13 अक्टूबर 2026
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'लास्ट मैन इन टावर' के निर्देशक बेन रेखी बोले — मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ काम करना अविस्मरणीय

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'लास्ट मैन इन टावर' के निर्देशक बेन रेखी बोले — मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ काम करना अविस्मरणीय

सारांश

'लास्ट मैन इन टावर' के निर्देशक बेन रेखी ने प्रमोशन के दौरान बताया कि मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी स्वाभाविक और अप्रत्याशित थी कि हर टेक चुनना मुश्किल हो जाता था। अरविंद अडिगा के उपन्यास पर आधारित यह फिल्म मुंबई के पुनर्विकास और दोस्ती के टूटने की कहानी कहती है।

मुख्य बातें

बेन रेखी ने कहा कि मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ काम करना उनके करियर का शानदार अनुभव रहा।
दोनों अभिनेताओं की केमिस्ट्री इतनी जीवंत थी कि हर टेक अलग होता था और निर्देशक के लिए सही टेक चुनना मुश्किल था।
रेखी ने एक दृश्य का ज़िक्र किया जिसमें मनोज के किरदार का करीबी दोस्त उन्हें धोखा देता है — इस सीन ने निर्देशक को हर बार भावुक कर दिया।
फिल्म अरविंद अडिगा के उसी नाम के उपन्यास पर आधारित है और मुंबई की रियल एस्टेट पुनर्विकास की कहानी कहती है।
'लास्ट मैन इन टावर' अभी देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है।

फिल्म 'लास्ट मैन इन टावर' के निर्देशक बेन रेखी ने 13 अक्टूबर 2026 को मुंबई में फिल्म के प्रमोशन के दौरान खुलासा किया कि अभिनेता मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ काम करना उनके निर्देशकीय करियर के सबसे यादगार अनुभवों में से एक रहा। रेखी ने बताया कि दोनों कलाकारों को एक साथ परफॉर्म करते देखना इतना जीवंत और अप्रत्याशित था कि अक्सर यह तय करना मुश्किल हो जाता था कि किस टेक को अंतिम कट में रखा जाए।

सेट पर दोनों अभिनेताओं की केमिस्ट्री

बेन रेखी ने बताया, 'मुझे लगता है कि बेहतरीन एक्टर्स की एक खूबी यह होती है कि वे सिर्फ दिखावे के लिए परफॉर्म नहीं करते, बल्कि वे दूसरे एक्टर की बात को गहराई से सुनते और समझते हैं। असल में बेहतरीन एक्टिंग का मतलब है रिएक्ट करना और जब आप इन दोनों को साथ लाते हैं, तो उनमें एक गजब का सहजपन देखने को मिलता है। हर टेक अलग होता है। वे एक-दूसरे को देखते हैं और संकेतों को समझते हैं।'

उन्होंने कहा कि दोनों अभिनेताओं के बीच यह ताजगी हर बार नई ऊर्जा लेकर आती थी, जिससे हर दृश्य अपने आप में एक नई अनुभूति बन जाता था।

दोस्ती के टूटने वाले सीन ने निर्देशक को भावुक किया

रेखी ने एक विशेष दृश्य का ज़िक्र करते हुए कहा, 'यह बहुत इंटेंस है। यह इसलिए इतना गहरा है क्योंकि वे एक-दूसरे को बहुत लंबे समय से जानते हैं और दोस्ती का टूटना या धोखा मिलना, ये सब बहुत असली लगता है, लेकिन साथ ही दिल तोड़ने वाला भी होता है।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'एक सीन है जिसमें मनोज के किरदार को उसका एक सबसे अच्छा दोस्त धोखा देता है। और उस सीन में मनोज जो करते हैं, वह मुझे हर बार बहुत भावुक कर देता है क्योंकि आप अपनी आँखों के सामने एक जीवनभर की दोस्ती को टूटते हुए देखते हैं।' रेखी ने स्वीकार किया कि इस दृश्य को याद करते हुए भी वे भावुक हो जाते हैं।

