शीर्ष 10 कंपनियों का बाज़ार पूंजीकरण ₹1.55 लाख करोड़ घटा, HDFC बैंक को सर्वाधिक नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध भारत की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से आठ का संयुक्त बाज़ार पूंजीकरण बीते सप्ताह ₹1,55,671.9 करोड़ घट गया, जिसकी मुख्य वजह शेयर बाज़ार में व्यापक स्तर पर हुई बिकवाली रही। एचडीएफसी बैंक इस गिरावट में सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) बाज़ार की नकारात्मक धारा के विरुद्ध बढ़त दर्ज करने में सफल रहे।
साप्ताहिक बाज़ार गिरावट का व्यापक चित्र
छुट्टियों के कारण सीमित कारोबारी सत्रों वाले इस सप्ताह में प्रमुख सूचकांकों पर भारी दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 546.15 अंक यानी 2.36 प्रतिशत की कमज़ोरी दर्ज की गई। BSE पर सूचीबद्ध समस्त कंपनियों का कुल बाज़ार पूंजीकरण मात्र चार कारोबारी सत्रों में ₹20.79 लाख करोड़ घटकर ₹472.62 लाख करोड़ से ₹451.83 लाख करोड़ पर आ गया।
एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस सर्वाधिक प्रभावित
एचडीएफसी बैंक का बाज़ार पूंजीकरण इस सप्ताह ₹55,506.95 करोड़ घटकर ₹10.67 लाख करोड़ पर आ गया। सप्ताह के दौरान बैंक के शेयरों में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरे स्थान पर रहे बजाज फाइनेंस का मूल्यांकन ₹34,180.51 करोड़ घटकर ₹5.77 लाख करोड़ पर सिमट गया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाज़ार पूंजीकरण ₹27,065.08 करोड़ की गिरावट के साथ ₹16.10 लाख करोड़ पर आया। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का मूल्यांकन ₹21,062.24 करोड़ घटकर ₹4.81 लाख करोड़ रह गया। भारती एयरटेल का बाज़ार पूंजीकरण ₹9,360.75 करोड़ गिरकर ₹11.79 लाख करोड़ और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का मूल्यांकन ₹4,338.46 करोड़ घटकर ₹8.83 लाख करोड़ पर आ गया।
इन्फोसिस का बाज़ार पूंजीकरण ₹2,881.38 करोड़ की गिरावट के साथ ₹4.69 लाख करोड़ और आईसीआईसीआई बैंक का मूल्यांकन ₹1,276.53 करोड़ घटकर ₹10.02 लाख करोड़ पर रहा।
TCS और L&T ने बचाई साख
नकारात्मक रुझान के बीच TCS का बाज़ार पूंजीकरण ₹23,517.56 करोड़ की बढ़त के साथ ₹9.15 लाख करोड़ पर पहुँच गया। इंजीनियरिंग और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी L&T का मूल्यांकन भी ₹1,788.66 करोड़ बढ़कर ₹5.02 लाख करोड़ हो गया। गौरतलब है कि इन दोनों कंपनियों ने बाज़ार की व्यापक कमज़ोरी के बावजूद निवेशकों का भरोसा बनाए रखा।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू बाज़ार में मुनाफ़ावसूली का दबाव एक साथ हावी है। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार आगामी तिमाही नतीजों और वैश्विक संकेतों पर निवेशकों की नज़र बनी रहेगी, जो बाज़ार की अगली दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।