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क्या घरेलू स्तर पर मांग मजबूत है, आम बजट 2026-27 में सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए?

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क्या घरेलू स्तर पर मांग मजबूत है, आम बजट 2026-27 में सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए?

सारांश

भारत में व्यवसायों का आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा है। घरेलू मांग में वृद्धि के बीच, सीआईआई ने आगामी आम बजट 2026-27 में सुधारों को जारी रखने की उम्मीद जताई है। जानिए इस विषय पर उनके विचार और सुझाव।

मुख्य बातें

भारत में व्यवसायों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है।
घरेलू मांग में सुधार हो रहा है।
बजट 2026-27 में सुधारों की उम्मीद है।
सीआईआई ने दीर्घकालिक विकास के लिए सुझाव दिए हैं।
डिजिटलीकरण कोष का प्रस्ताव किया गया है।

नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में व्यवसायों का आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है और घरेलू मांग भी स्थिर बनी हुई है। ऐसे में सरकार से आम बजट 2026-27 में सुधारों को जारी रखने की अपेक्षा की जा रही है। यह जानकारी भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा रविवार को जारी किए गए नवीनतम बिजनेस आउटलुक सर्वे में सामने आई है।

वित्तीय वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) में सीआईआई का बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स लगातार तीसरे महीने बढ़कर 66.5 पर पहुंच गया है, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे उच्चतम स्तर है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों ने मांग, मुनाफे और निवेश की स्थितियों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखा है।

सीआईआई के सर्वे में उल्लेख किया गया है कि वित्तीय वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में दो-तिहाई कंपनियों ने मजबूत मांग की रिपोर्ट की है, जबकि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 72 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि भविष्य में मांग में वृद्धि हो सकती है। इसका कारण जीएसटी दरों में कटौती और त्योहारी सीजन में खर्च में वृद्धि है।

इसके अलावा, सर्वे में यह भी कहा गया है कि कंपनियों की हायरिंग और निवेश योजनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि बढ़ता आत्मविश्वास उद्योग की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को दर्शाता है, जिसे मजबूत घरेलू मांग और सुधारों का समर्थन प्राप्त है।

उन्होंने आगे कहा कि कंपनियां आगामी महीनों में विकास की गति में और तेज़ी आने की अपेक्षा करती हैं।

आगामी आम बजट पर सीआईआई ने कहा कि वह उम्मीद करता है कि सरकार भारत को विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए सुधारों को जारी रखेगी।

इंडस्ट्री बॉडी ने दीर्घकालिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्माताओं को कई सुझाव दिए हैं।

बजट को लेकर इंडस्ट्री बॉडी की एक प्रमुख सिफारिश यह है कि लगभग 150 लाख करोड़ रुपए की संशोधित राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) 2.0 के माध्यम से उच्च पूंजीगत व्यय को बनाए रखा जाए।

सीआईआई ने कहा कि ध्यान ऐसी परियोजनाओं पर होना चाहिए जो त्वरित कार्यान्वयन योग्य हों और राजस्व उत्पन्न करें, साथ ही विवादों का त्वरित समाधान किया जाए ताकि अवसंरचना में अधिक निजी निवेश को आकर्षित किया जा सके।

सीआईआई ने घरेलू और विदेशी पूंजी जुटाने के लिए एक इंडिया डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजिक फंड स्थापित करने का भी सुझाव दिया है।

यह फंड एमएसएमई, स्वच्छ ऊर्जा और कौशल विकास जैसी घरेलू प्राथमिकताओं का समर्थन करने के साथ-साथ भारतीय कंपनियों को रणनीतिक विदेशी निवेश में मदद कर सकता है।

अनुपालन के बोझ को कम करने और व्यापार करने में आसानी लाने के लिए, सीआईआई ने एकीकृत उद्यम पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक समय अनुपालन प्रणालियों सहित नियामक डिजिटलीकरण को मजबूत करने के लिए 1,000 करोड़ रुपए के डिजिटलीकरण कोष का प्रस्ताव किया है।

इनोवेशन पर सीआईआई ने 10 उन्नत शिक्षा और अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है, जिनमें से प्रत्येक का बजट 1,000 करोड़ रुपए होगा और जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत में व्यवसायों का आत्मविश्वास और घरेलू मांग का मजबूत होना, सरकार के सुधारात्मक कदमों का परिणाम है। आने वाले बजट को ध्यान में रखते हुए, नीति निर्माताओं को चाहिए कि वे अधिक स्थायी और दीर्घकालिक योजनाओं पर ध्यान दें।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआईआई का बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स क्या है?
सीआईआई का बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स एक माप है जो व्यवसायों के आत्मविश्वास का संकेत देता है। यह इंडेक्स 66.5 पर पहुंच गया है, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे उच्चतम है।
क्यों सीआईआई ने आम बजट 2026-27 में सुधारों की उम्मीद जताई?
सीआईआई का मानना है कि सुधारों को जारी रखने से भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और यह देश को विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाए रखने में मदद करेगा।
कंपनियाँ किस बात को लेकर आशावादी हैं?
कंपनियाँ मांग, मुनाफे और निवेश की स्थिति को लेकर आशावादी हैं, जिससे उन्हें भविष्य में विकास की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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