'लव लॉटरी' का टीजर जारी: अक्षय ओबेरॉय की फिल्म पुरुष अधिकारों और कानूनों के दुरुपयोग पर उठाती है सवाल
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता अक्षय ओबेरॉय अभिनीत सस्पेंस थ्रिलर और कोर्टरूम ड्रामा फिल्म 'लव लॉटरी' का टीजर मंगलवार, 18 अगस्त को मुंबई में जारी किया गया। सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म वैवाहिक संबंधों की जटिलताओं, पुरुष अधिकारों और महिला-केंद्रित कानूनों के कथित दुरुपयोग जैसे संवेदनशील विषयों को केंद्र में रखती है।
टीजर में क्या है
38 सेकंड के इस टीजर में अक्षय ओबेरॉय, हेली दारूवाला और अन्य कलाकार भावनात्मक और तनाव से भरे दृश्यों में नज़र आते हैं। ओबेरॉय का किरदार सवालों और उलझनों में घिरा दिखाया गया है, जबकि अन्य पात्रों की रहस्यमयी उपस्थिति कहानी में सस्पेंस का तत्व जोड़ती है। टीजर रिश्तों में भरोसे की दरार, कानूनी पेचीदगियों और पुरुषों में जागरूकता की ज़रूरत पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
फिल्म की कहानी
फिल्म कार्तिक सक्सेना नामक एक कॉर्पोरेट पेशेवर की कहानी पर आधारित है, जिसका वैवाहिक जीवन तब उलझ जाता है जब उसे पत्नी के विवाहेतर संबंध का पता चलता है। तलाक की प्रक्रिया और झूठे घरेलू हिंसा के आरोपों के बीच पत्नी की हत्या हो जाती है, और कार्तिक मुख्य संदिग्ध बन जाता है। इसके बाद शुरू होती है उसकी खुद को निर्दोष साबित करने की कठिन कानूनी लड़ाई।
फिल्म का निर्देशन अरविंद पांडे ने किया है, पटकथा अंकुर खत्री ने लिखी है और इसे कुलदीप भार्गव तुषार ने सिनेमागंज फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया है।
कलाकारों की टीम
फिल्म में कबीर दुहान सिंह, विजयंत कोहली, हेमंत पांडे, इंदिरा कृष्णन, संतोष शुक्ला, विक्रम शर्मा, अग्नि अग्रियारी, कुमार सौरभ, अश्वंत लोधी और अर्शदीप संधू अहम भूमिकाओं में हैं।
फिल्मकारों की राय
मुख्य अभिनेता अक्षय ओबेरॉय ने कहा, 'हमारी फिल्म उन मुद्दों की बात करती है, जिनके बारे में हमारे समाज के पुरुष अक्सर खुलकर बात करने में हिचकिचाते हैं या शर्म करते हैं। कुछ कानूनों के गलत इस्तेमाल की वजह से समाज का एक वर्ग जिंदगी भर दर्द झेलता आया है। ये फिल्म उन लोगों की आवाज़ है, जिन्होंने ऐसा अनुभव किया है। मेरा मानना है कि पीड़ित सिर्फ पुरुष ही नहीं होता — उसकी माँ, बहन या कोई भी करीबी महिला भी इसी वजह से परेशान हो सकती है।'
निर्देशक अरविंद पांडे ने कहा, 'लव लॉटरी के जरिए हम क्राइम, सस्पेंस और इमोशन के माध्यम से एक ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर बात करना चाहते हैं जिस पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती। फिल्म का मकसद किसी एक जेंडर को टारगेट करना या दोष देना नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाती है कि जब कानून, रिश्ते और निजी झगड़े आपस में उलझ जाते हैं तो क्या होता है।'
प्रोड्यूसर कुलदीप भार्गव तुषार ने कहा, 'मैंने कहानी को दिलचस्प तरीके से पेश करने की कोशिश की है, साथ ही दर्शकों के लिए सोचने के लिए कुछ सवाल भी छोड़े हैं।' लेखक अंकुर खत्री ने कहा, 'लव लॉटरी का विषय बेहद संवेदनशील है और हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी थी इसे संतुलन और समझदारी के साथ प्रस्तुत करना। फिल्म दिखाती है कि कैसे प्यार, भरोसा और शादी कभी-कभी एक अनपेक्षित मोड़ ले सकते हैं।'
आगे क्या
फिल्म की रिलीज़ तारीख अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन टीजर के जारी होने के साथ ही 'लव लॉटरी' सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म पुरुष अधिकारों और कानूनी व्यवस्था पर एक संतुलित बहस को किस हद तक आगे बढ़ा पाती है।