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अमिताभ बच्चन को ताज होटल डिस्को में एंट्री दिलाते थे विनोद खन्ना, 70s की अनजानी दोस्ती का किस्सा

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अमिताभ बच्चन को ताज होटल डिस्को में एंट्री दिलाते थे विनोद खन्ना, 70s की अनजानी दोस्ती का किस्सा

सारांश

पर्दे पर प्रतिद्वंद्वी, पर्दे के पीछे दोस्त — अमिताभ बच्चन ने खुद बताया कि विनोद खन्ना उन्हें ताज होटल के डिस्को क्लब में अपनी मेंबरशिप पर एंट्री दिलाते थे। जुहू बीच की आधी रात की ड्राइव से लेकर मेकअप रूम की लंबी बातों तक — 70s की यह दोस्ती स्टारडम से कहीं बड़ी थी।

मुख्य बातें

अमिताभ बच्चन के पास ताज होटल के डिस्को क्लब की मेंबरशिप नहीं थी — विनोद खन्ना उन्हें अपने साथ अंदर ले जाते थे।
दोनों की दोस्ती फिल्म 'रेशमा और शेरा' की शूटिंग के दौरान गहरी हुई।
शूटिंग के बाद दोनों अक्सर आधी रात को जुहू बीच तक ड्राइव पर जाते थे।
विनोद खन्ना ने 2006 में स्पष्ट कहा था कि उनके और अमिताभ के बीच की राइवलरी मीडिया की बनाई हुई थी।
'हेरा फेरी' , 'अमर अकबर एंथनी' , 'परवरिश' और 'मुकद्दर का सिकंदर' में दोनों साथ नज़र आए।
विनोद खन्ना का निधन 27 अप्रैल 2017 को हुआ; उनका जन्म 6 अक्टूबर 1946 को हुआ था।

अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना को 70 के दशक में बॉलीवुड के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों में गिना जाता था — लेकिन पर्दे के पीछे दोनों के बीच एक गहरी और ईमानदार दोस्ती थी, जो स्टारडम और प्रतिस्पर्धा से कहीं ऊपर थी। अमिताभ ने खुद अपने ब्लॉग और कई इंटरव्यू में विनोद से जुड़े ऐसे किस्से साझा किए हैं, जो इस रिश्ते की असली तस्वीर पेश करते हैं।

ताज होटल डिस्को का वह यादगार किस्सा

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि उस दौर में विनोद खन्ना मुंबई के ताज होटल के डिस्को क्लब के सदस्य थे, जबकि अमिताभ के पास उस क्लब की मेंबरशिप नहीं थी। ऐसे में विनोद उन्हें हर बार अपने साथ अंदर ले जाते थे। यह छोटा-सा किस्सा उस दोस्ती की गहराई को बयान करता है, जो किसी भी प्रतिस्पर्धा से बेपरवाह थी।

शुरुआती दिनों से बनी दोस्ती

दोनों की पहली मुलाकात फिल्म इंडस्ट्री के शुरुआती दिनों में हुई थी। 6 अक्टूबर 1946 को जन्मे विनोद खन्ना उस समय अपनी पहचान बना रहे थे, और अमिताभ भी संघर्ष के दौर में थे। फिल्म 'रेशमा और शेरा' में साथ काम करने के बाद दोनों की दोस्ती और प्रगाढ़ होती चली गई।

अमिताभ ने बताया था कि शूटिंग के दौरान दोनों साथ लंच करते थे और मेकअप रूम में घंटों बातें करते रहते थे। पैकअप के बाद भी उनकी मुलाकातें जारी रहती थीं — देर रात दोनों कार से जुहू बीच तक ड्राइव पर निकल पड़ते और वहाँ वक्त बिताते थे।

पर्दे पर भी साथ, पर्दे के पीछे भी

'हेरा फेरी', 'अमर अकबर एंथनी', 'परवरिश' और 'मुकद्दर का सिकंदर' जैसी फिल्मों में दोनों साथ नज़र आए और दर्शकों ने इस जोड़ी को खूब पसंद किया। 'परवरिश' में दोनों ने भाइयों के किरदार निभाए, जबकि 'मुकद्दर का सिकंदर' में उनकी दोस्ती कहानी का अहम हिस्सा थी।

