क्या जोमैटो सीईओ के दावे सही हैं? गिग वर्कर्स यूनियन ने उठाए सवाल

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क्या जोमैटो सीईओ के दावे सही हैं? गिग वर्कर्स यूनियन ने उठाए सवाल

सारांश

गिग श्रमिकों की स्थिति को लेकर जोमैटो के सीईओ के दावे और गिग वर्कर्स यूनियन के विरोध के बीच क्या स्थिति है? जानिए इस गर्मागर्म बहस के बारे में।

Key Takeaways

  • गिग श्रमिकों की वास्तविक कमाई 81 रुपए प्रति घंटा है।
  • जोमैटो के सीईओ के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
  • डिलीवरी पार्टनर्स को सुरक्षा लाभ नहीं मिलते।
  • टिप्स का प्रतिशत बहुत कम है, जिससे आय प्रभावित होती है।
  • गिग वर्कर्स की आवाज़ को सुनना ज़रूरी है।

नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गिग श्रमिकों की कार्यशैली और उनके भुगतान पर चल रही बहस के बीच, तेलंगाना स्थित गिग वर्कर्स यूनियन ने जोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल के उन दावों को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कंपनी के डिलीवरी मॉडल का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि जमीनी स्थिति पूरी तरह से भिन्न है।

गिग वर्कर्स यूनियन का यह बयान तब आया जब हाल ही में गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह बताया कि कैसे जोमैटो और ब्लिंकइट के डिलीवरी पार्टनर्स अपनी आय अर्जित करते हैं।

उन्होंने बताया कि 2025 में डिलीवरी पार्टनर्स (टिप्स को छोड़कर) औसतन 102 रुपए प्रति घंटा कमाएंगे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.9 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा 2024 में 92 रुपए था।

सीईओ ने आगे कहा, “यह पिछले वर्ष की तुलना में 10.9 प्रतिशत की वृद्धि है। लंबी अवधि में भी प्रति घंटा कमाई में लगातार वृद्धि देखी गई है।”

गोयल ने कहा कि डिलीवरी पार्टनर अपने कार्य के घंटे स्वयं चुनने के लिए स्वतंत्र हैं, ग्राहकों से मिलने वाली पूरी टिप उन्हें मिलती है, और उन्हें 10 मिनट डिलीवरी सेवाओं में असुरक्षित ड्राइविंग करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है।

उन्होंने कंपनी द्वारा दी जाने वाली बीमा कवरेज और पेंशन सहायता जैसी सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी।

गोयल के दावों का खंडन करते हुए तेलंगाना गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स एसोसिएशन (टीजीपीडब्लूए) ने कहा कि जमीनी स्थिति राइडर्स के लिए काफी भिन्न है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यूनियन ने कहा कि ईंधन, वाहन रखरखाव और अन्य खर्चों को घटाने के बाद, वास्तविक कमाई घटकर लगभग 81 रुपए प्रति घंटा रह जाती है।

एसोसिएशन के अनुसार, 26 दिनों तक प्रतिदिन 10 घंटे काम करने वाला डिलीवरी पार्टनर लगभग 21,000 रुपए प्रति माह कमाएगा।

एसोसिएशन ने यह भी बताया कि डिलीवरी पार्टनर्स को वेतन सहित अवकाश, सामाजिक सुरक्षा लाभ या दुर्घटना बीमा की गारंटी नहीं मिलती है।

एसोसिएशन ने गोयल द्वारा टिप पर दिए जा रहे जोर पर भी सवाल उठाया और कहा कि जोमैटो पर केवल लगभग 5 प्रतिशत ऑर्डर पर ही टिप मिलती है, जिससे अधिकांश राइडर्स की अतिरिक्त आय सीमित हो जाती है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि गिग वर्कर्स की वास्तविकता और उनके अधिकारों को समझना अत्यंत आवश्यक है। कंपनियों की बातों पर विश्वास करने से पहले, हमें उन श्रमिकों की आवाज़ को सुनना चाहिए जो इस काम में लगे हैं।
NationPress
04/01/2026

Frequently Asked Questions

जोमैटो के सीईओ के दावे क्या हैं?
जोमैटो के सीईओ ने कहा कि गिग श्रमिक औसतन 102 रुपए प्रति घंटा कमाते हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.9% अधिक है।
गिग वर्कर्स यूनियन ने क्या जवाब दिया?
गिग वर्कर्स यूनियन ने कहा कि वास्तविक कमाई 81 रुपए प्रति घंटा रह जाती है, जो खर्चों के बाद बेहद कम है।
क्या गिग श्रमिकों को सुरक्षा लाभ मिलते हैं?
नहीं, गिग श्रमिकों को वेतन सहित अवकाश, सामाजिक सुरक्षा लाभ या दुर्घटना बीमा की गारंटी नहीं मिलती है।
जोमैटो पर टिप्स की स्थिति क्या है?
जोमैटो पर केवल 5% ऑर्डर पर ही टिप मिलती है, जिससे अधिकांश राइडर्स की अतिरिक्त आय सीमित हो जाती है।
क्या गिग वर्कर्स की स्थिति में सुधार हो सकता है?
यह स्थिति तब तक नहीं सुधरेगी जब तक कि गिग श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा नहीं की जाती।
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