद और सुरक्षा कारणों की वजह से अब तक केवल पांच अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ही पाकिस्तान का दौरा किया है, जिनमें ड्वाइट डी. आइजनहावर, लिंडन बी. जॉनसन, रिचर्ड निक्सन, बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश शामिल हैं। 2006 के बाद से किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया।
हालांकि, इसके पीछे एक कारण अमेरिका में हुए 26/11 का हमला भी है। अमेरिका को संदेह था कि इस हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी है। हालांकि पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा। फिर अमेरिका ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी दूरी आ गई।
इसके अलावा, पाकिस्तान में चीन का दबदबा बढ़ रहा है। यह भी एक कारण हो सकता है कि अमेरिका इस देश से दूरी बना रहा है। वहीं, 2011 के बाद से यह अमेरिकी के किसी शीर्ष अधिकारी का पाकिस्तान का पहला दौरा होने वाला है।
द संडे गार्जियन के अनुसार, सुरक्षा योजनाकारों ने आने वाले डेलिगेशन की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मोटरकेड सिस्टम तैयार करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट की लॉजिस्टिक्स टीम और उपकरण लेकर आने के बाद तैयारियां और तेज हो गई हैं। इस तरह के बड़े इंतजाम इस दौरे की सांकेतिक अहमियत और युद्धकालीन कूटनीति से जुड़े असली सुरक्षा खतरों दोनों को दर्शाते हैं।
पिछले दिन पाकिस्तान में ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने ईरानी डेलिगेशन के पाकिस्तान पहुंचने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।
ईरानी राजदूत ने अपने पोस्ट में अमेरिकी वार्ताकारों के साथ सीजफायर के मुद्दे पर बातचीत के लिए ईरान के एक डेलिगेशन के पाकिस्तान आने की घोषणा की थी। यह पोस्ट पहले रेजा अमीरी मोगादम के सोशल मीडिया हैंडल पर थी, जो अब नजर नहीं आ रही है। इसकी पीछे की वजह सुरक्षा से संबंधित हो सकती है।