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'अनुपमा' की रुपाली गांगुली बोलीं — असली फैशन है आत्मविश्वास, महंगे कपड़े नहीं

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'अनुपमा' की रुपाली गांगुली बोलीं — असली फैशन है आत्मविश्वास, महंगे कपड़े नहीं

सारांश

स्टार प्लस के कार्यक्रम में 'अनुपमा' की रुपाली गांगुली, अद्रिजा रॉय और नेहा ने एक साफ संदेश दिया — फैशन ट्रेंड्स नहीं, आत्मविश्वास और सहजता ही असली स्टाइल है। महाराष्ट्र और गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को परिधानों में उतारते हुए तीनों ने टिकाऊ फैशन की पैरवी की।

मुख्य बातें

रुपाली गांगुली ने कहा कि आत्मविश्वास और सहजता ही सबसे बड़ा फैशन है, महंगे कपड़े नहीं।
अभिनेत्री नेहा ने महाराष्ट्र की पैठणी कला से प्रेरित इंडो-वेस्टर्न परिधान में मराठी परंपरा को प्रस्तुत किया।
अद्रिजा रॉय ने गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को अपने परिधान में उतारा और जेनिफर विंगेट के सादगी भरे स्टाइल की तारीफ की।
तीनों अभिनेत्रियों ने टिकाऊ फैशन को बढ़ावा दिया — पुराने कपड़ों को नए अंदाज़ में पहनने की सलाह दी।
सोशल मीडिया के दबाव को नकारते हुए सभी ने कहा कि कंफर्ट हर ट्रेंड से ऊपर है।

स्टार प्लस के विशेष कार्यक्रम 'फैशन के रंग, रिश्तों के संग' में टीवी शो 'अनुपमा' की स्टारकास्ट ने 1 जून को मुंबई में भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को परिधान और व्यक्तित्व के ज़रिए पेश किया। अभिनेत्री रुपाली गांगुली, अद्रिजा रॉय और नेहा ने एक स्वर में कहा कि सच्चा फैशन महंगे ब्रांड्स या बदलते ट्रेंड्स में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सहजता में बसता है।

रुपाली गांगुली: 'अनुपमा' पूरे देश की नारी का प्रतीक

अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने कहा कि वह खुद को किसी एक राज्य की पहचान तक सीमित नहीं मानतीं। उनके अनुसार, उनका किरदार अनुपमा पूरे देश की महिलाओं का प्रतिनिधित्व करता है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, 'मैं जहाँ भी जाती हूँ, लोग मुझे अनुपमा के रूप में ही पहचानते हैं — यही मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।'

फैशन पर अपनी राय रखते हुए रुपाली ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया। उनके मुताबिक, कपड़े तभी अच्छे लगते हैं जब पहनने वाला उनमें खुद को सहज महसूस करे। उन्होंने दर्शकों को सलाह दी कि सेलिब्रिटीज की नकल में महंगे परिधानों पर खर्च करने की बजाय पुराने कपड़ों को नए अंदाज़ में पहनना ज़्यादा समझदारी है।

सोशल मीडिया के दबाव पर बेबाक जवाब

सोशल मीडिया के दौर में 'परफेक्ट लुक' के बढ़ते दबाव पर रुपाली ने कहा कि वह इस तरह का कोई दबाव महसूस नहीं करतीं। वह स्टाइलिस्ट की मदद से अपने लिए उपयुक्त परिधान चुनती हैं और प्राथमिकता हमेशा सहजता को देती हैं। अद्रिजा रॉय ने भी माना कि सोशल मीडिया आज कलाकारों के लिए एक अहम मंच बन चुका है, लेकिन वह इससे अनावश्यक दबाव नहीं लेतीं।

नेहा और अद्रिजा: परंपरा और आधुनिकता का संगम

अभिनेत्री नेहा ने इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र की संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने पारंपरिक पैठणी कला से प्रेरित इंडो-वेस्टर्न परिधान पहना, जिसमें मराठी आभूषण, गजरा और पारंपरिक डिज़ाइनों का सुंदर मेल था। नेहा ने कहा कि कोई भी परिधान तभी आकर्षक लगता है जब पहनने वाला उसमें आत्मविश्वास से भरा हो — डिज़ाइनर लेबल नहीं, व्यक्तित्व फैशन को परिभाषित करता है।