फिल्म की कहानी और पृष्ठभूमि

'लास्ट मैन इन टावर' प्रसिद्ध लेखक अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। फिल्म की कहानी मुंबई के तेज़ी से बदलते शहरी परिवेश को केंद्र में रखती है। मनोज बाजपेयी इसमें एक रिटायर्ड स्कूल शिक्षक और विधुर का किरदार निभा रहे हैं, जो एक पुराने अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहते हैं।

कहानी तब नाटकीय मोड़ लेती है जब एक धनी रियल एस्टेट डेवलपर इमारत के निवासियों को एक आकर्षक सौदे का प्रस्ताव देता है — बिल्डिंग बेचकर एक लग्ज़री टावर बनाने के बदले में। अधिकांश निवासी पैसे के लालच में राज़ी हो जाते हैं, लेकिन मनोज बाजपेयी का किरदार इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर अकेली रुकावट बन जाता है।

सार्वभौमिक भावनाओं पर आधारित है फिल्म

निर्देशक रेखी ने कहा, 'इसके बारे में सोचकर ही मैं भावुक हो जाता हूँ, लेकिन यह वाकई दिल तोड़ने वाला है और यही इसकी ताकत है। यह बहुत अपना-सा लगता है। हम सभी ने कभी न कभी ऐसे हालात का सामना किया है, जहाँ हमने अपने प्यारे दोस्तों को खोया है और धोखा महसूस किया है। इसलिए यह बहुत ईमानदार लगता है।'

गौरतलब है कि अरविंद अडिगा का यह उपन्यास पहले से ही अपनी तीखी सामाजिक टिप्पणी के लिए चर्चित रहा है, और फिल्म उसी भावना को परदे पर जीवंत करने का प्रयास करती है। 'लास्ट मैन इन टावर' फिलहाल देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर स्टार-पावर और VFX के शोर में दब जाती है। मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता जैसे कलाकार जब किसी अंतरराष्ट्रीय निर्देशक के साथ काम करते हैं, तो यह भारतीय अभिनय की वैश्विक साख का भी प्रमाण है। अरविंद अडिगा के उपन्यास पर बनी यह फिल्म मुंबई की जड़ें उखाड़ने वाली रियल एस्टेट राजनीति पर एक असुविधाजनक दर्पण है — जो बॉलीवुड में कम ही देखने को मिलता है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'लास्ट मैन इन टावर' फिल्म किस पर आधारित है?
यह फिल्म लेखक अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। इसकी कहानी मुंबई के तेज़ी से बदलते शहरी माहौल और रियल एस्टेट पुनर्विकास को केंद्र में रखती है।
फिल्म में मनोज बाजपेयी का किरदार क्या है?
मनोज बाजपेयी इस फिल्म में एक रिटायर्ड स्कूल शिक्षक और विधुर का किरदार निभा रहे हैं जो एक पुराने अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहते हैं। जब एक डेवलपर बिल्डिंग खरीदने का प्रस्ताव देता है तो वे अकेले इसका विरोध करते हैं।
निर्देशक बेन रेखी ने मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ काम करने के बारे में क्या कहा?
बेन रेखी ने कहा कि दोनों अभिनेताओं के बीच की केमिस्ट्री इतनी स्वाभाविक और जीवंत थी कि हर टेक अलग होता था और यह तय करना मुश्किल हो जाता था कि किसे अंतिम कट में रखा जाए। उन्होंने इसे अपने करियर का शानदार अनुभव बताया।
'लास्ट मैन इन टावर' फिल्म अभी कहाँ देखी जा सकती है?
यह फिल्म अभी देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है। इसकी रिलीज़ हाल ही में हुई है।
बेन रेखी के अनुसार फिल्म का सबसे भावुक दृश्य कौन-सा है?
रेखी ने उस दृश्य को सबसे भावुक बताया जिसमें मनोज बाजपेयी के किरदार का करीबी दोस्त उन्हें धोखा देता है। रेखी ने कहा कि इस सीन को देखकर उनकी आँखें हर बार भर आती हैं क्योंकि इसमें जीवनभर की दोस्ती का टूटना बेहद सच्चाई से दिखाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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