क्या युवराज मेहता की मौत केस में एसआईटी ने मांगे और जवाब?
सारांश
Key Takeaways
- एसआईटी ने 100 से अधिक बयानों को दर्ज किया है।
- नोएडा प्राधिकरण से 5 और सवाल पूछे गए हैं।
- रिपोर्ट में लापरवाही और निर्णय लेने की प्रक्रिया की समीक्षा होगी।
- संयुक्त रिपोर्ट एसआईटी को सौंपी जाएगी।
- संभावित प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना।
नोएडा, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। युवराज मेहता की मृत्यु के संबंध में बनाई गई विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच अब और भी गंभीर होती जा रही है। एसआईटी ने नौ घंटे के भीतर 100 से अधिक व्यक्तियों के बयान दर्ज किए हैं और नोएडा प्राधिकरण द्वारा दिए गए उत्तरों पर असंतोष व्यक्त किया है।
इसी कारण से, एसआईटी ने प्राधिकरण से पांच और बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगे हैं। ये उत्तर मंगलवार तक तैयार किए जाने हैं, इसके बाद एसआईटी की टीम एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण पहुंचेगी। जांच के दौरान एसआईटी का रुख काफी सख्त नजर आया। टीम ने नोएडा प्राधिकरण के अलावा, पुलिस और जिला प्रशासन से भी कड़े सवाल पूछे हैं। तीनों विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे घटना के समय की पूरी स्थिति, रिस्पॉन्स टाइम, निर्णय लेने की प्रक्रिया और मौके पर की गई कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी दोपहर तक उपलब्ध कराएं।
एसआईटी यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय पर किस स्तर पर लापरवाही हुई और किन कारणों से स्थिति गंभीर होती गई। इस पूरे मामले में तीन प्रमुख विभागों—नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन (डिजास्टर मैनेजमेंट), और पुलिस—की ओर से करीब 500 पेज से अधिक की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। नोएडा प्राधिकरण पहले ही 60 पेज की रिपोर्ट एसआईटी को सौंप चुका है, जबकि अतिरिक्त जवाबों के बाद यह रिपोर्ट लगभग 100 पेज तक पहुंच जाएगी।
वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से 200 से 300 पेज तक की अलग-अलग रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सभी विभागों से प्राप्त जवाबों को एकत्रित किया जाएगा और इसके बाद संयुक्त रिपोर्ट एसआईटी को सौंपी जाएगी। एसआईटी इस रिपोर्ट का गहन विश्लेषण करने के बाद इसे शासन को भेजेगी। जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर इस मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की रिपोर्ट में अधिकारियों की भूमिका, निर्णय लेने में हुई देरी, लापरवाही और सिस्टम फेल्योर को प्रमुखता से दर्ज किया जाएगा। एसआईटी का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है और किन फैसलों या लापरवाहियों के चलते हालात बेकाबू हुए। एसआईटी द्वारा पूछे गए अतिरिक्त सवालों और जांच की दिशा से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि हर संबंधित विभाग पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
माना जा रहा है कि रिपोर्ट में निलंबन, विभागीय कार्रवाई और सख्त अनुशासनात्मक कदमों की सिफारिश की जाएगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद बड़े स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिल सकती है, जिससे यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा सुर्खियों में रहने वाला है।