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साकिब सलीम का महिला सुरक्षा पर करारा बयान: 'चाहे स्कर्ट हो या साड़ी, इस देश की औरतें खतरे में हैं'

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साकिब सलीम का महिला सुरक्षा पर करारा बयान: 'चाहे स्कर्ट हो या साड़ी, इस देश की औरतें खतरे में हैं'

सारांश

अभिनेता साकिब सलीम ने इंस्टाग्राम पर लिखा — 'चाहे स्कर्ट हो या साड़ी, इस देश की औरतें खतरे में हैं।' पहनावे पर दोष मढ़ने की मानसिकता को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि छोटे कपड़े नहीं, सोच छोटी है। कृति सेनन और खूशबू पाटनी समेत कई सेलेब्स इस बहस में पहले से आवाज़ उठा चुके हैं।

मुख्य बातें

साकिब सलीम ने 28 सितंबर को इंस्टाग्राम पर नोट साझा कर महिलाओं के पहनावे को हिंसा का कारण बताने वाली सोच की आलोचना की।
उन्होंने लिखा — 'चाहे स्कर्ट हो या साड़ी, इस देश की औरतें खतरे में हैं।' अभिनेत्री कृति सेनन ने 'डॉटर्स डे' पर महिलाओं की रोज़मर्रा की सुरक्षा चिंताओं — लाइव लोकेशन, पेपर स्प्रे, रात में कैब — को उजागर किया।
खूशबू पाटनी ने भी हाल ही में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए थे।
इससे पहले प्रियंका चोपड़ा और फरहान अख्तर समेत कई बॉलीवुड हस्तियाँ इस मुद्दे पर बोल चुकी हैं।

अभिनेता साकिब सलीम ने 28 सितंबर को इंस्टाग्राम पर एक भावुक और तीखा नोट साझा कर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज की सोच पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं के कपड़ों को उनके साथ होने वाली हिंसा का कारण बताना बंद होना चाहिए, और यह मुद्दा पोशाक का नहीं, बल्कि मानसिकता का है।

साकिब सलीम का इंस्टाग्राम नोट

अभिनेता ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'देवी बनाने से पहले इनको इंसान तो मानो, हाथ लगाने से पहले इजाजत तो मांगो। कहते हो कपड़े छोटे थे, 'वो खुद ही चाहती थी' — छोटे उसके कपड़े नहीं, तुम्हारी सोच है। चाहे स्कर्ट हो या साड़ी, इस देश की औरतें खतरे में हैं। एक दिन तो इस देश में एक लड़की बनकर देखो।' यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेज़ी से चर्चा का विषय बन गई।

साकिब ने महिलाओं के रहन-सहन और पहनावे पर टिप्पणी करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि समस्या की जड़ समाज की पितृसत्तात्मक मानसिकता में है, न कि किसी महिला के कपड़ों में।

बॉलीवुड की आवाज़ें — पहले भी उठे हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब किसी फ़िल्मी हस्ती ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी हो। इससे पहले अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और अभिनेता फरहान अख्तर समेत कई कलाकार इस विषय पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा चुके हैं।

अभिनेत्री दिशा पाटनी की बहन खूशबू पाटनी भी अक्सर महिला सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं। हाल ही में उन्होंने कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर चिंताएँ जताई थीं।

कृति सेनन का 'डॉटर्स डे' पर संदेश

अभिनेत्री कृति सेनन ने 'डॉटर्स डे' के अवसर पर इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत नोट साझा करते हुए महिलाओं की रोज़मर्रा की सुरक्षा चिंताओं को उजागर किया। उन्होंने लिखा, 'लाइव लोकेशन शेयर करने से लेकर, पेपर स्प्रे रखने तक, पैदल जाने के बजाय कैब बुक या सुरक्षित महसूस करने के लिए किसी को फोन करने तक — हमने लड़कियों की जिंदगी को ऐसा बना दिया है कि ये सब उसकी रोज़मर्रा की आदत का हिस्सा बन गया है।'

