क्या भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 687 बिलियन डॉलर हुआ?

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क्या भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 687 बिलियन डॉलर हुआ?

सारांश

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 392 मिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 687 बिलियन डॉलर पर पहुँच गया है। यह वृद्धि आरबीआई द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार हो रही है, जिसमें गोल्ड रिजर्व और फॉरेन करेंसी एसेट्स का भी उल्लेख है। जानिए इससे अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

Key Takeaways

  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 687 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है।
  • गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 1.56 बिलियन डॉलर बढ़कर 112.83 बिलियन डॉलर हो गई है।
  • फॉरेन करेंसी एसेट्स में कमी आई है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • बढ़ता हुआ भंडार विदेशी व्यापार को बढ़ावा देता है।

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में 392 मिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 687 बिलियन डॉलर पर पहुँच गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को साझा की।

आरबीआई ने बताया कि 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के एक महत्वपूर्ण घटक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 1.56 बिलियन डॉलर बढ़कर 112.83 बिलियन डॉलर हो गई है।

गोल्ड रिजर्व में वृद्धि का एक कारण सोने की कीमतों का तेजी से बढ़ना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का मूल्य पिछले एक सप्ताह में लगभग 2.5 प्रतिशत और पिछले एक महीने में लगभग 5.5 प्रतिशत बढ़ चुका है।

विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 1.12 बिलियन डॉलर घटकर 550.86 बिलियन डॉलर रह गई है।

एफसीए में डॉलर के साथ दुनिया की अन्य प्रमुख करेंसी जैसे येन, यूरो और पाउंड शामिल होते हैं, जिनकी वैल्यू डॉलर में व्यक्त की जाती है।

आरबीआई के अनुसार, 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में एसडीआर की वैल्यू 39 मिलियन डॉलर घटकर 18.73 बिलियन डॉलर हो गई है। आईएमएफ में रिसर्व पॉजिशन की वैल्यू 13 मिलियन डॉलर कम होकर 4.758 बिलियन डॉलर हो गई है।

किसी भी देश के लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और यह उस देश की आर्थिक स्थिति का संकेत देता है। इसके अलावा, यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपए पर दबाव बढ़ता है और उसकी वैल्यू कम होती है, तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर डॉलर के मुकाबले रुपए को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रख सकता है।

बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार यह भी दर्शाता है कि देश में डॉलर की आवक बड़ी मात्रा में बनी हुई है और यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। साथ ही, इसके बढ़ने से देश के लिए विदेशों में व्यापार करना भी आसान हो जाता है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार हमारी आर्थिक मजबूती का प्रतीक है। यह न केवल मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद करता है, बल्कि वैश्विक व्यापार में competitiveness को भी बनाए रखता है।
NationPress
16/01/2026

Frequently Asked Questions

विदेशी मुद्रा भंडार क्या होता है?
विदेशी मुद्रा भंडार वह संपत्ति होती है जो किसी देश के पास विदेशी मुद्रा, सोने, और अन्य वित्तीय संपत्तियों के रूप में होती है।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों महत्वपूर्ण है?
यह किसी देश की आर्थिक स्थिति का संकेत देता है और मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद करता है।
गोल्ड रिजर्व क्या है?
गोल्ड रिजर्व वह स्वर्ण भंडार है जो किसी देश द्वारा विदेशी मुद्रा के मुकाबले मुद्रा की स्थिरता के लिए रखा जाता है।
फॉरेन करेंसी एसेट्स में क्या शामिल होता है?
यह अन्य देशों की करेंसी जैसे डॉलर, यूरो, और पाउंड आदि को शामिल करता है, जिनका मूल्य डॉलर में व्यक्त किया जाता है।
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का क्या अर्थ है?
यह दर्शाता है कि देश में डॉलर की आवक बड़ी मात्रा में बनी हुई है, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है।
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