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क्या सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ खुले? एफएमसीजी शेयरों ने बढ़त में किया योगदान

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क्या सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ खुले? एफएमसीजी शेयरों ने बढ़त में किया योगदान

सारांश

आज भारतीय शेयर बाजार ने मामूली बढ़त के साथ खुलकर निवेशकों को राहत दी है। एफएमसीजी शेयरों ने बाजार में तेजी का नेतृत्व किया है। जानिए पूरी स्थिति और विशेषज्ञों की राय इस पर।

मुख्य बातें

निफ्टी 50 में 36 अंक की बढ़त हुई।
बीएसई सेंसेक्स 118 अंक बढ़कर 80,199 पर पहुँचा।
एफएमसीजी इंडेक्स में 1.59 प्रतिशत की बढ़त रही।
अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ का असर बाजार पर है।
विश्लेषकों का मानना है कि 24,700 का स्तर महत्वपूर्ण है।

मुंबई, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी शुल्कों के प्रभाव से उबरने की कोशिशों के बीच, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुला।

निफ्टी 50 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 36 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 24,537 पर पहुंच गया। इसी दौरान, बीएसई सेंसेक्स 118 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 80,199 पर पहुंच गया।

बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक स्थिर कारोबार कर रहे थे।

सेक्टोरल फ्रंट पर एफएमसीजी इंडेक्स 1.59 प्रतिशत की बढ़त में रहा, जबकि ऑटो इंडेक्स 0.84 प्रतिशत की गिरावट में रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.43 प्रतिशत की बढ़त में रहा।

निफ्टी पैक में, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, एचयूएल, टाटा स्टील, टीसीएस और एशियन पेंट्स टॉप गेनर्स की लिस्ट में थे। वहीं, श्रीराम फाइनेंस, अपोलो हॉस्पिटल्स, टाइटन कंपनी, एलएंडटी और आईसीआईसीआई बैंक टॉप लूजर्स रहे।

विश्लेषकों ने कहा कि निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक मजबूत बियरिश कैंडल बनाया है, जो लगातार बिकवाली के दबाव को दर्शाता है।

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग की अमृता शिंदे ने कहा, "तकनीकी रूप से, 24,700 से ऊपर एक निर्णायक कदम 24,850 और 25,000 के क्षेत्रों की ओर रास्ता खोल सकता है, जबकि तत्काल समर्थन 24,337 पर है, जिसके बाद 200-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 24,260 पर है। ये ऐसे स्तर हैं जो नई लॉन्ग पोजीशन को आकर्षित कर सकते हैं।"

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ, जो पहले ही लागू हो चुका है, निकट भविष्य में मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित करेगा। हालांकि, बाजार में घबराहट की संभावना नहीं है क्योंकि यह उच्च टैरिफ को एक अल्पकालिक परेशानी के रूप में देखेगा, जिसका जल्द ही समाधान हो जाएगा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा, "ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ और भारत के हाई वैल्यूएशन से उपजी बाजार की नेगेटिव सेंटीमेंट ने एफआईआई को अपनी शॉर्ट पोजीशन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है। अगर टैरिफ नीति पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो सेंटीमेंट बदल सकता है और शॉर्ट कवरिंग हो सकती है।"

उन्होंने आगे कहा कि भारत में नीतिगत पहलों बजट के माध्यम से राजकोषीय प्रोत्साहन, दरों में कटौती के माध्यम से मौद्रिक प्रोत्साहन और आगामी जीएसटी रेशनलाइजेशन से आने वाली तिमाहियों में आर्थिक विकास और कॉर्पोरेट आय में सुधार आना चाहिए, जिससे बाजार की बुनियादी बातों के समर्थन से बाजार में तेजी आएगी।

अमेरिकी बाजारों में रातोंरात मामूली बढ़त दर्ज की गई, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.16 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि नैस्डैक में 0.53 प्रतिशत और एसएंडपी 500 में 0.32 प्रतिशत की बढ़त रही।

सुबह के सत्र में एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा।

टोक्यो में मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अगस्त में धीमी गति से बढ़े। जुलाई में बेरोजगारी दर भी घटकर 2.3 प्रतिशत रह गई, जो पिछले महीने 2.5 प्रतिशत थी।

चीन का शंघाई सूचकांक 0.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ स्थिर रहा, जबकि शेन्जेन में 0.81 प्रतिशत की तेजी रही। जापान का निक्केई 0.43 प्रतिशत की गिरावट में रहा, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 0.76 प्रतिशत की बढ़त में रहा और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.12 प्रतिशत गिरा।

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को लगातार चौथे दिन बिकवाली जारी रखी और 3,856.51 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इस बीच, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) शुद्ध खरीदार बने रहे और उन्होंने 6,920.34 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर हमारे बाजारों पर पड़ रहा है। विश्लेषक इसे एक अल्पकालिक चुनौती मानते हैं, और बाजार में स्थिरता के लिए सकारात्मक नीतिगत बदलावों की आवश्यकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या निफ्टी और सेंसेक्स की स्थिति स्थायी है?
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा स्थिति अल्पकालिक है और बाजार में सकारात्मक बदलाव आएंगे।
एफएमसीजी शेयरों की बढ़त का कारण क्या है?
एफएमसीजी शेयरों की बढ़त उपभोक्ता मांग में सुधार और सकारात्मक आर्थिक संकेतों के कारण है।
अमेरिका के टैरिफ का भारतीय बाजार पर क्या असर है?
अमेरिका के टैरिफ ने बाजार में दबाव बनाया है, लेकिन इसे एक अल्पकालिक समस्या माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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