क्या एआई नौकरी के क्षेत्र में सुनामी जैसी स्थिति उत्पन्न कर रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- एआई की वजह से नौकरी के क्षेत्र में बदलाव आ रहा है।
- 40 प्रतिशत नौकरियाँ एआई से प्रभावित हो रही हैं।
- स्किल्स में निवेश करना आवश्यक है।
- वैश्विक आर्थिक विकास पर एआई का असर हो सकता है।
- दुनिया को एआई को आसानी से उपलब्ध कराना चाहिए।
दावोस, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने बताया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के कारण नौकरी के क्षेत्र में एक सुनामी जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। उनका कहना था कि एआई कुछ नौकरियों को सुधार रहा है, वहीं कुछ नौकरियों को बदल भी रहा है।
दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के दौरान एक सत्र में बोलते हुए जॉर्जीवा ने कहा कि दुनिया अब एआई के युग में प्रवेश कर चुकी है। हालांकि, उन्हें चिंता है कि एआई से मिलने वाले अवसर हर जगह समान नहीं हैं; कहीं ज्यादा और कहीं कम।
उन्होंने कहा, "एआई तेजी से अर्थव्यवस्थाओं को बदल रहा है। कुछ नौकरियाँ बढ़ रही हैं, कुछ समाप्त हो रही हैं। हमें लोगों की स्किल्स में निवेश करना होगा और समाज को इसके लिए तैयार करना चाहिए।"
आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि एआई के कारण अनुवाद, भाषा समझने और रिसर्च से जुड़े कार्यों में उत्पादन क्षमता बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में एआई लोगों की मदद कर रहा है, उनकी जगह नहीं ले रहा। लेकिन उन्होंने उन समुदायों के बारे में चिंता जताई जहां एआई की पहुँच अभी भी नहीं है।
आईएमएफ के अनुसार, दुनिया में औसतन 40 प्रतिशत नौकरियां एआई से प्रभावित हो रही हैं। इनमें से कुछ नौकरियां बेहतर बन रही हैं, कुछ बदल रही हैं और कुछ समाप्त भी हो सकती हैं। विकसित देशों में यह असर करीब 60 प्रतिशत नौकरियों पर है, जबकि गरीब देशों में यह 20 से 26 प्रतिशत के बीच है।
जॉर्जीवा ने कहा कि एआई की वजह से वैश्विक आर्थिक विकास पर 0.1 से 0.8 प्रतिशत तक का असर पड़ सकता है। अगर उत्पादन क्षमता में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो दुनिया की आर्थिक ग्रोथ कोरोना महामारी से पहले के स्तर से भी ज्यादा हो सकती है।
इस सत्र में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सिर्फ बड़ा एआई मॉडल बनाना ही किसी देश को ताकतवर नहीं बनाता।
उन्होंने कहा कि हमें पांचवीं औद्योगिक क्रांति की अर्थव्यवस्था को समझना होगा। इस दौर में असली ताकत आरओआई यानी निवेश पर मिलने वाले लाभ से आएगी। सबसे कम लागत में सबसे ज्यादा फायदा पाने वाली तकनीक ही सफल होगी।
सऊदी अरब के निवेश मंत्रालय के निवेश मंत्री खालिद अल-फालीह ने कहा कि एआई को लेकर दुनिया में तेज प्रतिस्पर्धा चल रही है। हर देश इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहता है, लेकिन एआई की असली ताकत तब सामने आएगी जब यह हर किसी के लिए आसानी से उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि एआई का प्रसार सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दुनियाभर में फैलना चाहिए। खालिद अल-फालीह ने यह भी कहा कि तकनीक और एआई सऊदी अरब के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।