क्या शेयर बाजार में बल्क डील और ब्लॉक डील क्या होती है, इनमें क्या अंतर है?

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क्या शेयर बाजार में बल्क डील और ब्लॉक डील क्या होती है, इनमें क्या अंतर है?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि शेयर बाजार में बल्क डील और ब्लॉक डील का क्या महत्व है? जानिए इन दोनों डील्स के बीच के अंतर और निवेशकों के लिए इनकी उपयोगिता।

Key Takeaways

  • बल्क डील में 0.5% शेयरों का लेनदेन होता है।
  • ब्लॉक डील में 5 लाख शेयर या 5 करोड़ रुपए की डील होती है।
  • दोनो डील्स शेयर बाजार को प्रभावित करती हैं।
  • निवेश में कंपनी के फंडामेंटल्स पर ध्यान दें।
  • बड़े निवेशकों के रुख को समझना महत्वपूर्ण है।

मुंबई, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अक्सर ‘बल्क डील’ और ‘ब्लॉक डील’ जैसे शब्द चर्चा में रहते हैं। कई बार किसी स्टॉक में अचानक तेजी या गिरावट की वजह भी इन्हीं डील्स से जुड़ी होती है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि आखिर बल्क डील और ब्लॉक डील क्या होती हैं, इनमें क्या फर्क है, और शेयर बाजार में इनका क्या महत्व होता है।

जब किसी शेयर में किसी एक निवेशक या संस्था द्वारा कुल जारी शेयरों का कम से कम 0.5 प्रतिशत या उससे अधिक की खरीद या बिक्री एक ही दिन में की जाती है, तो उसे बल्क डील कहा जाता है। यह डील सामान्य ट्रेडिंग सेशन के दौरान होती है और इसका असर उस शेयर की कीमत पर तुरंत दिखाई देता है। यदि कोई बड़ा निवेशक किसी कंपनी में विश्वास दिखाते हुए भारी मात्रा में शेयर खरीदता है, तो अक्सर रिटेल निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है।

वहीं, ब्लॉक डील शेयर बाजार की एक खास व्यवस्था के तहत होती है। इसमें कम से कम 5 लाख शेयर या 5 करोड़ रुपए से अधिक की डील की जाती है। यह डील स्टॉक एक्सचेंज द्वारा तय किए गए खास समय में होती है, जिसे ब्लॉक डील विंडो कहा जाता है। ब्लॉक डील का उद्देश्य यह होता है कि बड़े सौदे बाजार को ज्यादा प्रभावित किए बिना पूरे किए जा सकें। इसमें खरीदार और विक्रेता पहले से तय होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बल्क डील आम ट्रेडिंग सेशन में होती है और इसकी जानकारी दिन के अंत में सामने आती है, जबकि ब्लॉक डील एक निर्धारित समय में होती है और इसकी सूचना तुरंत सार्वजनिक कर दी जाती है। बल्क डील में शेयरों की संख्या या रकम की सीमा कम होती है, जबकि ब्लॉक डील बड़े निवेशकों के लिए बनाई गई व्यवस्था है, जिसमें रकम और शेयरों की संख्या काफी ज्यादा होती है।

शेयर बाजार में मुख्य रूप से चार तरह की डील देखने को मिलती हैं। पहली, सामान्य ट्रेडिंग डील, जिसमें रोजाना निवेशक शेयर खरीदते और बेचते हैं। दूसरी, बल्क डील, जिसमें बड़ी मात्रा में शेयरों का लेनदेन होता है। तीसरी, ब्लॉक डील, जो खास विंडो के जरिए बड़े सौदों के लिए की जाती है। चौथी, ऑफ-मार्केट डील, जिसमें शेयरों का ट्रांसफर स्टॉक एक्सचेंज के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के बाहर किया जाता है, जैसे प्रमोटर्स के बीच शेयरों का ट्रांसफर।

विशेषज्ञों का कहना है कि बल्क डील और ब्लॉक डील के बारे में जानकारी होने से निवेशकों को यह संकेत मिलता है कि किसी कंपनी में बड़े निवेशक क्या रुख अपना रहे हैं। हालांकि, सिर्फ इन डील्स के आधार पर निवेश का फैसला करना सही नहीं होता है। निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स, रिजल्ट्स और भविष्य की संभावनाओं को भी जरूर देखना चाहिए। ये दोनों डील्स शेयर मार्केट की अहम गतिविधियां हैं, जो बाजार की दिशा और किसी स्टॉक की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।

Point of View

मेरा मानना है कि शेयर बाजार में बल्क डील और ब्लॉक डील्स का ज्ञान निवेशकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये डील्स न केवल बाजार की दिशा तय करती हैं, बल्कि निवेशकों को भी बड़ी कंपनियों के बारे में सूचित करती हैं। इसलिए, निवेशकों को इन गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

बल्क डील और ब्लॉक डील में क्या अंतर है?
बल्क डील में कम से कम 0.5 प्रतिशत शेयरों का लेनदेन होता है, जबकि ब्लॉक डील में कम से कम 5 लाख शेयर या 5 करोड़ रुपए की डील होती है।
क्या बल्क डील का असर शेयर की कीमत पर होता है?
जी हाँ, बल्क डील का असर तुरंत शेयर की कीमत पर दिखाई देता है।
ब्लॉक डील का उद्देश्य क्या है?
ब्लॉक डील का उद्देश्य बड़े सौदों को बाजार को प्रभावित किए बिना पूरा करना होता है।
क्या निवेशक सिर्फ इन डील्स के आधार पर निवेश करें?
नहीं, निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स और भविष्य की संभावनाओं को भी देखना चाहिए।
शेयर बाजार में डील्स के प्रकार क्या हैं?
शेयर बाजार में सामान्य ट्रेडिंग डील, बल्क डील, ब्लॉक डील और ऑफ-मार्केट डील शामिल हैं।
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