अमिताभ बच्चन को ताज होटल डिस्को में एंट्री दिलाते थे विनोद खन्ना, 70s की अनजानी दोस्ती का किस्सा
सारांश
मुख्य बातें
अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना को 70 के दशक में बॉलीवुड के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों में गिना जाता था — लेकिन पर्दे के पीछे दोनों के बीच एक गहरी और ईमानदार दोस्ती थी, जो स्टारडम और प्रतिस्पर्धा से कहीं ऊपर थी। अमिताभ ने खुद अपने ब्लॉग और कई इंटरव्यू में विनोद से जुड़े ऐसे किस्से साझा किए हैं, जो इस रिश्ते की असली तस्वीर पेश करते हैं।
ताज होटल डिस्को का वह यादगार किस्सा
अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि उस दौर में विनोद खन्ना मुंबई के ताज होटल के डिस्को क्लब के सदस्य थे, जबकि अमिताभ के पास उस क्लब की मेंबरशिप नहीं थी। ऐसे में विनोद उन्हें हर बार अपने साथ अंदर ले जाते थे। यह छोटा-सा किस्सा उस दोस्ती की गहराई को बयान करता है, जो किसी भी प्रतिस्पर्धा से बेपरवाह थी।
शुरुआती दिनों से बनी दोस्ती
दोनों की पहली मुलाकात फिल्म इंडस्ट्री के शुरुआती दिनों में हुई थी। 6 अक्टूबर 1946 को जन्मे विनोद खन्ना उस समय अपनी पहचान बना रहे थे, और अमिताभ भी संघर्ष के दौर में थे। फिल्म 'रेशमा और शेरा' में साथ काम करने के बाद दोनों की दोस्ती और प्रगाढ़ होती चली गई।
अमिताभ ने बताया था कि शूटिंग के दौरान दोनों साथ लंच करते थे और मेकअप रूम में घंटों बातें करते रहते थे। पैकअप के बाद भी उनकी मुलाकातें जारी रहती थीं — देर रात दोनों कार से जुहू बीच तक ड्राइव पर निकल पड़ते और वहाँ वक्त बिताते थे।
पर्दे पर भी साथ, पर्दे के पीछे भी
'हेरा फेरी', 'अमर अकबर एंथनी', 'परवरिश' और 'मुकद्दर का सिकंदर' जैसी फिल्मों में दोनों साथ नज़र आए और दर्शकों ने इस जोड़ी को खूब पसंद किया। 'परवरिश' में दोनों ने भाइयों के किरदार निभाए, जबकि 'मुकद्दर का सिकंदर' में उनकी दोस्ती कहानी का अहम हिस्सा थी।
गौरतलब है कि पर्दे पर दोनों के बीच जो रिश्ता दिखाया जाता था — कभी दोस्त, कभी भाई — वह असल ज़िंदगी से बहुत अलग नहीं था।
राइवलरी मीडिया की बनाई थी: विनोद खन्ना
उस दौर में दोनों के बीच प्रतिद्वंद्विता को लेकर खूब लिखा गया। लेकिन विनोद खन्ना ने 2006 में एक इंटरव्यू में साफ़ कहा था कि यह राइवलरी मीडिया की बनाई हुई थी — हकीकत में दोनों अच्छे दोस्त थे। यह बयान उस पूरे 'प्रतिस्पर्धा' के कथित आख्यान को चुनौती देता है, जो दशकों तक फिल्मी पत्रकारिता का हिस्सा रहा।
विनोद खन्ना: एक युग का अंत
विनोद खन्ना का निधन 27 अप्रैल 2017 को हुआ। उनकी जयंती पर अमिताभ बच्चन के ये किस्से एक बार फिर सामने आते हैं और याद दिलाते हैं कि बॉलीवुड के सुनहरे दौर में परदे के पीछे कैसे रिश्ते पनपते थे। यह दोस्ती इस बात की मिसाल है कि असली बंधन न फिल्मों की सफलता से बनते हैं, न उससे टूटते हैं।