25 अगस्त 2026
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अनुपम खेर: 'अभिनेता बहुत बहादुर होते हैं, कभी-कभी टूटा दिल भी चाहिए' — इंस्टाग्राम पोस्ट में खोला दिल

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अनुपम खेर: 'अभिनेता बहुत बहादुर होते हैं, कभी-कभी टूटा दिल भी चाहिए' — इंस्टाग्राम पोस्ट में खोला दिल

सारांश

अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर लिखा — कैमरे के सामने शोहरत और पैसा काम नहीं आता, सिर्फ हुनर और कभी-कभी टूटा हुआ दिल काम आता है। दशकों के अनुभव के बाद वे बोले: अब किरदार की कमज़ोरियों में भी मज़ा आता है, घबराहट कम हुई है — यही एक कलाकार की असली परिपक्वता है।

मुख्य बातें

अनुपम खेर ने 25 अगस्त को इंस्टाग्राम पर अपने विभिन्न किरदारों की तस्वीरें साझा कीं और अभिनय के दर्शन पर बात की।
उनके अनुसार, अभिनेता वे भावनाएँ उजागर करते हैं — ग़म, डर, जलन, प्यार, असुरक्षा — जिन्हें लोग पूरी ज़िंदगी छिपाते हैं।
खेर ने कहा कि कैमरे के सामने शोहरत या पैसा नहीं, हुनर और कभी-कभी टूटा दिल काम आता है।
करियर की शुरुआत में वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की ट्रेनिंग और आत्मविश्वास के साथ आए थे, बिना किसी 'गॉडफादर' के।
अब वे किरदार की खामोशी, विरोधाभास और कमज़ोरियों में भी आनंद लेते हैं और घबराहट पहले से कम है।

वयोवृद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने मंगलवार, 25 अगस्त को इंस्टाग्राम पर एक भावपूर्ण पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने एक अभिनेता के भीतरी संसार, उसकी नाज़ुकता और उसकी असली ताकत पर गहरी बात कही। दशकों के करियर में सैकड़ों किरदारों को जीवन देने वाले खेर का कहना है कि एक कलाकार वे भावनाएँ सबके सामने रखता है, जिन्हें आम इंसान पूरी ज़िंदगी छिपाता रहता है।

अभिनेता का दिल और हुनर

अपनी पोस्ट में अनुपम खेर ने लिखा, 'अभिनेता बहुत ही नाज़ुक दिल के लोग होते हैं, जो अपनी उन भावनाओं को सभी के सामने लेकर आते हैं, जिन्हें लोग पूरी ज़िंदगी छिपाने की कोशिश करते हैं।' उन्होंने अपने करियर के विभिन्न किरदारों की तस्वीरें भी पोस्ट के साथ साझा कीं।

खेर के अनुसार, एक अभिनेता को ग़म, डर, जलन, प्यार, खुशी और असुरक्षा जैसी भावनाओं को अपने भीतर ही तलाशना पड़ता है — यह कोई बाहरी कौशल नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा है।

कैमरे के सामने शोहरत नहीं, हुनर काम आता है

खेर ने स्पष्ट किया कि अभिनय से मिलने वाली शोहरत, पैसा और सुख-सुविधाएँ उस पल कोई काम नहीं आतीं जब कैमरा चेहरे के सामने होता है। उन्होंने लिखा, 'मेरा मानना है कि एक अभिनेता बहुत बहादुर होते हैं। एक्ट करते वक्त जब कैमरा चेहरे के सामने आता है, तो इन आरामों में से कोई भी काम नहीं आता। उसके लिए आपको हुनर और एक खास तरह का दिल भी चाहिए, कभी-कभी तो टूटा हुआ दिल भी चाहिए होता है।'

करियर के शुरुआती दिन: खुद को साबित करने की जल्दी

खेर ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि वे मनोरंजन जगत में बिना किसी 'गॉडफादर' के आए थे — उनके पास केवल नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की ट्रेनिंग और आत्मविश्वास था। उन्होंने स्वीकार किया, 'करियर के शुरुआती सालों में मुझे लगता था कि मैं खुद को साबित करने की जल्दी में था। कहीं न कहीं मैं लगातार यही कह रहा था — देखो मैं क्या कर सकता हूँ, देखो मैं कितना अलग हो सकता हूँ।'

