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भारत की GDP वृद्धि दर लगातार 7% से ऊपर, पहली तिमाही में 7.8% की बढ़त: MoSPI सचिव डॉ. सौरभ गर्ग

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भारत की GDP वृद्धि दर लगातार 7% से ऊपर, पहली तिमाही में 7.8% की बढ़त: MoSPI सचिव डॉ. सौरभ गर्ग

सारांश

भारत लगातार तीन वर्षों से 7% से ऊपर की विकास दर बनाए हुए है और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8% की बढ़त दर्ज की गई है। वैश्विक टैरिफ तनाव के बीच इंडोनेशिया ने भारत के साथ सेमीकंडक्टर, EV और व्यापार सहयोग बढ़ाने की वकालत की है।

मुख्य बातें

सौरभ गर्ग ने कहा कि भारत पिछले 3 वर्षों से लगातार 7% से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर्ज कर रहा है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) में भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही।
कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत के लिए अपने विकास अनुमानों में ऊपर की ओर संशोधन कर रही हैं।
इंडोनेशिया की विशेष दूत मारी एल्का पांगेस्टु ने कहा कि अमेरिका का वैश्विक व्यापार में हिस्सा केवल 13% है; शेष देशों को परस्पर व्यापार बढ़ाना चाहिए।
भारत-इंडोनेशिया के बीच सेमीकंडक्टर , EV , विनिर्माण और पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं रेखांकित की गईं।
इंडोनेशिया के पास बैटरी खनिज संसाधन और भारत के पास बड़ा बाज़ार — दोनों मिलकर EV सप्लाई चेन में साझेदारी बना सकते हैं।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने 4 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत पिछले तीन वर्षों से निरंतर 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर्ज कर रहा है, और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह दर 7.8 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि वास्तविक अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न संकेतक भी इसी सकारात्मक रुख की पुष्टि करते हैं, और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत के लिए अपने विकास अनुमानों में ऊपर की ओर संशोधन कर रही हैं।

भारत की आर्थिक स्थिति: मुख्य संकेतक

डॉ. गर्ग के अनुसार, पहली तिमाही (Q1) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि वैश्विक निवेशकों के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी अपनी विकास दर के अनुमानों में संशोधन कर रही हैं। यह देश की आर्थिक नीतियों और विकास क्षमता में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।'

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की विकास गति धीमी पड़ रही है। भारत का लगातार तीन वर्षों तक 7 प्रतिशत से ऊपर बने रहना इस पृष्ठभूमि में विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जा रहा है।

वैश्विक व्यापार और अमेरिकी टैरिफ पर इंडोनेशिया की राय

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति की अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग मामलों की विशेष दूत मारी एल्का पांगेस्टु ने वैश्विक व्यापार के बदलते परिदृश्य पर कहा कि यदि अमेरिका टैरिफ को आर्थिक नीति के उपकरण के रूप में अपनाना चाहता है, तो यह उसका संप्रभु निर्णय है। हालाँकि, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि शेष देशों को आपस में संरक्षणवादी नीतियाँ नहीं अपनानी चाहिए।

पांगेस्टु ने कहा, 'अमेरिका का वैश्विक व्यापार में हिस्सा लगभग 13 प्रतिशत है, जबकि शेष 87 प्रतिशत व्यापार दुनिया के अन्य देशों के बीच होता है। इसलिए देशों को परस्पर निवेश और व्यापार बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, चाहे वह द्विपक्षीय समझौतों के ज़रिए हो या क्षेत्रीय साझेदारियों के माध्यम से।'

भारत-इंडोनेशिया सहयोग की संभावनाएं

पांगेस्टु ने भारत और इंडोनेशिया के बीच आर्थिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, चाहे द्विपक्षीय स्तर पर हो या आसियान-भारत सहयोग के तहत, दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश की संभावनाओं का अभी पूरा दोहन नहीं हो पाया है।

