क्या विनायक चतुर्थी की पूर्व संध्या पर 7,400 से अधिक छात्रों ने नया विश्व रिकॉर्ड बनाया?

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क्या विनायक चतुर्थी की पूर्व संध्या पर 7,400 से अधिक छात्रों ने नया विश्व रिकॉर्ड बनाया?

सारांश

विजयवाड़ा में विनायक चतुर्थी के अवसर पर 7,400 छात्रों ने मिलकर मिट्टी की मूर्तियों का निर्माण कर एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। यह आयोजन न केवल उत्सव में भागीदारी बढ़ाने का था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

Key Takeaways

  • 7,400 छात्रों ने मिलकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।
  • पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर दिया गया।
  • मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग प्रोत्साहित किया गया।
  • स्वास्थ्य मंत्री ने जागरूकता फैलाने की आवश्यकता बताई।
  • यह आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रतीक है।

विजयवाड़ा, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। विनायक चतुर्थी की पूर्व संध्या पर आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया गया है। इस बाबत स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने पत्रकारों से बातचीत में सभी जानकारी साझा की।

उन्होंने बताया कि 7,400 से अधिक छात्रों और युवाओं ने एक साथ मिट्टी की मूर्तियां बनाकर यह कीर्तिमान स्थापित किया। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल उत्सव में जनभागीदारी बढ़ाना था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना भी था।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह आयोजन पर्यावरण के प्रति लोगों की सोच को बदलने में कारगर साबित हुआ है। खासकर स्कूली बच्चों और युवाओं में मिट्टी की मूर्तियों के उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि बढ़ते कैंसर मामलों को देखते हुए पर्यावरण संरक्षण आज समय की जरूरत है। वायु प्रदूषण, अस्वास्थ्यकर खानपान और मिलावटी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य समस्याओं के प्रमुख कारण हैं। इस कार्यक्रम के जरिए लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह आयोजन न सिर्फ एक विश्व रिकॉर्ड है, बल्कि समाज को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने की प्रेरणा भी देता है। मिट्टी की मूर्तियां बनाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्रियों का उपयोग कम होगा, जिससे नदियों और जलाशयों का प्रदूषण रोका जा सकता है।

मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि युवाओं और बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करेगी। इसके अलावा, उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटे-छोटे कदम उठाएं, जैसे मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग और प्लास्टिक से बचाव।

इस आयोजन में शामिल सभी प्रतिभागियों और आयोजकों की सराहना करते हुए उन्होंने इसे सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

बता दें कि गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को शुरू होता है और 10 दिनों तक चलता है। भक्त मिट्टी की गणेश मूर्तियों की स्थापना करते हैं, जिनकी विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। गणेश जी को बुद्धि, समृद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है।

Point of View

बल्कि पर्यावरण जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। हमें ऐसे आयोजनों का समर्थन करना चाहिए जो हमें एकजुट करते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

विनायक चतुर्थी क्या है?
विनायक चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव का पर्व है, जिसे हर साल भाद्रपद मास की चतुर्थी को मनाया जाता है।
इस आयोजन में कितने छात्रों ने भाग लिया?
इस आयोजन में 7,400 से अधिक छात्रों और युवाओं ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्सव में जनभागीदारी बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था।
मिट्टी की मूर्तियों के फायदे क्या हैं?
मिट्टी की मूर्तियों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्रियों का उपयोग कम होता है, जिससे प्रदूषण में कमी आती है।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने इस आयोजन को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाने वाला बताया।
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