24 अक्टूबर 2026
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'विंग्स ओवर गंगा' एयर शो: वाराणसी में 100 विमानों का प्रदर्शन, 24 अक्टूबर को गंगा तटों पर उमड़ी भीड़

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'विंग्स ओवर गंगा' एयर शो: वाराणसी में 100 विमानों का प्रदर्शन, 24 अक्टूबर को गंगा तटों पर उमड़ी भीड़

सारांश

काशी के आकाश में भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ पर 100 विमानों का भव्य प्रदर्शन — राफेल से लेकर सूर्यकिरण टीम तक। गंगा के दोनों तटों पर लाखों दर्शक, और 25 अक्टूबर को PM मोदी की उपस्थिति प्रस्तावित। काशी में पहली बार हुआ ऐसा आयोजन।

मुख्य बातें

वाराणसी में 'विंग्स ओवर गंगा' एयर शो के दूसरे दिन 24 अक्टूबर 2026 को 100 विमानों ने गंगा के ऊपर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में 52 लड़ाकू विमान , 15 परिवहन विमान , 32 हेलीकॉप्टर और एक ऐतिहासिक विमान शामिल रहे; सभी ने देश के 12 वायु अड्डों से उड़ान भरी।
सुखोई-30 एमकेआई , राफेल , मिराज-2000 , मिग-29 , एलसीए (तेजस) और जगुआर लड़ाकू विमानों ने हवाई करतब दिखाए।
भारतीय थल सेना और भारतीय नौसेना के विमानों ने भी इस त्रि-सेना प्रदर्शन में भाग लिया।
तीसरा और अंतिम प्रदर्शन 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है, जिसमें PM नरेंद्र मोदी , रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और CM योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति अपेक्षित है।
यह आयोजन भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हुआ।

भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर वाराणसी के आकाश में 24 अक्टूबर 2026 को 'विंग्स ओवर गंगा' एयर शो के दूसरे दिन 100 विमानों ने गंगा के ऊपर अपनी हवाई ताकत का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिराज-2000 और अन्य लड़ाकू विमानों के करतबों ने गंगा के दोनों तटों पर उमड़े लाखों दर्शकों को रोमांचित कर दिया। यह आयोजन काशीवासियों और पर्यटकों के लिए एक ऐतिहासिक अनुभव बन गया।

मुख्य घटनाक्रम

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 11:40 बजे गंगा के एक छोर से विमानों का आगमन शुरू हुआ। इसके बाद अलग-अलग दिशाओं से विमानों की आवाजाही और सधे हुए हवाई करतबों का सिलसिला लगातार चलता रहा। तेज गति, सटीक तालमेल और रोमांचक फॉर्मेशन ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

'एयर फोर्स डे एरियल डिस्प्ले-2026' के तहत आयोजित इस प्रदर्शन में 52 लड़ाकू विमान, 15 परिवहन विमान, 32 हेलीकॉप्टर और एक ऐतिहासिक विमान शामिल रहे। इन सभी विमानों ने देश के 12 वायु अड्डों से उड़ान भरी।

विमानों की विविधता और सामरिक शक्ति

लड़ाकू विमानों में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिराज-2000, मिग-29, एलसीए (तेजस) और जगुआर ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। सूर्यकिरण और सारंग प्रदर्शन टीमों ने हार्वर्ड विमान के साथ दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा।

हेलीकॉप्टर बेड़े में एलसीएच, चिनूक, एएलएच मार्क-III, एएलएच मार्क-IV, अपाचे, चेतक, कामोव-31 और एमआई-17 वी5 शामिल रहे। परिवहन एवं सहायक विमानों में सी-295, सी-17, सी-130, एईडब्ल्यूएंडसी, आईएल-78, एएन-32 और पी-8आई शामिल थे।

गौरतलब है कि भारतीय थल सेना के दो एएलएच हेलीकॉप्टरों तथा भारतीय नौसेना के एक पी-8आई विमान और एक कामोव-31 हेलीकॉप्टर ने भी इस प्रदर्शन में सहभागिता की, जिससे इसे त्रि-सेना प्रदर्शन का स्वरूप मिला। भारतीय वायुसेना के गरुड़ विशेष बल की भागीदारी ने कार्यक्रम के सामरिक महत्व को और बढ़ाया।

दर्शकों की प्रतिक्रिया

गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़ भारत माता की जय, वंदे मातरम् और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजती रही। दर्शक रश्मि ने कहा, 'लड़ाकू विमान से हवा में दिल और डीएनए की आकृति बनते देखना बेहद रोमांचक था। भारतीय सेना के जांबाज जवानों का शौर्य और साहस देखकर मन गर्व से भर गया। हमने सोचा भी नहीं था कि बनारस में इतना भव्य एयर शो देखने को मिलेगा।'

