क्या सेबी की बड़ी तैयारी से अनलिस्टेड शेयर बाजार में आएगा बड़ा बदलाव?

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क्या सेबी की बड़ी तैयारी से अनलिस्टेड शेयर बाजार में आएगा बड़ा बदलाव?

सारांश

भारत के अनलिस्टेड शेयर बाजार में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन संभव है। सेबी की योजना इन कंपनियों के विनियमन को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएँ चल रही हैं। जानें इस बदलाव से निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा।

Key Takeaways

  • सेबी अनलिस्टेड शेयर बाजार को विनियमित करने पर विचार कर रहा है।
  • यह कदम निवेशकों को बेहतर जानकारी और सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
  • अनलिस्टेड कंपनियों पर सख्त नियम लागू नहीं होते।
  • बाजार में मूल्यांकन के मुद्दों को संबोधित किया जा सकता है।
  • निवेशकों को सावधानीपूर्वक निर्णय लेने की आवश्यकता है।

मुंबई, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के अनलिस्टेड शेयर बाजार में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन संभव है, क्योंकि बाजार नियामक सेबी इस क्षेत्र को नियंत्रित करने की योजना बना रहा है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को बताया कि नियामक यह विचार कर रहा है कि क्या उसे अनलिस्टेड स्टॉक मार्केट को नियंत्रित करना चाहिए, जो कि वर्तमान में सेबी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

देश की आर्थिक राजधानी में एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया के 2025-26 के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए, सेबी के प्रमुख ने कहा कि इस मुद्दे पर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ वार्ता चल रही है।

पांडे ने विस्तार से बताया, "सेबी को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि क्या उसके पास उन कंपनियों को विनियमित करने का कानूनी अधिकार है जो स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध नहीं हैं और इस प्रकार के विनियमन का दायरा कितना बढ़ाया जा सकता है।"

अनलिस्टेड स्टॉक मार्केट में वे कंपनियां शामिल होती हैं जो कि वर्तमान में स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध नहीं हैं।

इस समय अधिकांश निवेशक अनलिस्टेड शेयरों को निजी सौदों, कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन योजनाओं और अन्य बिचौलियों के माध्यम से खरीदते हैं।

चूंकि ये कंपनियां सूचीबद्ध नहीं हैं, उन्हें सख्त और निरंतर प्रकटीकरण नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है, जिसके कारण निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति और व्यावसायिक जोखिमों की जानकारी सीमित या देरी से मिलती है।

पांडे ने कहा कि सेबी की प्रमुख चिंताओं में से एक अनलिस्टेड मार्केट में कीमतों और कंपनियों द्वारा प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) जारी करने पर मूल्यांकन के बीच बड़ा अंतर है।

उन्होंने कहा, "निजी सौदों में तय की गई कीमतें अक्सर आईपीओ बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया के दौरान ज्ञात कीमतों से मेल नहीं खाती, जिससे निवेशकों के लिए भ्रम और संभावित जोखिम पैदा होते हैं।"

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लिस्टेड कंपनियों द्वारा पालन किए जाने वाले नियम अनलिस्टेड कंपनियों पर सीधे लागू नहीं किए जा सकते।

परंपरागत रूप से, सेबी की नियामक भूमिका तब शुरू होती है जब कोई कंपनी अपने शेयर सूचीबद्ध करने की तैयारी कर रही होती है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रस्तावित आईपीओ पर पांडे ने कहा कि बाजार नियामक वर्तमान में एक्सचेंज के निपटान आवेदन की समीक्षा कर रहा है।

Point of View

जिससे बाजार में विश्वास बढ़ेगा।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

अनलिस्टेड शेयर क्या होते हैं?
अनलिस्टेड शेयर वे शेयर होते हैं जो किसी स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध नहीं होते हैं।
सेबी का क्या कार्य है?
सेबी का कार्य वित्तीय बाजारों का विनियमन और निवेशकों की सुरक्षा करना है।
अनलिस्टेड कंपनियों के लिए क्या नियम हैं?
अनलिस्टेड कंपनियों पर सूचीबद्ध कंपनियों के विनियमन के नियम सीधे लागू नहीं होते।
निवेशकों को अनलिस्टेड शेयरों में निवेश करना चाहिए?
निवेशकों को सावधानी से निर्णय लेना चाहिए क्योंकि अनलिस्टेड शेयरों में जानकारी की कमी होती है।
सेबी की नई पहल का क्या असर होगा?
सेबी की नई पहल से अनलिस्टेड बाजार में पारदर्शिता और सुरक्षा में वृद्धि हो सकती है।
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