क्या इंदौर दूषित जल मामले में मंत्री और विधायक को इस्तीफा देना चाहिए? : अरुण यादव
सारांश
Key Takeaways
- इंदौर में दूषित जल पीने से हुई त्रासदी से 15 लोगों की मृत्यु हुई।
- अरुण यादव ने कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफे की मांग की है।
- उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की गई है।
- दोषी अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग की गई है।
भोपाल, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा की घटना को शासन-प्रशासन की गंभीर लापरवाही करार देते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री व क्षेत्रीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफा मांगने का निर्णय लिया है।
यादव ने कहा कि इंदौर में दूषित जल पीने से 15 नागरिकों की असमय और दर्दनाक मृत्यु तथा 500 से अधिक लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की घटना प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीन शासन व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंदौर को शर्मसार करने वाली घटना बताया।
उन्होंने आगे कहा कि इंदौर को वर्षों से स्वच्छता में देश का सिरमौर कहा जा रहा है, लेकिन यह घटना यह साबित करती है कि केवल दिखावटी स्वच्छता से नागरिकों की जान सुरक्षित नहीं होती। यहां ‘दीया तले अंधेरा’ की कहावत पूरी तरह सच हो रही है। जिस शहर को मॉडल सिटी कहा जाता है, वहां नागरिकों को पीने का सुरक्षित पानी भी नहीं मिल रहा।
अरुण यादव ने कहा कि इंदौर में भाजपा का लंबे समय से प्रतिनिधित्व रहा है। महापौर, विधायक और कैबिनेट मंत्री इंदौर से हैं, फिर भी इस गंभीर लापरवाही का होना शासन की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने महापौर को नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा देने की सलाह दी और कैलाश विजयवर्गीय से भी जिम्मेदारी लेते हुए पद से त्यागपत्र देने की मांग की।
यादव ने कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और स्वतंत्र सीबीआई जांच कराई जाए ताकि सच्चाई स्पष्ट हो सके और दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि दूषित जल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए। मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा और बीमार नागरिकों को निःशुल्क व बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।