कृति ने आगे कहा, 'जिस दिन कोई बेटी रात में अकेले घर जा सके, अंधेरा होने के बाद पार्क में बैठ सके, अपनी मर्जी के कपड़े पहन सके, बिना डरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सके या बिना हमले के डर के किसी सार्वजनिक जगह पर रह सके — असल में उसी दिन हमें बेटी दिवस मनाना चाहिए।'

महिला सुरक्षा — एक बड़ा राष्ट्रीय सवाल

यह ऐसे समय में आया है जब देश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को लेकर बहस तेज़ हो रही है। एक तरफ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ पीड़िताओं के पहनावे और आचरण को कठघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति पर भी आलोचकों का कहना है कि यह सोच समस्या को और गहरा करती है।

गौरतलब है कि मनोरंजन जगत की हस्तियों का इस तरह सार्वजनिक मंचों पर बोलना सामाजिक विमर्श को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाता है। साकिब और कृति जैसे कलाकारों की आवाज़ें यह संकेत देती हैं कि महिला सुरक्षा का मुद्दा अब केवल नीतिगत बहस तक सीमित नहीं रहा — यह सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा बन चुका है।

आगे क्या

सेलेब्रिटीज़ की इस बढ़ती आवाज़ के साथ, यह देखना होगा कि नीति-निर्माता और समाज मिलकर महिलाओं की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं। जब तक सिस्टम और सोच दोनों नहीं बदलते, ये सवाल प्रासंगिक बने रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर सेलेब्रिटी की आवाज़ें ज़मीनी बदलाव में कितनी तब्दील होती हैं। महिला सुरक्षा पर बॉलीवुड का बोलना एक ज़रूरी सांस्कृतिक दबाव बनाता है, लेकिन जब तक यह दबाव नीतिगत जवाबदेही में नहीं बदलता, यह चर्चा एक चक्र में घूमती रहती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर पोस्ट की भावना तक सिमट जाती है — यह नहीं पूछती कि पिछले कई वर्षों में इसी तरह की आवाज़ों के बाद व्यवस्था में क्या बदला।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साकिब सलीम ने महिला सुरक्षा पर क्या कहा?
साकिब सलीम ने 28 सितंबर को इंस्टाग्राम पर एक नोट साझा करते हुए कहा कि महिलाओं के कपड़े नहीं, बल्कि समाज की सोच छोटी है। उन्होंने लिखा — 'चाहे स्कर्ट हो या साड़ी, इस देश की औरतें खतरे में हैं।'
कृति सेनन ने डॉटर्स डे पर क्या संदेश दिया?
कृति सेनन ने डॉटर्स डे पर इंस्टाग्राम पर लिखा कि लड़कियों की जिंदगी में लाइव लोकेशन शेयर करना, पेपर स्प्रे रखना और रात में कैब बुक करना रोज़मर्रा की मजबूरी बन गई है। उन्होंने कहा कि असली 'बेटी दिवस' तब होगा जब बेटियाँ बिना डर के रात में अकेले घर जा सकें।
क्या अन्य बॉलीवुड सितारों ने भी महिला सुरक्षा पर बात की है?
हाँ, प्रियंका चोपड़ा, फरहान अख्तर और खूशबू पाटनी समेत कई बॉलीवुड हस्तियाँ पहले भी महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से आवाज़ उठा चुकी हैं। खूशबू पाटनी ने हाल ही में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे।
महिलाओं के पहनावे को सुरक्षा से जोड़ने की सोच पर साकिब का क्या तर्क है?
साकिब सलीम का तर्क है कि पहनावा हिंसा का कारण नहीं है — असली समस्या सोच में है। उन्होंने कहा कि 'छोटे उसके कपड़े नहीं, तुम्हारी सोच है' और महिलाओं को देवी मानने से पहले इंसान मानने की ज़रूरत है।
भारत में महिला सुरक्षा का मुद्दा इस समय क्यों चर्चा में है?
देश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की घटनाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच यह बहस तेज़ हो गई है। आलोचकों का कहना है कि पीड़िताओं के पहनावे और आचरण को दोष देने की प्रवृत्ति समस्या की जड़ को अनदेखा करती है।
राष्ट्र प्रेस
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