वहीं, अद्रिजा रॉय ने गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को अपने परिधान के ज़रिए उकेरा। उन्होंने बताया कि डिज़ाइनर ने गुजराती परंपराओं की बारीकियों को बड़ी मेहनत से कपड़ों में उतारा। अद्रिजा के अनुसार, किसी संस्कृति का प्रतिनिधित्व केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उसकी पहचान को सही तरीके से प्रस्तुत करने से होता है। उन्होंने अभिनेत्री जेनिफर विंगेट के सादगी भरे और संतुलित स्टाइल की भी तारीफ की।

टिकाऊ फैशन की पैरवी

तीनों अभिनेत्रियों ने टिकाऊ फैशन को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया। नेहा ने कहा कि हर नए ट्रेंड के साथ पूरी अलमारी बदलना ज़रूरी नहीं — पुराने कपड़ों को नए अंदाज़ में स्टाइल करके भी आकर्षक दिखा जा सकता है। अद्रिजा ने जोड़ा कि फैशन का सबसे अहम पहलू कंफर्ट है, खासकर गर्मियों में, जब सहज परिधान ही सबसे बेहतर विकल्प होता है।

यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब फास्ट फैशन और सोशल मीडिया-प्रेरित खर्च को लेकर युवाओं में जागरूकता बढ़ाने की माँग तेज़ हो रही है। 'अनुपमा' की स्टारकास्ट का यह संदेश — कि आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा फैशन है — टेलीविजन की सीमाओं से परे एक सामाजिक संवाद की शुरुआत करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह फास्ट फैशन की उस संस्कृति पर सीधा प्रहार है जिसे सोशल मीडिया ने और हवा दी है। गौरतलब है कि भारत का फैशन उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ युवाओं में 'परफेक्ट लुक' का दबाव और अनावश्यक खर्च भी बढ़ा है। इन अभिनेत्रियों का प्रभाव करोड़ों दर्शकों तक पहुँचता है — ऐसे में टिकाऊ और सांस्कृतिक फैशन की पैरवी महज़ एक इवेंट बाइट नहीं, एक ज़िम्मेदार संदेश है। हालाँकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विमर्श स्क्रीन से आगे जाकर दर्शकों की खरीद आदतों को वाकई बदल पाता है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टार प्लस का 'फैशन के रंग, रिश्तों के संग' कार्यक्रम क्या था?
यह स्टार प्लस का एक विशेष कार्यक्रम था जिसमें 'अनुपमा' की स्टारकास्ट ने भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को परिधान और स्टाइल के ज़रिए प्रस्तुत किया। 1 जून को मुंबई में आयोजित इस इवेंट में फैशन, सहजता और टिकाऊ स्टाइल पर चर्चा हुई।
रुपाली गांगुली ने फैशन को लेकर क्या कहा?
रुपाली गांगुली ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा फैशन उसका आत्मविश्वास और सहजता है। उन्होंने सलाह दी कि सेलिब्रिटीज की नकल में महंगे कपड़ों पर खर्च करने की बजाय पुराने कपड़ों को नए अंदाज़ में पहनना बेहतर विकल्प है।
नेहा और अद्रिजा रॉय ने किस संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया?
नेहा ने महाराष्ट्र की पैठणी कला से प्रेरित इंडो-वेस्टर्न परिधान पहनकर मराठी संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया, जबकि अद्रिजा रॉय ने गुजरात की पारंपरिक विरासत को अपने परिधान में उकेरा।
इन अभिनेत्रियों ने सोशल मीडिया के फैशन दबाव पर क्या राय दी?
तीनों अभिनेत्रियों ने सोशल मीडिया के 'परफेक्ट लुक' के दबाव को नकारा। रुपाली गांगुली और अद्रिजा रॉय दोनों ने कहा कि वे इस दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने देतीं और कंफर्ट को हमेशा प्राथमिकता देती हैं।
टिकाऊ फैशन पर स्टारकास्ट ने क्या संदेश दिया?
नेहा और अद्रिजा रॉय ने टिकाऊ फैशन की पैरवी करते हुए कहा कि हर नए ट्रेंड के साथ अलमारी बदलना ज़रूरी नहीं। पुराने कपड़ों को नए अंदाज़ में स्टाइल करके भी आकर्षक दिखा जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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