25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या पुरुषों को इमोशन दिखाने की आजादी नहीं मिलती? : अर्जन बाजवा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या पुरुषों को इमोशन दिखाने की आजादी नहीं मिलती? : अर्जन बाजवा

सारांश

अर्जन बाजवा ने पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर बात करते हुए बताया कि समाज में उन्हें भावनाओं को व्यक्त करने की आजादी नहीं है। यह महत्वपूर्ण है कि हम इस विषय पर चर्चा करें और पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करें।

मुख्य बातें

पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
समाज में भावनाओं को दिखाने की आजादी नहीं है।
पुरुषों को अपने इमोशंस दिखाने के लिए समय और स्थान नहीं मिलता।
सही मानसिकता से ही सही परिणाम प्राप्त होते हैं।
अर्जन बाजवा ने कई प्रमुख फिल्में की हैं।

मुंबई, 29 जून (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेता अर्जन बाजवा ने अपनी फिल्म 'फैशन' में निभाई गई भूमिका के लिए प्रसिद्धि प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है।

अर्जन बाजवा ने पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में चर्चा करते हुए पूछा, "पुरुषों की भावनात्मक स्थिति पर चर्चा कम क्यों होती है?" उन्होंने इसके लिए सामाजिक अपेक्षाएं और पुरानी सोच को जिम्मेदार बताया।

उन्होंने उल्लेख किया कि पुरुषों के स्वास्थ्य को अक्सर कम आंका जाता है क्योंकि उन्हें भावुक होने का हक नहीं समझा जाता। उन्हें केवल कामकाजी, प्रदाता और हर स्थिति को संभालने वाला व्यक्ति माना जाता है।

अर्जन ने कहा, "अगर कोई पुरुष भावुक दिखाई देता है, तो उसे हम कमजोर मानने लगते हैं। परंतु कोई यह नहीं समझता कि पुरुष भी इंसान हैं। इसलिए, पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। सही मानसिकता ही सही परिणाम लाएगी।"

अर्जन ने कहा कि उन्हें अपने भावनात्मक पक्ष को व्यक्त करने में कठिनाई होती है क्योंकि वह अपने सपनों की खोज में लगे रहते हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि एक पुरुष को अपने इमोशंस दिखाने के लिए कोई समय और स्थान नहीं मिलता। बचपन से ही उन्हें उस बॉक्स में डाल दिया जाता है, जहां उन्हें सही तरीके से काम न करने के लिए दोषी ठहराया जाता है।"

उन्होंने कहा कि पुरुषों को जीवन में भावुक होने या गलतियाँ करने की आजादी नहीं मिलती। हर कदम पर उन्हें जवाबदेह ठहराया जाता है। इसलिए, उन्हें हमेशा फायदे और नुकसान का आकलन करते रहना पड़ता है।

वर्कफ्रंट पर, अर्जन ने 'फैशन', 'क्रूक', 'सन ऑफ सरदार', 'बॉबी जासूस', 'रुस्तम', और 'कबीर सिंह' जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा, वह 'बेस्टसेलर्स' और 'स्टेट ऑफ सीज: 26/11' जैसी वेब सीरीज में भी दिखाई दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अर्जन बाजवा की बातें हमें यह समझाती हैं कि हमारे समाज में पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज किया जाता है। यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे हमें चर्चा में लाना चाहिए।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्जन बाजवा ने पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को आम तौर पर नजरअंदाज किया जाता है और उन्हें भावुक होने का हक नहीं दिया जाता।
पुरुषों को अपने इमोशंस दिखाने में कौन सी समस्याएं आती हैं?
अर्जन ने बताया कि बचपन से ही उन्हें उस बॉक्स में डाल दिया जाता है, जहां उन्हें सही तरीके से काम न करने के लिए दोषी ठहराया जाता है।
अर्जन बाजवा ने अपने करियर में कौन सी प्रमुख फिल्में की हैं?
उन्होंने 'फैशन', 'क्रूक', 'सन ऑफ सरदार', 'बॉबी जासूस', 'रुस्तम', और 'कबीर सिंह' जैसी फिल्मों में काम किया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले