6 अगस्त 2026
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अभिषेक कपूर: फ्लॉप एक्टर से 'रॉक ऑन' के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक तक का सफर

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अभिषेक कपूर: फ्लॉप एक्टर से 'रॉक ऑन' के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक तक का सफर

सारांश

एक अभिनेता के रूप में दो लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद अभिषेक कपूर ने निर्देशन में वह मुकाम हासिल किया जो अभिनय में नहीं मिला। 'रॉक ऑन' का राष्ट्रीय पुरस्कार, सुशांत और राजकुमार राव को लॉन्च, और 'चंडीगढ़ करे आशिकी' जैसी साहसी फिल्में — यह सफर बताता है कि विफलता अंत नहीं, शुरुआत भी हो सकती है।

मुख्य बातें

अभिषेक कपूर का जन्म 6 अगस्त 1971 को मुंबई में हुआ; करीबी उन्हें 'गट्टू' कहते हैं।
1996 में अभिनेता के रूप में शुरुआत की, लेकिन 'उफ!
ये मोहब्बत' और 'आशिक मस्ताने' दोनों बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं।
'रॉक ऑन' ( 2008 ) ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता; संगीत शंकर-एहसान-लॉय ने पाँच दिनों में तैयार किया।
'काई पो चे!' ( 2013 ) से सुशांत सिंह राजपूत और राजकुमार राव , तथा 'केदारनाथ' ( 2018 ) से सारा अली खान को लॉन्च किया।
पत्नी प्रज्ञा कपूर के साथ 'गाय इन द स्काई पिक्चर्स' प्रोडक्शन कंपनी चलाते हैं।
नवीनतम फिल्म 'आजाद' ( 17 जनवरी 2025 ) शुरुआती रुझानों में केवल ₹5 करोड़ कमा सकी।

बॉलीवुड निर्देशक अभिषेक कपूर की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो पहली विफलता के बाद हार मान लेते हैं। 6 अगस्त 1971 को मुंबई में जन्मे अभिषेक ने 1996 में 'उफ! ये मोहब्बत' और 'आशिक मस्ताने' से एक अभिनेता के रूप में हिंदी सिनेमा में प्रवेश किया — लेकिन दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह नाकाम रहीं। करीबी उन्हें प्यार से 'गट्टू' पुकारते हैं।

असफलता से मिली नई दिशा

अभिनय में सफलता न मिलने के बाद अभिषेक कपूर ने निर्देशन की राह चुनी। उनकी पहली निर्देशित फिल्म 'आर्यन: अनब्रेकेबल' (2006) भी व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हो सकी। लेकिन यह दौर उनके भीतर एक बड़े बदलाव की भूमिका तैयार कर रहा था।

एक दिन पूल के किनारे बैठकर अपने आईपॉड पर डेव मैथ्यूज और यू2 का संगीत सुनते हुए उनके मन में एक अनोखा विचार आया — एक ऐसे रॉक बैंड की कहानी जो अंग्रेजी नहीं, बल्कि हिंदी में गाए। यह विचार 2008 की कल्ट क्लासिक 'रॉक ऑन' के रूप में परदे पर उतरा।

रॉक ऑन और राष्ट्रीय पुरस्कार

'रॉक ऑन' के लिए अभिषेक ने पहली बार निर्देशन की दुनिया में कदम रखने वाले फरहान अख्तर को मुख्य भूमिका में चुना और अर्जुन रामपाल को एक गंभीर किरदार सौंपा। फिल्म का संगीत शंकर-एहसान-लॉय ने महज पाँच दिनों में तैयार किया। इस फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता और अभिषेक कपूर को एक स्थापित निर्देशक व लेखक के रूप में पहचान दिलाई।

यह ऐसे समय में आया जब बॉलीवुड में संगीत-केंद्रित फिल्मों को लेकर संशय था। 'रॉक ऑन' ने साबित किया कि हिंदी रॉक संगीत भी दर्शकों को थिएटर तक खींच सकता है।

नई प्रतिभाओं को लॉन्चपैड

अभिषेक कपूर ने अपनी पत्नी प्रज्ञा कपूर के साथ 'गाय इन द स्काई पिक्चर्स' प्रोडक्शन कंपनी की स्थापना की। चेतन भगत के उपन्यास पर आधारित 'काई पो चे!' (2013) के जरिए उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत और राजकुमार राव को हिंदी सिनेमा में पहला बड़ा मंच दिया। गौरतलब है कि संगीतकार अमित त्रिवेदी ने जब कुछ ही दिनों में गाने तैयार कर लिए, तो अभिषेक को शुरुआत में लगा यह 'कॉपी-पेस्ट' काम है — बाद में वही संगीत फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बना।

2018 में 'केदारनाथ' के जरिए उन्होंने सारा अली खान को लॉन्च किया। यह फिल्म 2013 की विनाशकारी केदारनाथ बाढ़ की पृष्ठभूमि पर बनी एक अंतर-धार्मिक प्रेम कहानी थी।

