क्या आम बजट 2026-27 में डिजिटल अर्थव्यवस्था और टियर 2 एवं 3 शहरों में उद्योगों को बढ़ाने पर हो रहा है फोकस?
सारांश
Key Takeaways
- डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए नीतियों का निर्माण आवश्यक है।
- टियर 2 और टियर 3 शहरों में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए योजना होनी चाहिए।
- एमएसएमई का योगदान 1.5 ट्रिलियन डॉलर है।
- आवश्यकता है टेक्नोलॉजी के तेजी से अपनाने की।
- बजट में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
बेंगलुरु, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आम बजट 2026-27 के आने में अब दो हफ्तों से कम समय रह गया है, और इस बीच विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपनी उम्मीदें और सुझाव पेश कर रहे हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखते हुए रोजगार के अवसर भी पर्याप्त रूप से उत्पन्न किए जा सकें।
बजट पर समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कर्नाटक डिजिटल अर्थव्यवस्था मिशन के सीईओ संजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि आगामी बजट में सरकार को एमएसएमई के टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने आगे बताया कि भारत में विशेष रूप से टियर 2 और टियर 3 शहरों में कार्यरत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) का अर्थव्यवस्था में योगदान 1.5 ट्रिलियन डॉलर है। इनकी ग्रोथ रेट 10 प्रतिशत है। यदि हम इसमें टेक्नोलॉजी को जोड़ दें, तो यह 18 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके लिए एक नीति की आवश्यकता है, और हम आशा करते हैं कि केंद्र सरकार इस बजट में ऐसी नीति प्रस्तुत करेगी।
गुप्ता ने आगे कहा कि वर्तमान में देश में टियर 2 और टियर 3 शहरों में डिजिटल अर्थव्यवस्था क्षेत्र बनाने की आवश्यकता है। ऐसा करने से देश में लगभग 100 नए ग्रोथ इंजन विकसित हो सकते हैं।
उन्होंने अपने तीसरे सुझाव में कहा कि अब देश में टियर 2 और टियर 3 शहरों में लगभग एक लाख स्टार्टअप हैं, और इन्हें पांच लाख तक पहुंचाने के लिए एक स्कीम लाना चाहिए। इससे देश में बड़ी संख्या में रोजगार के मौके पैदा होंगे।
केंद्रीय बजट वित्त मंत्री द्वारा एक फरवरी को सुबह 11 बजे पेश किया जाएगा। यह वर्ष 2000 के बाद पहली बार है कि केंद्रीय बजट संसद में रविवार को पेश किया जाएगा। इससे पहले 2025 में, सीतारमण ने शनिवार को बजट पेश किया था और दिवंगत अरुण जेटली के नेतृत्व में 2015 का बजट भी 28 फरवरी को शनिवार को पेश किया गया था।