परिपक्वता के साथ आया सुकून

अनुभव और उम्र के साथ आए बदलाव पर खेर ने लिखा कि अब उन्हें दूसरों को प्रभावित करने की वैसी ज़रूरत नहीं रही। उनके शब्दों में, 'अब मुझे किरदार की अनिश्चितता में मज़ा आने लगा है — उसकी खामोशी, विरोधाभास, कमज़ोरियाँ, यहाँ तक कि उसकी बेवकूफ़ियाँ भी। अब मैं खुद को और ज़्यादा चैलेंज करता हूँ, लेकिन अजीब बात यह है कि अब घबराहट बहुत कम होती है।'

यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में अनुभवी कलाकारों की प्रासंगिकता पर बहस चल रही है। गौरतलब है कि खेर ने हाल के वर्षों में भी कई यादगार भूमिकाएँ निभाई हैं। उनकी यह पोस्ट न केवल अभिनय की दुनिया के बारे में, बल्कि किसी भी कला-साधना के बारे में एक गहरी दृष्टि प्रस्तुत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

केवल प्रशिक्षण और जुनून के बल पर मुंबई में जगह बनाई। जब वे 'टूटे दिल' की बात करते हैं, तो वे दरअसल यह कह रहे हैं कि असली कला भेद्यता से जन्म लेती है — एक ऐसा सच जिसे बॉलीवुड की चमक-दमक अक्सर ढक लेती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि जिस दौर में OTT प्लेटफॉर्म ने अभिनय की परिभाषा बदल दी है, एक अनुभवी कलाकार का यह चिंतन नई पीढ़ी के लिए एक ज़रूरी दर्पण है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर क्या लिखा?
अनुपम खेर ने 25 अगस्त को इंस्टाग्राम पर अपने विभिन्न किरदारों की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा कि अभिनेता बहुत नाज़ुक दिल के होते हैं और वे वे भावनाएँ सामने लाते हैं जिन्हें लोग पूरी ज़िंदगी छिपाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कैमरे के सामने शोहरत नहीं, हुनर और कभी-कभी टूटा हुआ दिल काम आता है।
अनुपम खेर के अनुसार एक अच्छे अभिनेता में क्या गुण होने चाहिए?
खेर के अनुसार एक अच्छे अभिनेता के पास हुनर के साथ-साथ एक खास तरह का दिल होना चाहिए — कभी-कभी टूटा हुआ दिल भी। उन्हें ग़म, डर, जलन, प्यार, खुशी और असुरक्षा जैसी भावनाओं को अपने भीतर ढूँढना पड़ता है।
अनुपम खेर ने अपने करियर की शुरुआत के बारे में क्या कहा?
खेर ने बताया कि करियर के शुरुआती सालों में वे खुद को साबित करने की जल्दी में थे। वे मनोरंजन जगत में बिना किसी 'गॉडफादर' के, केवल नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की ट्रेनिंग और आत्मविश्वास लेकर आए थे।
अनुपम खेर में उम्र और अनुभव के साथ क्या बदलाव आया?
खेर ने कहा कि अब उन्हें दूसरों को इम्प्रेस करने की ज़रूरत नहीं रही। अब वे किरदार की खामोशी, विरोधाभास, कमज़ोरियों और बेवकूफ़ियों में भी आनंद लेते हैं, और पहले की तुलना में घबराहट बहुत कम हो गई है।
अनुपम खेर बॉलीवुड में कितने समय से सक्रिय हैं?
अनुपम खेर कई दशकों से हिंदी मनोरंजन जगत में सक्रिय हैं और सैकड़ों फिल्मों में विविध किरदार निभा चुके हैं। वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के प्रशिक्षित अभिनेता हैं और भारतीय सिनेमा के सबसे अनुभवी कलाकारों में गिने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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