उन्होंने पर्यटन, वस्तुओं और सेवाओं — सभी क्षेत्रों में विस्तार की गुंजाइश रेखांकित की और कहा कि खंडित वैश्विक परिदृश्य में उन देशों के साथ साझेदारी बढ़ाना अधिक महत्वपूर्ण है जहाँ सहयोग के वास्तविक अवसर मौजूद हैं।

सेमीकंडक्टर और EV क्षेत्र में द्विपक्षीय अवसर

पांगेस्टु ने विनिर्माण और सेमीकंडक्टर को ऐसे प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया जहाँ दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर की माँग लगातार बढ़ रही है और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग भी सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र बन सकता है।

उन्होंने कहा, 'इंडोनेशिया के पास बैटरी निर्माण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं और देश इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विकास में रुचि रखता है। वहीं भारत का बड़ा बाज़ार और बढ़ती विनिर्माण क्षमता दोनों देशों के लिए लाभकारी साझेदारी का आधार बन सकती है।' आने वाले समय में दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में नीतिगत संवाद और निवेश ढाँचे को और ठोस रूप देने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह वृद्धि रोज़गार और आय वितरण में किस हद तक परिलक्षित हो रही है — एक ऐसा आयाम जिसे सरकारी बयानों में प्रायः हाशिये पर रखा जाता है। इंडोनेशिया की यह टिप्पणी कि अमेरिका के बाहर 87% वैश्विक व्यापार होता है, रणनीतिक रूप से सटीक है, परंतु भारत-इंडोनेशिया द्विपक्षीय व्यापार अभी तक अपनी वास्तविक क्षमता से काफी पीछे है। सेमीकंडक्टर और EV में सहयोग की संभावनाएं वास्तविक हैं, पर इन्हें ठोस नीतिगत ढाँचे में बदलने की गति अब तक धीमी रही है। वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारत के लिए ऐसी साझेदारियाँ सिर्फ विकल्प नहीं, रणनीतिक अनिवार्यता हैं।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की GDP विकास दर अभी कितनी है?
MoSPI सचिव डॉ. सौरभ गर्ग के अनुसार, भारत चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर चुका है। पिछले तीन वर्षों से देश लगातार 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि बनाए हुए है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत के बारे में क्या कह रही हैं?
डॉ. गर्ग के अनुसार, कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को देखते हुए अपने विकास अनुमानों में ऊपर की ओर संशोधन कर रही हैं। यह भारत की आर्थिक नीतियों और विकास क्षमता में बढ़ते वैश्विक विश्वास का संकेत माना जा रहा है।
अमेरिकी टैरिफ नीति पर इंडोनेशिया का क्या रुख है?
इंडोनेशिया की विशेष दूत मारी एल्का पांगेस्टु ने कहा कि यदि अमेरिका टैरिफ को आर्थिक नीति के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है तो यह उसका निर्णय है, लेकिन शेष देशों को आपस में संरक्षणवादी नीतियाँ नहीं अपनानी चाहिए। उन्होंने बताया कि अमेरिका का वैश्विक व्यापार में हिस्सा केवल 13 प्रतिशत है, जबकि 87 प्रतिशत व्यापार अन्य देशों के बीच होता है।
भारत और इंडोनेशिया के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग की संभावना है?
मारी एल्का पांगेस्टु ने विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), ऑटोमोबाइल और पर्यटन को प्रमुख सहयोग क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि इंडोनेशिया के पास बैटरी निर्माण के लिए ज़रूरी खनिज संसाधन हैं, जबकि भारत का बड़ा बाज़ार और बढ़ती विनिर्माण क्षमता दोनों देशों के लिए EV सप्लाई चेन में साझेदारी का आधार बन सकती है।
आसियान-भारत सहयोग के तहत व्यापार की क्या स्थिति है?
पांगेस्टु के अनुसार, आसियान-भारत सहयोग के तहत भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार और निवेश की संभावनाओं का अभी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। वस्तुओं और सेवाओं दोनों क्षेत्रों में विस्तार की काफी गुंजाइश है और दोनों देशों को द्विपक्षीय तथा क्षेत्रीय साझेदारियों के ज़रिए इसे और मज़बूत बनाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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