क्या पाकिस्तान में सैनिटरी पैड पर अब भी 40 प्रतिशत टैक्स है?

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क्या पाकिस्तान में सैनिटरी पैड पर अब भी 40 प्रतिशत टैक्स है?

सारांश

पाकिस्तान में सैनिटरी पैड पर 40 प्रतिशत टैक्स क्यों है? यह जानकर चौंक जाएंगे! जानें इस मुद्दे पर नई रिपोर्ट के तथ्य और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

Key Takeaways

  • पाकिस्तान में सैनिटरी पैड को लग्जरी वस्तु माना जाता है।
  • इस पर 40 प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा है।
  • दुनिया के अन्य देशों ने इस पर कर समाप्त कर दिए हैं।
  • पाकिस्तान में कोई राष्ट्रीय नीति नहीं है।
  • महवारी जस्टिस संस्था इस मुद्दे पर सक्रिय है।

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में आज भी मासिक धर्म के दौरान उपयोग होने वाले सैनिटरी पैड को लग्जरी वस्तु समझा जाता है, और सरकार इन पर 40 प्रतिशत तक टैक्स वसूल रही है। यह जानकारी एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, भले ही दुनिया भर में मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता (मेंस्ट्रुअल हेल्थ) के प्रति जागरूकता बढ़ी है और मलावी तथा इथियोपिया जैसे कई देशों ने पिछले पांच वर्षों में पीरियड उत्पादों पर लगने वाले विभिन्न कर और आयात शुल्क खत्म कर दिए हैं, लेकिन पाकिस्तान अब भी इन्हें आवश्यक वस्तु के बजाय लग्ज़री आइटम मानता है।

एनपीआर डॉट ओआरजी की रिपोर्ट में कहा गया है, “पाकिस्तान में पीरियड उत्पादों पर लग्जरी टैक्स लगाया जाता है। इन्हें न तो सामान्य बिक्री वस्तुओं की तरह टैक्स किया जाता है और न ही आवश्यक वस्तुओं की तरह कर छूट दी जाती है।”

2025 की यूनिसेफ रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर “कोई राष्ट्रीय नीति, योजना या रणनीति मौजूद नहीं है।”

मासिक धर्म न्याय के लिए काम करने वाली पाकिस्तानी गैर-लाभकारी संस्था ‘महवारी जस्टिस’ की कार्यकारी निदेशक बुशरा महनूर ने एनपीआर को बताया कि पाकिस्तान का संविधान कई ऐसी वस्तुओं को आवश्यक मानता है, जिन पर कर छूट दी जाती है। उन्होंने कहा, “चिकित्सा सामग्री जैसी कई चीजें आवश्यक मानी जाती हैं। यहां तक कि पशुपालन उद्योग के लिए पशु वीर्य को भी आवश्यक वस्तु माना जाता है, लेकिन पीरियड उत्पादों को नहीं। इसके बजाय सैनिटरी पैड पर लगभग 40 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है।”

वर्ष 2025 में बुशरा महनूर की टीम ने सैनिटरी पैड पर लग्ज़री टैक्स हटाने के लिए एक याचिका के समर्थन में 10 हजार से अधिक हस्ताक्षर जुटाए थे। सितंबर में मासिक धर्म उत्पादों को लग्ज़री की श्रेणी से हटाकर आवश्यक वस्तु घोषित करने के लिए एक मुकदमा भी दायर किया गया। हालांकि, देश की अस्थिर राजनीतिक और न्यायिक स्थिति के कारण अब तक इस मामले की सुनवाई की तारीख तय नहीं हो पाई है।

वहीं, भारत ने जुलाई 2018 में सैनिटरी पैड पर लगने वाला टैक्स पूरी तरह समाप्त कर दिया था। सरकार ने इन्हें लग्जरी नहीं बल्कि आवश्यक वस्तु मानते हुए 12 प्रतिशत जीएसटी हटाया, जिससे कीमतें कम हुईं और खासकर लड़कियों की शिक्षा व बेहतर मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा मिला।

Point of View

यह स्पष्ट है कि मासिक धर्म संबंधी उत्पादों पर इस तरह का टैक्स न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह सामाजिक न्याय का भी उल्लंघन करता है। हमें एक सशक्त और समान समाज के लिए इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान में सैनिटरी पैड पर टैक्स क्यों है?
पाकिस्तान में सैनिटरी पैड को लग्जरी वस्तु समझा जाता है, जिसके कारण इन पर 40 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है।
क्या अन्य देशों ने सैनिटरी पैड पर टैक्स खत्म किया है?
हां, मलावी और इथियोपिया जैसे कई देशों ने पीरियड उत्पादों पर लगने वाले टैक्स खत्म कर दिए हैं।
क्या पाकिस्तान में मासिक धर्म स्वास्थ्य के लिए कोई नीति है?
2025 की यूनिसेफ रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर कोई राष्ट्रीय नीति नहीं है।
भारत ने सैनिटरी पैड पर टैक्स कब खत्म किया?
भारत ने जुलाई 2018 में सैनिटरी पैड पर लगने वाला टैक्स पूरी तरह से समाप्त कर दिया।
महवारी जस्टिस संस्था का उद्देश्य क्या है?
महवारी जस्टिस संस्था मासिक धर्म न्याय के लिए काम करती है और सैनिटरी पैड पर टैक्स हटाने के लिए सक्रिय है।
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