सामाजिक सरोकार और साहसी विषय

अभिषेक कपूर की फिल्में केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं। 2021 में रिलीज हुई 'चंडीगढ़ करे आशिकी' मुख्यधारा की उन पहली व्यावसायिक फिल्मों में शामिल थी जिसने एक ट्रांस-वुमन की प्रेम कहानी को परदे पर प्रस्तुत किया — यह भारतीय सिनेमा में एक साहसी कदम माना गया।

17 जनवरी 2025 को रिलीज हुई पीरियड ड्रामा 'आजाद' के जरिए उन्होंने राशा थडानी और आमन देवगन को बॉलीवुड में उतारा। शुरुआती रुझानों में फिल्म ने केवल ₹5 करोड़ की कमाई की और बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष करती नजर आई। इसके बावजूद अभिषेक कपूर ने इंस्टाग्राम पर लिखा: 'सपने हिट या फ्लॉप नहीं होते, साकार होते हैं।'

व्यक्तिगत जीवन और आगे की राह

4 मई 2015 को अभिषेक कपूर ने स्वीडिश अभिनेत्री प्रज्ञा यादव से विवाह किया। वे दो बच्चों के पिता हैं और पारिवारिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अपने पूरे करियर में उन्होंने असफलता को एक शिक्षक की तरह स्वीकार किया है। उनका मानना है कि आज का सिनेमा बदल रहा है, जहाँ समानांतर और व्यावसायिक सिनेमा के बीच की सीमाएँ धुंधली होती जा रही हैं — और इसी बदलती दुनिया में उनकी कहानियाँ अपनी जगह बना रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नई प्रतिभाओं को मंच देने की उनकी क्षमता से बनती है। सुशांत सिंह राजपूत, राजकुमार राव और सारा अली खान जैसे नामों को लॉन्च करना बताता है कि उनकी नजर व्यावसायिक सफलता से परे जाती है। 'चंडीगढ़ करे आशिकी' जैसी फिल्म के साथ ट्रांस-प्रतिनिधित्व को मुख्यधारा में लाना साहसी था — लेकिन 'आजाद' की बॉक्स ऑफिस विफलता यह सवाल उठाती है कि क्या उनका दर्शक-वर्ग उनकी महत्वाकांक्षाओं के साथ कदम मिला पा रहा है। असली परीक्षा अब यह है कि वे अपनी कहानी कहने की शैली को बदलते बाजार के अनुरूप कैसे ढालते हैं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक कपूर ने अभिनेता से निर्देशक बनने का फैसला क्यों किया?
1996 में 'उफ! ये मोहब्बत' और 'आशिक मस्ताने' जैसी फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप होने के बाद अभिषेक कपूर ने अभिनय छोड़कर निर्देशन की राह चुनी। हालाँकि उनकी पहली निर्देशित फिल्म 'आर्यन: अनब्रेकेबल' (2006) भी व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही, लेकिन 'रॉक ऑन' (2008) ने उन्हें एक स्थापित निर्देशक के रूप में पहचान दिलाई।
'रॉक ऑन' को राष्ट्रीय पुरस्कार क्यों मिला?
'रॉक ऑन' (2008) को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इस फिल्म ने हिंदी रॉक संगीत की अवधारणा को मुख्यधारा सिनेमा में स्थापित किया और फरहान अख्तर को पहली बार अभिनेता के रूप में पेश किया। शंकर-एहसान-लॉय द्वारा केवल पाँच दिनों में तैयार किया गया इसका संगीत कल्ट क्लासिक बन गया।
अभिषेक कपूर ने किन अभिनेताओं को बॉलीवुड में लॉन्च किया?
अभिषेक कपूर ने 'काई पो चे!' (2013) से सुशांत सिंह राजपूत और राजकुमार राव को, 'केदारनाथ' (2018) से सारा अली खान को, और 'आजाद' (2025) से राशा थडानी और आमन देवगन को बॉलीवुड में पहला बड़ा मंच दिया।
'चंडीगढ़ करे आशिकी' को खास क्यों माना जाता है?
2021 में रिलीज हुई 'चंडीगढ़ करे आशिकी' मुख्यधारा की उन पहली व्यावसायिक हिंदी फिल्मों में से एक थी जिसने एक ट्रांस-वुमन की प्रेम कहानी को परदे पर प्रस्तुत किया। यह भारतीय सिनेमा में सामाजिक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक साहसी कदम माना गया।
अभिषेक कपूर की ताज़ा फिल्म 'आजाद' कैसी रही?
17 जनवरी 2025 को रिलीज हुई पीरियड ड्रामा 'आजाद' शुरुआती रुझानों में केवल ₹5 करोड़ कमा सकी और बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष करती नजर आई। इसके बावजूद अभिषेक कपूर ने इंस्टाग्राम पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए लिखा: 'सपने हिट या फ्लॉप नहीं होते, साकार होते हैं।'
राष्ट्र प्रेस
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