क्या अगले हफ्ते केंद्रीय बजट, फेड बैठक और तिमाही नतीजे भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे?
सारांश
Key Takeaways
- अगले हफ्ते केंद्रीय बजट 2026 का ऐलान होगा।
- सेंसेक्स और निफ्टी में संभावित उतार-चढ़ाव।
- फेडरल रिजर्व की बैठक से ब्याज दरों पर कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद।
- सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि।
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नजर।
मुंबई, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आगामी हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना है, क्योंकि इस दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम, जैसे कि यूनियन बजट 2026, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक घटनाएं, बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
पिछले हफ्ते, बिकवाली और वैश्विक चिंताओं के बीच बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऐसे में निवेशक अगले हफ्ते सावधानी से कारोबार करते दिख सकते हैं और इन बड़े संकेतों के लिए तत्पर रहेंगे।
शुक्रवार को बाजार में तेज गिरावट आई, जिससे पूरा हफ्ता कमजोरी के साथ समाप्त हुआ। मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव की अनिश्चितता ने बाजार पर दबाव डाला।
हफ्ते के अंत तक, सेंसेक्स 770 अंक यानी 0.94 प्रतिशत गिरकर 81,537.70 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 241 अंक यानी 0.95 प्रतिशत गिरकर 25,048.65 के स्तर पर समाप्त हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 25,300 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस है, जबकि 25,400 और 25,600 के स्तर भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
गिरावट की स्थिति में 24,880 और 24,587 के स्तर पर बाजार को सपोर्ट मिल सकता है। अगर निफ्टी 24,350 के नीचे गिरता है, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
अगले हफ्ते का सबसे महत्वपूर्ण घटना यूनियन बजट 2026 होगा, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार 1 फरवरी को संसद में प्रस्तुत करेंगी।
बजट में निवेशकों की निगाहें टैक्स से जुड़े ऐलान, सरकारी खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाले कदमों पर होंगी।
बजट में सरकार की प्राथमिकताएं तय करेंगी कि शेयर बाजार किस दिशा में जाएगा।
वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर होंगी, जो 27 से 28 जनवरी के बीच होगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, भविष्य में ब्याज दरों पर फेड अधिकारियों के बयान वैश्विक निवेशकों के दृष्टिकोण और पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।
कंपनियों के तिमाही नतीजों का सीजन भी जारी रहेगा, जिसमें कई बड़ी कंपनियां वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजे पेश करेंगी।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से संबंधित घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि भारत वैश्विक व्यापार वार्ताओं में सक्रिय है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।
इस बीच, सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि ने भी बाजार का ध्यान आकर्षित किया है। भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर अमेरिकी डॉलर के चलते सोने की कीमतें 5,000 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गईं और 4,967 डॉलर से ऊपर का नया रिकॉर्ड बनाया। वहीं, चांदी की कीमतें भी करीब 100 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं।