30 जुलाई 2026
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क्या राघव चड्ढा ने '10 मिनट डिलीवरी' का वीडियो पोस्ट कर खुद प्रेशर और चुनौतियों का अनुभव किया?

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क्या राघव चड्ढा ने '10 मिनट डिलीवरी' का वीडियो पोस्ट कर खुद प्रेशर और चुनौतियों का अनुभव किया?

सारांश

गिग वर्कर्स की समस्या को समझते हुए राघव चड्ढा ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने वीडियो में दिखाया कि कैसे 10 मिनट डिलीवरी का वादा गिग वर्कर्स पर दबाव बनाता है। क्या सरकार इस दिशा में कुछ करेगी? जानें पूरी कहानी।

मुख्य बातें

गिग वर्कर्स की चुनौतियों को समझना आवश्यक है।
10 मिनट डिलीवरी का वादा दबाव डालता है।
सरकार को गिग वर्कर्स के लिए नीतियों की आवश्यकता है।
मजदूरी और सुरक्षा की कमी एक गंभीर समस्या है।
गिग अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए प्रयास जरूरी हैं।

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने गिग वर्कर्स को महत्वपूर्ण राहत देते हुए 10 मिनट डिलीवरी की समय सीमा को समाप्त करने की सिफारिश की है। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इसके लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद भी दिया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो साझा किया है।

सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वे कुछ गिग वर्कर्स से संवाद कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को समझ रहे हैं। साथ ही, वे रात के समय खुद गिग वर्कर के रूप में लोगों के घरों में सामान की डिलीवरी करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो में उन्होंने उल्लेख किया कि कंपनियों ने अपने उत्पाद पर यह स्पष्ट कर दिया है कि सामान 10 मिनट में पहुँच जाएगा। मैंने एक दिन डिलीवरी पार्टनर के रूप में बिताया और '10 मिनट डिलीवरी' के वादे से उत्पन्न होने वाले दबाव, जोखिम और चुनौतियों का अनुभव किया।

इस वीडियो में चड्ढा ब्लिंकिट की यूनिफॉर्म पहने हुए हैं, उनकी पीठ पर डिलीवरी बैग है और वे एक अन्य ब्लिंकिट राइडर के साथ स्कूटर पर निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में दोनों डिलीवरी करते दिखते हैं, और वे सड़क पर गलत दिशा में चलते हुए भी नजर आते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

वीडियो के अंत में, वह एक डिलीवरी पूरी करने के बाद सड़क पर चाय पीते हुए डिलीवरी एजेंट से बात कर उसकी समस्याओं को समझते हैं।

गौरतलब है कि लगभग एक महीने पहले, राघव चड्ढा ने गिग अर्थव्यवस्था की वास्तविकता को उजागर करते हुए एक पोस्ट किया था। उन्होंने ब्लिंकिट के एक डिलीवरी एजेंट की कमाई का स्क्रीनशॉट साझा किया था, जिसमें यह दर्शाया गया था कि 28 डिलीवरी करने के बाद उस राइडर को केवल 762.57 रुपए मिले।

उस स्क्रीनशॉट के अनुसार, लगभग 15 घंटे काम करने के बाद डिलीवरी एजेंट की प्रति घंटे की कमाई सिर्फ 52 रुपए थी। इसमें 690.57 रुपए ऑर्डर पेमेंट से, 72 रुपए इंसेंटिव से और बाकी कुछ भी नहीं। इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया था।

राघव चड्ढा ने तब लिखा था कि कम मजदूरी, अधिक लक्ष्य, नौकरी की सुरक्षा का अभाव और सम्मान की कमी, ये सभी आज के गिग वर्कर्स की वास्तविकता हैं। उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण कम वेतन पाने वाले और अधिक काम करने वाले लोगों की मदद से नहीं कर सकता। उनके अनुसार, गिग वर्कर्स के लिए उचित वेतन, मानवता के घंटे और सामाजिक सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या राघव चड्ढा का वीडियो गिग वर्कर्स की समस्याओं को उजागर करता है?
जी हां, राघव चड्ढा ने अपने वीडियो में गिग वर्कर्स के साथ बातचीत करके उनकी समस्याओं को उजागर किया है।
10 मिनट डिलीवरी का क्या मतलब है?
10 मिनट डिलीवरी का मतलब है कि कंपनियां वादा करती हैं कि वे सामान को 10 मिनट के भीतर डिलीवर करेंगी।
क्या सरकार गिग वर्कर्स के लिए कोई नीति बना रही है?
हां, केंद्र सरकार ने गिग वर्कर्स को राहत देने के लिए कुछ नीतियों पर विचार कर रही है।
राघव चड्ढा ने क्या अनुभव किया?
उन्होंने गिग वर्कर बनकर खुद 10 मिनट डिलीवरी के दबाव और चुनौतियों का अनुभव किया।
गिग वर्कर्स की वास्तविकता क्या है?
गिग वर्कर्स की वास्तविकता में कम मजदूरी, भारी टारगेट और नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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