क्या वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी 7.5 से 7.8 प्रतिशत बढ़ सकती है? रिपोर्ट

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क्या वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी 7.5 से 7.8 प्रतिशत बढ़ सकती है? रिपोर्ट

सारांश

भारत की जीडीपी में वित्त वर्ष 2026 में 7.5 से 7.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। मुख्य कारण त्योहारों के दौरान बढ़ी खरीदारी और सेवा क्षेत्र में सुधार है। यह रिपोर्ट डेलॉयट इंडिया द्वारा प्रस्तुत की गई है। जानिए इसके पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।

Key Takeaways

  • वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.5 से 7.8 प्रतिशत है।
  • त्योहारों के दौरान खरीदारी में वृद्धि और सेवा क्षेत्र में सुधार मुख्य कारण हैं।
  • वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि 6.6 से 6.9 प्रतिशत रहने की संभावना है।

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वित्त वर्ष 2026 में 7.5 से 7.8 प्रतिशत के बीच बढ़ने का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह त्योहारों के दौरान बढ़ी खरीददारी तथा सेवा क्षेत्र में सकारात्मक गतिविधियाँ हैं। यह जानकारी डेलॉयट इंडिया द्वारा जारी रिपोर्ट में दी गई है।

हालांकि, इस रिपोर्ट में यह भी इंगित किया गया है कि पिछले वर्ष की उच्च वृद्धि दर और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण वित्त वर्ष 2027 में विकास की गति थोड़ी कम होकर 6.6 से 6.9 प्रतिशत रह सकती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में भारत की वास्तविक जीडीपी में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि व्यापार में बाधाओं, विदेशी नीतियों में परिवर्तनों और निवेश में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी हुई है।

डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि भारत की यह मजबूती स्वाभाविक नहीं है, बल्कि यह लगातार विकास को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि 2026 में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने से हटकर उत्पादन में सुधार लाने पर होगा, जिसमें छोटे उद्योगों (एमएसएमई) और टियर-2 व टियर-3 शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि जबकि वैश्विक स्तर पर कुछ जोखिम मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभाव वित्त वर्ष 2026 में कम देखने को मिल सकता है। साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता इस वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे विदेशी निवेश में वृद्धि और मुद्रा में स्थिरता बनी रह सकती है।

रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में सरकार के द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय जैसे टैक्स में छूट, ब्याज दरों में कमी और जीएसटी में बदलाव ने घरेलू मांग को बढ़ावा दिया और आर्थिक सुधार को तेज किया।

महंगाई में कमी और विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से निर्यात में भी मजबूती आई है।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि भारत ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय मुक्त व्यापार संगठन (ईएफटीए) समझौता लागू किया गया और इजरायल के साथ बातचीत शुरू की गई।

इन समझौतों से भारत में उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, सेवाओं का दायरा अमेरिका के बाहर भी विस्तारित होगा, और निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा। इससे विदेशी निवेश (एफडीआई) में वृद्धि की संभावना है, जो बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक है।

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में जीडीपी 8.2 प्रतिशत बढ़ी, उद्योगों के उत्पादन में सुधार हुआ और जीएसटी संग्रह स्थिर रहा, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी, वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में गिरावट और सरकार की टैक्सजीएसटी में बदलाव आने वाले समय में खर्च और निवेश दोनों को बढ़ावा देंगे।

Point of View

आने वाले वित्त वर्ष में वैश्विक चुनौतियों का सामना करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सही नीतियों के माध्यम से विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

भारत की जीडीपी कितनी बढ़ने का अनुमान है?
वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी 7.5 से 7.8 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
इस वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
इस वृद्धि का मुख्य कारण त्योहारों के दौरान बढ़ी खरीददारी और सेवा क्षेत्र में सुधार है।
वित्त वर्ष 2027 के लिए क्या पूर्वानुमान है?
वित्त वर्ष 2027 में विकास की रफ्तार 6.6 से 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
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