'दिल से दीवानगी तक' के जान खान बोले: एक्टर का कोई मीडियम नहीं, ईमानदारी ही असली ताकत
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता जान खान इन दिनों वर्टिकल शो 'दिल से दीवानगी तक' में जहान का किरदार निभा रहे हैं और अपनी बहुमुखी कार्यशैली को लेकर खुलकर बात कर रहे हैं। उनका मानना है कि एक सच्चे अभिनेता के लिए माध्यम — चाहे फिल्म हो, टीवी हो या वेब — कोई मायने नहीं रखता; मायने रखती है तो बस काम के प्रति ईमानदारी।
हर माध्यम में बेस्ट देने की फिलॉसफी
जान ने बताया कि वे फिल्मों, वेब शो, गानों और टीवी — सभी माध्यमों में काम कर चुके हैं और अब वर्टिकल फॉर्मेट में भी सक्रिय हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने फिल्में, वेब शो, गाने और टीवी पर काम किया है। मैं अब वर्टिकल शो कर रहा हूं, शायद कल कुछ और भी कर सकता हूं। एक एक्टर के तौर पर हमें बस काम में बेस्ट देना होता है।'
उन्होंने आगे जोड़ा कि पुराना यह सोचने का तरीका — कि किसी खास तरह का काम करने से वैसा ही काम मिलेगा — अब बीते जमाने की बात हो चुकी है। उनके अनुसार, आज के दौर में कोई नहीं जानता कि निर्माता या निर्देशक आपको किस प्लेटफॉर्म पर देखकर नोटिस करेगा।
गॉडफादर नहीं, मेहनत है असली सहारा
जान खान ने स्पष्ट कहा कि उनका कोई 'गॉडफादर' नहीं है जो उन्हें बड़ी फिल्मों में ले जाए, इसलिए वे हर प्रोजेक्ट — चाहे वह कोई विज्ञापन हो, वर्टिकल शो हो, फिल्म हो या टीवी सीरियल — में अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं। उन्होंने कहा, 'साल के लगभग हर दिन काम करना आसान नहीं है, लेकिन मुझे जो काम करना पसंद है, वह मुझे पसंद है।'
'जहान' किरदार की चुनौती
अभिनेता ने बताया कि 'दिल से दीवानगी तक' के निर्माता तबरेज सर ने शुरुआत में ही उन्हें आगाह किया था कि जहान का किरदार आसान नहीं है और यह उनसे बहुत कुछ माँगेगा। जान के अनुसार, यह कोई साधारण वर्टिकल शो नहीं है जिसे जल्दी शूट करके खत्म किया जाए — जहान का एक पूरा सफर है जिसे परदे पर दिखाया जाएगा।
उन्हें उम्मीद है कि दर्शक इस किरदार को याद रखेंगे — खासतौर पर इसलिए कि वर्टिकल फॉर्मेट में जहान जैसा किरदार शायद पहली बार देखने को मिल रहा है, जो सिया, अबीर और शिवाय जैसे पात्रों के साथ हर जगह मौजूद है।
भविष्य की इच्छा: इंटेंस लव स्टोरी
जान खान ने अपनी दिली ख्वाहिश साझा की कि वे आगे एक ऐसी गहरी प्रेम कहानी निभाना चाहते हैं जिसे दर्शक महसूस कर सकें। उन्होंने कहा, 'मुझे इमोशनल सीन करने में भी मजा आता है। मुझे लगता है कि मैं लोगों को रुला सकता हूं क्योंकि मैं बहुत रोता हूं और असल जिंदगी में मैं बहुत इमोशनल इंसान हूं।' उनकी पसंदीदा फिल्म 'वीर-ज़ारा' है, जो शायद उनकी इस भावनात्मक संवेदनशीलता को और गहराई देती है।
जान खान का यह सफर बताता है कि मनोरंजन उद्योग में टिके रहने के लिए माध्यम नहीं, बल्कि निरंतर और ईमानदार प्रदर्शन ही सबसे बड़ा हथियार है।