दर्शक भूमिका खन्ना ने कहा कि काशी में पहली बार एयर शो का आयोजन होना अपने आप में बड़ी बात है। दर्शक योगेश्वर ने बताया कि लड़ाकू विमानों को आसमान में करतब करते देखकर बच्चे बेहद खुश थे और यह उनके लिए भारतीय वायुसेना की ताकत को करीब से समझने का अवसर भी रहा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और शैक्षणिक आयाम

नमो घाट पर वसंत महिला महाविद्यालय और अन्य विद्यालयों की छात्राओं ने देशभक्ति के गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया। श्रेया तिवारी और आकृति श्री ने बताया कि भारतीय वायुसेना के शौर्य के बीच देशभक्ति की प्रस्तुति देने का अवसर उनके लिए गर्व की बात रही।

विमानों की तकनीक और क्षमताओं पर आधारित कमेंट्री ने कार्यक्रम को और रोचक बनाया, जिससे दर्शकों को वायुसेना की कार्यप्रणाली और सामरिक क्षमता को करीब से समझने का मौका मिला।

आगे क्या

'विंग्स ओवर गंगा' का पहला प्रदर्शन 22 अक्टूबर को आयोजित हो चुका है। तीसरा और अंतिम प्रदर्शन 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति प्रस्तावित बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित सार्वजनिक कूटनीति का हिस्सा है — जब PM मोदी और CM योगी के संसदीय और राजनीतिक गढ़ में 25 अक्टूबर को वे स्वयं उपस्थित होने वाले हैं। यह उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें सरकार रक्षा उपलब्धियों को जनसामान्य के समक्ष प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत कर 'राष्ट्रवादी भावना' को राजनीतिक पूंजी में बदलती है। गंगा के ऊपर राफेल और सुखोई की गर्जना वायुसेना की परिचालन क्षमता की प्रामाणिक अभिव्यक्ति है, लेकिन इसका समय और स्थान-चयन इसे रणनीतिक संदेश भी बनाता है। मुख्यधारा की कवरेज भव्यता पर केंद्रित रहती है — पर असली प्रश्न यह है कि इस तरह के जन-प्रदर्शनों का दीर्घकालीन रक्षा-भर्ती और जनजागरण पर मापनीय असर कितना होता है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'विंग्स ओवर गंगा' एयर शो क्या है?
'विंग्स ओवर गंगा' भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर वाराणसी में आयोजित 'एयर फोर्स डे एरियल डिस्प्ले-2026' है। इस तीन-दिवसीय कार्यक्रम में 100 विमान गंगा के ऊपर हवाई करतब और सामरिक प्रदर्शन करते हैं।
एयर शो में कितने और कौन-से विमानों ने भाग लिया?
प्रदर्शन में कुल 100 विमानों ने भाग लिया — जिनमें 52 लड़ाकू विमान (सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिराज-2000, मिग-29, एलसीए, जगुआर), 15 परिवहन विमान, 32 हेलीकॉप्टर और एक ऐतिहासिक विमान शामिल थे। ये सभी देश के 12 वायु अड्डों से रवाना हुए।
'विंग्स ओवर गंगा' का अंतिम प्रदर्शन कब होगा और कौन उपस्थित रहेगा?
तीसरा और अंतिम प्रदर्शन 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति अपेक्षित बताई जा रही है।
क्या इस एयर शो में वायुसेना के अलावा अन्य सेनाओं ने भी हिस्सा लिया?
हाँ, यह एक त्रि-सेना प्रदर्शन रहा। भारतीय थल सेना के दो एएलएच हेलीकॉप्टरों और भारतीय नौसेना के एक पी-8आई विमान व एक कामोव-31 हेलीकॉप्टर ने भी प्रदर्शन में सहभागिता की। भारतीय वायुसेना के गरुड़ विशेष बल ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
काशी में यह पहली बार एयर शो क्यों आयोजित हुआ और इसका महत्व क्या है?
दर्शकों के अनुसार वाराणसी में पहली बार इस स्तर का एयर शो आयोजित हुआ है। गंगा के ऊपर इस भव्य प्रदर्शन ने न केवल भारतीय वायुसेना की हवाई शक्ति और तकनीकी दक्षता को जनसामान्य के सामने रखा, बल्कि विशेषज्ञ कमेंट्री के ज़रिए नागरिकों को सामरिक क्षमताओं से अवगत कराने का अवसर भी दिया।
राष्ट्र प्रेस
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