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योगी आदित्यनाथ ने थारू परिवारों को दिया भूमि का मालिकाना हक, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत

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योगी आदित्यनाथ ने थारू परिवारों को दिया भूमि का मालिकाना हक, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत

सारांश

लखीमपुर खीरी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने थारू जनजाति को भूमि का मालिकाना हक देकर आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई यात्रा की शुरुआत की। यह कदम दशकों के संघर्ष को सम्मान देने का प्रतीक है।

मुख्य बातें

योगी आदित्यनाथ ने थारू जनजाति को भूमि का मालिकाना हक दिया।
सरकार का उद्देश्य आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
2,350 परिवारों को 4,251 हेक्टेयर भूमि का मालिकाना हक प्रदान किया गया।
पुराने मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा।

लखीमपुर, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शनिवार को लखीमपुर खीरी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने थारू जनजाति और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए विभिन्न परिवारों को भूमि का मालिकाना हक प्रदान करते हुए इसे “अधिकार से आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता” की एक ऐतिहासिक शुरुआत बताया।

उन्होंने बताया कि सरकार का असली सुख जनता के कल्याण में निहित है और आज का दिन दशकों के संघर्ष को सम्मान देने का अवसर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय परंपरा में शासन का मूल मंत्र स्पष्ट है— “प्रजासुखे सुखं राज्ञः”, अर्थात शासक का सुख प्रजा के सुख में ही निहित होता है।

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी सरकार की सफलता उसकी व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से तय होती है। लखीमपुर खीरी में आयोजित यह समारोह केवल जमीन के पट्टे देने का आयोजन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई यात्रा का शुभारंभ है। आपको अधिकार के साथ आत्मसम्मान मिला है और आत्मसम्मान के साथ आत्मनिर्भरता की गारंटी भी जुड़ी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 1955 में पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए परिवारों को उनकी पैतृक संपत्ति का लाभ नहीं मिल पाया था, लेकिन अब राज्य सरकार ने 2,350 परिवारों को 4,251 हेक्टेयर भूमि का मालिकाना हक प्रदान किया है। उन्होंने इसे सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

सीएम योगी ने पूर्व की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले प्रदेश में विकास कुछ क्षेत्रों तक सीमित था और गरीबों के अधिकारों की अनदेखी होती थी। उन्होंने कहा, “आज 25 करोड़ प्रदेशवासी हमारा परिवार हैं और हर जनपद में समान रूप से विकास हो रहा है। पहले प्रदेश में माफिया, गुंडागर्दी, दंगे और कर्फ्यू आम बात थे। आज डबल इंजन की सरकार आपके साथ खड़ी है, अब किसी की हिम्मत नहीं कि आपके अधिकारों और सम्मान को चुनौती दे सके।”

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि थारू जनजाति के लोगों पर दर्ज पुराने मुकदमों को वापस लिया जाएगा, जिन्हें उन्होंने “संघर्ष करने की सजा” बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने उद्यमी रोमी साहनी को चंदन चौकी क्षेत्र में बेकरी उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इससे थारू समुदाय के स्वयं सहायता समूहों को रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने लखीमपुर खीरी की पहचान उसकी उपजाऊ भूमि, किसानों की मेहनत और प्राकृतिक संपदा से जोड़ते हुए कहा कि यह जनपद कभी ‘लक्ष्मीपुर’ के नाम से जाना जाता था और सरकार इसे फिर से समृद्धि के रास्ते पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह प्रदेश में विकास और सामाजिक न्याय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण प्रस्तुत करती है। मुख्यमंत्री का यह कदम विभिन्न समुदायों के अधिकारों को मान्यता देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री ने थारू जनजाति को भूमि का मालिकाना हक कब दिया?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 अप्रैल को लखीमपुर खीरी में थारू जनजाति को भूमि का मालिकाना हक दिया।
सरकार का क्या उद्देश्य है इस कदम के पीछे?
सरकार का उद्देश्य आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
कितने परिवारों को भूमि का मालिकाना हक मिला?
2,350 परिवारों को 4,251 हेक्टेयर भूमि का मालिकाना हक प्रदान किया गया।
क्या पुराने मुकदमे वापस लिए जाएंगे?
जी हां, थारू जनजाति के लोगों पर दर्ज पुराने मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
इस कार्यक्रम का महत्व क्या है?
यह कार्यक्रम दशकों के संघर्ष को सम्मान देने का एक प्रतीक है और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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