क्या बजट 2026 से पहले समझना जरूरी है प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर, महंगाई और बाजार के रिश्ते को?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हर वर्ष जब केंद्र सरकार का आम बजट प्रस्तुत किया जाता है, तो सबसे अधिक चर्चा इनकम टैक्स के इर्द-गिर्द होती है, लेकिन इसके साथ-साथ अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। ये ऐसे कर हैं जो हमारी दैनिक जीवन की चीजों की कीमत में शामिल होते हैं। बजट में जब इन करों में परिवर्तन होता है, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब, महंगाई और व्यवसाय पर पड़ता है। इसलिए बजट को सही से समझने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों करों की जानकारी होना आवश्यक है।
प्रत्यक्ष कर वे होते हैं जो व्यक्ति या कंपनी अपनी कमाई पर सीधे सरकार को चुकाते हैं। इन करों का बोझ किसी अन्य पर नहीं डाला जा सकता। भारत में प्रत्यक्ष कर की वसूली और नियमों को देखने का कार्य केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) करता है। प्रत्यक्ष कर में आमतौर पर अधिक कमाई करने वालों से अधिक टैक्स लिया जाता है, ताकि समाज में समानता बनी रहे।
इनकम टैक्स वह कर है जो व्यक्ति या संस्था की कमाई पर लगाया जाता है, जैसे सैलरी, व्यवसाय या संपत्ति से प्राप्त आय। कॉरपोरेट टैक्स कंपनियों के मुनाफे पर लागू होता है। कैपिटल गेन टैक्स शेयर, जमीन या सोने की बिक्री पर होने वाले लाभ पर लागू होता है। इसके अलावा शेयर बाजार में खरीद-बिक्री पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) भी लगता है। कुछ विशेष मामलों में मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (एमएटी) और अल्टरनेट मिनिमम टैक्स (एएमटी) भी लागू होते हैं।
अप्रत्यक्ष कर वे कर हैं जो हमारी कमाई पर सीधे नहीं लगते, बल्कि सामान और सेवाओं की खरीद पर वसूले जाते हैं। जब हम कोई चीज खरीदते हैं, तो दुकानदार टैक्स लेकर सरकार को जमा करता है। इसीलिए इन्हें अप्रत्यक्ष कर कहा जाता है। वर्तमान में भारत में सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर जीएसटी है, जिसने पहले के कई टैक्स जैसे वैट और सर्विस टैक्स की जगह ले ली है।
जीएसटी लगभग सभी वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होता है। इसके अलावा विदेश से आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी लगती है। कुछ विशेष चीजों जैसे पेट्रोल, डीजल, तंबाकू और कोयला पर सेस भी लगाया जाता है। ये सभी टैक्स अप्रत्यक्ष कर की श्रेणी में आते हैं।
केंद्र सरकार को होने वाली कुल टैक्स कमाई का एक बड़ा हिस्सा अप्रत्यक्ष करों से आता है। बजट में अगर जीएसटी, कस्टम ड्यूटी या सेस में बदलाव किया जाता है, तो इसका असर दैनिक जीवन की चीजों की कीमतों पर पड़ता है। मोबाइल, कपड़े, दवाइयां या खाने-पीने की चीजें सस्ती या महंगी हो सकती हैं। इससे महंगाई और बाजार का माहौल भी प्रभावित होता है।
अप्रत्यक्ष कर का प्रभाव तुरंत महसूस होता है। यदि मोबाइल के पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी कम कर दी जाए, तो मोबाइल सस्ते हो सकते हैं। वहीं, यदि सिगरेट या कोल्ड ड्रिंक पर सेस बढ़ा दिया जाए, तो उनकी कीमत बढ़ जाती है, क्योंकि ये टैक्स सामान की कीमत में जुड़े होते हैं, इसलिए हर ग्राहक को ये चुकाने पड़ते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर एक समान लागू होता है। ऐसे में गरीब लोगों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ सकता है। इसी कारण हर बजट में यह चर्चा होती है कि आवश्यक सामान पर टैक्स कम होना चाहिए या नहीं, लग्जरी चीजों पर अधिक टैक्स लगाया जाए या नहीं और देसी उद्योगों को सुरक्षा देने के लिए कस्टम ड्यूटी बढ़ाई जाए या घटाई जाए।
आगामी आम बजट 2026 में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से जुड़े निर्णय सरकार की आमदनी, महंगाई, कारोबार और आम लोगों की जेब को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए बजट को सही तरीके से समझने के लिए इन करों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।