गौरतलब है कि पर्दे पर दोनों के बीच जो रिश्ता दिखाया जाता था — कभी दोस्त, कभी भाई — वह असल ज़िंदगी से बहुत अलग नहीं था।

राइवलरी मीडिया की बनाई थी: विनोद खन्ना

उस दौर में दोनों के बीच प्रतिद्वंद्विता को लेकर खूब लिखा गया। लेकिन विनोद खन्ना ने 2006 में एक इंटरव्यू में साफ़ कहा था कि यह राइवलरी मीडिया की बनाई हुई थी — हकीकत में दोनों अच्छे दोस्त थे। यह बयान उस पूरे 'प्रतिस्पर्धा' के कथित आख्यान को चुनौती देता है, जो दशकों तक फिल्मी पत्रकारिता का हिस्सा रहा।

विनोद खन्ना: एक युग का अंत

विनोद खन्ना का निधन 27 अप्रैल 2017 को हुआ। उनकी जयंती पर अमिताभ बच्चन के ये किस्से एक बार फिर सामने आते हैं और याद दिलाते हैं कि बॉलीवुड के सुनहरे दौर में परदे के पीछे कैसे रिश्ते पनपते थे। यह दोस्ती इस बात की मिसाल है कि असली बंधन न फिल्मों की सफलता से बनते हैं, न उससे टूटते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह मीडिया-निर्मित प्रतिद्वंद्विता के पूरे आख्यान पर सवाल उठाता है। यह ऐसे समय में ज़रूरी याद दिलाता है जब सेलेब्रिटी 'फ्यूड' को बड़े पर्दे पर भी बेचा जाता है — अक्सर सच से परे। दोनों के ये किस्से यह भी बताते हैं कि 70s का बॉलीवुड जितना प्रतिस्पर्धी था, उतना ही व्यक्तिगत रिश्तों में समृद्ध भी था।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना की दोस्ती कैसे शुरू हुई?
दोनों की दोस्ती फिल्म 'रेशमा और शेरा' की शूटिंग के दौरान गहरी हुई, जब दोनों इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। शूटिंग के दौरान साथ लंच, मेकअप रूम में लंबी बातें और देर रात जुहू बीच तक ड्राइव — इन सबने उनकी दोस्ती को मज़बूत किया।
ताज होटल डिस्को क्लब वाला किस्सा क्या है?
अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में बताया था कि उस दौर में विनोद खन्ना मुंबई के ताज होटल के डिस्को क्लब के सदस्य थे, जबकि अमिताभ के पास उस क्लब की मेंबरशिप नहीं थी। इसलिए विनोद उन्हें हर बार अपने साथ अंदर ले जाते थे।
क्या अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना सच में प्रतिद्वंद्वी थे?
विनोद खन्ना ने खुद 2006 में एक इंटरव्यू में स्पष्ट कहा था कि उनके और अमिताभ के बीच की राइवलरी मीडिया की बनाई हुई थी और दोनों दोस्त थे। पर्दे पर प्रतिस्पर्धा थी, लेकिन असल ज़िंदगी में दोनों के बीच गहरा व्यक्तिगत रिश्ता था।
अमिताभ और विनोद खन्ना ने किन फिल्मों में साथ काम किया?
दोनों ने 'रेशमा और शेरा', 'हेरा फेरी', 'अमर अकबर एंथनी', 'परवरिश' और 'मुकद्दर का सिकंदर' जैसी फिल्मों में साथ काम किया। 'परवरिश' में दोनों भाइयों के रोल में थे, जबकि 'मुकद्दर का सिकंदर' में उनकी दोस्ती कहानी का केंद्र थी।
विनोद खन्ना का निधन कब हुआ और उनका जन्मदिन कब है?
विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को हुआ था और उनका निधन 27 अप्रैल 2017 को हुआ। उनकी जयंती पर अमिताभ बच्चन के साथ उनकी दोस्ती के किस्से अक्सर याद किए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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