आशा भोसले का अनोखा किस्सा: 'इन आंखों की मस्ती' से पहले खय्याम ने दिलवाई बेटे की कसम
सारांश
Key Takeaways
- आशा भोसले का संगीत करियर अद्वितीय है।
- खय्याम ने अद्वितीय गाने की मांग की।
- प्रैक्टिस और संघर्ष से ही उत्कृष्टता मिलती है।
- कभी-कभी चुनौती ही हमारी असली क्षमता को उजागर करती है।
- 'इन आंखों की मस्ती' गाना आज भी दर्शकों के दिलों में बसा है।
नई दिल्ली, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय संगीत की दुनिया में कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जो सदाबहार बन जाती हैं। प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले ने अपने लंबे करियर में अनगिनत गानों को आवाज दी है, लेकिन कुछ गाने ऐसे हैं, जिन्होंने उन्हें भी चौंका दिया। ऐसा ही एक मजेदार किस्सा फिल्म 'उमराव जान' के प्रसिद्ध गीत 'इन आंखों की मस्ती' से संबंधित है, जिसमें एक अवसर पर आशा भोसले ने खुद संगीतकार से बेटे की कसम दिलवाई।
यह घटना उस समय की है, जब रेखा अभिनीत फिल्म 'उमराव जान' का निर्माण हो रहा था। इस फिल्म का निर्देशन मुजफ्फर अली कर रहे थे और संगीत की जिम्मेदारी मशहूर संगीतकार खय्याम ने संभाली थी। फिल्म की कहानी बहुत नाजुक थी, इसलिए इसके गाने भी विशेष प्रकार की आवाज और भावनाओं की मांग कर रहे थे। ऐसे में खय्याम की पत्नी जगजीत कौर ने सुझाव दिया कि इस फिल्म के लिए सबसे उपयुक्त आवाज आशा भोसले की होगी।
उस समय आशा भोसले बेहद व्यस्त थीं और एक दिन में कई गाने रिकॉर्ड कर रही थीं। जब खय्याम उनके पास 'इन आंखों की मस्ती' लेकर पहुंचे, तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यह गाना आसान नहीं है और इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी। आशा जी ने तुरंत सहमति जताई, लेकिन रिहर्सल के लिए कुछ समय मांगा।
दिलचस्प बात तब सामने आई जब खय्याम ने कहा कि उन्हें आशा की आवाज नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें 'उमराव जान' के किरदार की आवाज चाहिए। यह सुनकर आशा एकदम चौंक गईं।
उन्होंने सवाल किया, "आखिर मैं ऐसा कैसे कर सकती हूँ?" तब खय्याम ने खुद गाकर उन्हें समझाया कि उन्हें किस प्रकार की नरम और गहरी आवाज चाहिए। इस पर आशा ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें और कुछ दिन प्रैक्टिस के लिए दिए जाएं।
जब रिकॉर्डिंग का समय आया, तब असली चुनौती सामने आई। खय्याम ने इस गाने को बहुत धीमे और अलग सुर में तैयार किया था, जो आशा भोसले की सामान्य ऊंची आवाज से बिलकुल भिन्न था। जब उन्होंने गाना सुना, तो वह थोड़ी परेशान हो गईं और उन्हें लगा कि वह इस अंदाज में गा नहीं पाएंगी। उन्होंने खय्याम से कहा कि यह सुर उनके लिए नया है और वह इसमें सहज महसूस नहीं कर रही हैं।
इसी बीच बातचीत में वह पल भी आया, जिसने इस किस्से को विशेष बना दिया। खय्याम ने एक उपाय निकाला। उन्होंने कहा कि आशा जी गाना दो तरीके से गाएं, एक अपने अंदाज में और दूसरा 'उमराव जान' के चरित्र के अनुसार। बाद में दोनों में से जो बेहतर लगेगा, उसे चुना जाएगा। आशा भोसले ने कहा कि अगर ऐसा है तो वह अपने बेटे की कसम खाएं कि गाने में वही किया जाएगा, जो तय हुआ है।
जब गाना पूरा हुआ और आशा भोसले ने उसे सुना, तो वह खुद भावुक हो गईं। उन्होंने कुछ पल के लिए आंखें बंद कर लिया और चुप रहीं। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि यह गाना उनकी ही आवाज में है। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने पहले कभी इस तरह नहीं गाया था। यही वजह है कि 'इन आंखों की मस्ती' आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खास स्थान रखता है।