क्या एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण इस सप्ताह 47,482 करोड़ रुपए घटा?

सारांश
Key Takeaways
- एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण 47,482 करोड़ रुपए घटा।
- भारतीय शेयर बाजार में कुल 2,24,630.45 करोड़ रुपए की गिरावट आई।
- आईसीआईसीआई बैंक और भारती एयरटेल का भी बाजार पूंजीकरण घटा।
- आने वाला हफ्ता जीएसटी परिषद की बैठक और ऑटो सेल्स के लिए महत्वपूर्ण होगा।
- बाजार की स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 31 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण इस सप्ताह 47,482.49 करोड़ रुपए घटकर 14,60,863.90 करोड़ रुपए पर आ गया, जिससे यह भारत की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक बनी, जिसने सबसे अधिक नुकसान उठाया।
शेयर बाजार में आई कमजोरी के कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी बहुत भारी गिरावट का सामना करना पड़ा।
इस सप्ताह बीएसई की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से आठ के बाजार पूंजीकरण में कुल मिलाकर 2,24,630.45 करोड़ रुपए की गिरावट आई। इस दौरान निफ्टी 443.25 अंक या 1.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,426.85 और सेंसेक्स 1,497.20 अंक या 1.84 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 79,809.65 पर रहा।
एचडीएफसी बैंक के अलावा, आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण 27,135.23 करोड़ रुपए घटकर 9,98,290.96 करोड़ रुपए और भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 24,946.71 करोड़ रुपए घटकर 10,77,213.23 करोड़ रुपए पर पहुँच गया है।
एलआईसी का बाजार पूंजीकरण 23,655.49 करोड़ रुपए घटा, जबकि एसबीआई के मार्केटकैप में 12,692.1 करोड़ रुपए की कमी आई है।
बजाज फाइनेंस और इंफोसिस का मार्केटकैप क्रमशः 10,471.08 करोड़ रुपए और 7,540.18 करोड़ रुपए कम हुआ है।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार पूंजीकरण में बढ़त दर्ज की गई है। टीसीएस के बाजार पूंजीकरण में 11,125.62 करोड़ रुपए और एचयूएल के मार्केटकैप में 7,318.98 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। जीएसटी परिषद की बैठक, ऑटो सेल्स और जीएसटी के आंकड़े और अमेरिकी टैरिफ पर अपडेट से बाजार की चाल निर्धारित होगी।
टैक्स को कम करने के लिए जीएसटी परिषद की बैठक 3-4 सितंबर के बीच प्रस्तावित है। इसके साथ ही ऑटो सेल्स का डेटा सोमवार से आना शुरू होगा, जिससे जानकारी मिलती है कि अर्थव्यवस्था कैसे प्रदर्शन कर रही है। माना जाता है कि जब गाड़ियों की बिक्री ज्यादा होती है, तो अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है।