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क्या वाराणसी के मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी?

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क्या वाराणसी के मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी?

मुख्य बातें

शारदीय नवरात्रि का पर्व आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
मां शैलपुत्री की पूजा से भक्तों को शांति और शक्ति मिलती है।
वाराणसी का शैलपुत्री मंदिर प्राचीन धार्मिक स्थान है।
भक्तों की भारी भीड़ इस पर्व की महत्ता को दर्शाती है।
प्रशासन ने भीड़ के लिए उचित व्यवस्था की है।

वाराणसी, 22 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। शारदीय नवरात्रि का उत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। सोमवार को नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जा रही है। वाराणसी के प्रसिद्ध शैलपुत्री मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई। हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

यह मंदिर मां दुर्गा के प्राचीन स्थानों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

मंदिर के पुजारी गिरीश तिवारी ने बताया कि आज मां का विशेष श्रृंगार किया गया है। सुबह नहलाने-धुलाने के बाद आरती का आयोजन हुआ, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चली। इस दौरान भारी भीड़ बनी रही। उसके बाद थोड़ी शांति का माहौल बना। रातभर दर्शन का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।

मां शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं और भगवान शिव की पत्नी के रूप में जानी जाती हैं। उनका नाम 'शैल' यानी पर्वत से जुड़ा हुआ है। नवरात्रि में मां के पहले स्वरूप के रूप में उनकी पूजा से भक्तों को शांति और शक्ति मिलती है। माता जी हाथी पर आई हैं, और उस पर ही जाएंगी, और वैसे भी हाथी को शुभ माना जाता है, इसलिए भक्तों पर उनकी कृपा अवश्य बरसेंगी।

उन्होंने आगे कहा, "यह मंदिर मां शैलपुत्री जी का है। नौ दुर्गाओं के पहले दिन इन्हें पूजा जाता है। नाम 'शैल' पर्वत की पुत्री से आया है। जो भी भक्ति से पूजा करता है, मां उसे स्वीकार करती हैं। इस बार मां हाथी पर सवार होकर आई हैं, जो शुभ फल देगा। भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बरस रही है। हमने मां को पेड़ा, मालपुआ और अन्य प्रसाद चढ़ाए। प्रशासन ने भी अच्छी व्यवस्था की है।"

अधिवक्ता विनोद पांडेय ने कहा, "आज मां रानी के पहले स्वरूप शैलपुत्री जी का है। वे हिमालय की बेटी हैं और बाबा विश्वनाथ की पत्नी हैं। मां इतनी भोली हैं कि अपार भीड़ के बावजूद सबको आशीर्वाद देती हैं। काशी धर्म की नगरी है, बाबा की पत्नी यहां विराजमान हैं। भीड़ तो बहुत है, लेकिन सब मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।"

राजीव दुबे ने बताया, "शैलपुत्री जी का दिन है, जो भोले बाबा की पत्नी हैं। नवरात्र का प्रथम दिन इनका ही है। बनारस के हर कोने से लोग दर्शन के लिए आते हैं। यहां की व्यवस्था शानदार है। अभी भीड़ बढ़ेगी। देर रात से ही श्रद्धालु आ रहे हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह देखने में आ रहा है कि वाराणसी में शारदीय नवरात्रि का उत्सव न केवल धार्मिक भावना को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह एकता और संस्कृति का भी प्रतीक है। भक्तों की भीड़ दर्शाती है कि आज भी हमारे समाज में आस्था और विश्वास का कितना महत्व है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शारदीय नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा की पूजा का पर्व है, जो शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है।
मां शैलपुत्री का महत्व क्या है?
मां शैलपुत्री नवरात्रि के पहले दिन की देवी हैं, जिन्हें शक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
वाराणसी में नवरात्रि कैसे मनाई जाती है?
वाराणसी में नवरात्रि का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें भक्तों की भारी भीड़ होती है।
राष्ट्र प्रेस
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