जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल ग्रोथ चार गुना, 11 महीनों में 3 करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत: फाडा
सारांश
मुख्य बातें
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) के अध्यक्ष साई गिरिधर ने 22 सितंबर 2026 को कहा कि जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद भारतीय ऑटो रिटेल क्षेत्र की वार्षिक वृद्धि दर चार गुना से अधिक हो गई है और वाहनों की किफायती कीमत इस उछाल का सबसे बड़ा चालक बनकर उभरी है। जीएसटी 2.0 की पहली वर्षगांठ के अवसर पर दिए गए बयान में उन्होंने इसे बाज़ार का ढाँचागत विस्तार बताया, न कि महज मौसमी तेजी।
मुख्य घटनाक्रम
अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच 11 महीनों में देशभर में 3 करोड़ से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ, जो सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसके विपरीत, एक वर्ष पहले की समान अवधि में यह वृद्धि दर 5 प्रतिशत से भी कम थी। गिरिधर के अनुसार, वृद्धि दर में यह चार गुना से अधिक का उछाल जीएसटी 2.0 के संरचनात्मक प्रभाव का प्रमाण है।
किफायती कीमत बनी सबसे बड़ी ताकत
फाडा अध्यक्ष ने कहा, 'इस तेज वृद्धि का सबसे बड़ा आधार एक शब्द है — किफायती कीमत।' उनके अनुसार, जीएसटी 2.0 ने छोटी कारों, कम्यूटर दोपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और वाणिज्यिक वाहनों की ऑन-रोड लागत को स्थायी रूप से कम किया है। इससे न केवल पहले से मौजूद मांग जल्दी सामने आई, बल्कि उन ग्राहकों ने भी शोरूम का रुख किया जो लंबे समय से खरीद टाल रहे थे।
गौरतलब है कि ये वे श्रेणियाँ हैं जो भारत के बड़े उपभोक्ता वर्ग — ग्रामीण परिवारों, छोटे व्यवसायियों और मध्यवर्गीय शहरी खरीदारों — की पहुँच में आती हैं। गिरिधर ने कहा, 'पिछले एक वर्ष का सबसे बड़ा सबक यही है कि मांग बढ़ाने के लिए किफायती कीमत सबसे शक्तिशाली साधन है।'
रिकॉर्ड बिक्री और नए मील के पत्थर
दोपहिया वाहनों ने, जिन्हें व्यापक जन-आधारित माँग का प्रमुख संकेतक माना जाता है, 2018 के बाद का सर्वोच्च बिक्री स्तर फिर से हासिल कर लिया है। यात्री वाहन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पड़ाव भी पार हुआ — पहली बार वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों ने पेट्रोल वाहनों की बिक्री को पीछे छोड़ दिया है। साथ ही, कई श्रेणियों में ग्रामीण बाज़ारों की वृद्धि दर शहरी भारत से अधिक तेज रही है, जो माँग के भौगोलिक विस्तार का संकेत है।
यह ऐसे समय में आया है जब पिछले त्योहारी सीजन में दर्ज हुई जोरदार बिक्री के बारे में उद्योग विश्लेषकों ने यह आशंका जताई थी कि यह रफ्तार टिकाऊ नहीं होगी। गिरिधर ने इस धारणा को गलत साबित होते हुए बताया कि वह मजबूत माँग अब उद्योग के लिए 'न्यू नॉर्मल' बनती जा रही है।
सरकार को श्रेय, चुनौतियाँ भी स्वीकार
गिरिधर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को श्रेय देते हुए कहा कि नीति-निर्माण के केंद्र में किफायती वाहन उपलब्ध कराने की सोच रखने से ऑटो क्षेत्र में खपत और विकास का नया चक्र प्रारंभ हुआ है। हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि वाहन निर्माता अभी भी कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमोडिटी लागत और मुद्रा विनिमय दरों से जुड़े दबावों का सामना कर रहे हैं।
आगे का परिदृश्य
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी सीजन 2026 में माँग और तेज होने की संभावना है, बशर्ते वैश्विक कमोडिटी दबाव नियंत्रण में रहें। वैकल्पिक ईंधन वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी और ग्रामीण बाज़ार की तेज रफ्तार संकेत देती है कि जीएसटी 2.0 का सबसे गहरा असर अगले एक-दो वर्षों में और स्पष्ट रूप से दिखेगा।