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कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर गजेंद्र चौहान बोले — 'कैमरे पर पहनावे की जिम्मेदारी बढ़ जाती है'

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कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर गजेंद्र चौहान बोले — 'कैमरे पर पहनावे की जिम्मेदारी बढ़ जाती है'

सारांश

रक्षाबंधन पर कृति सेनन के ज्वेलरी विज्ञापन ने सोशल मीडिया से लेकर संसद तक बहस छेड़ दी। गजेंद्र चौहान ने साफ कहा — निजी जिंदगी में जो चाहें पहनें, लेकिन कैमरे पर और त्योहारी विज्ञापन में पब्लिक फिगर की जिम्मेदारी अलग होती है। ब्रांड ने विज्ञापन वापस लिया, पर बहस जारी है।

मुख्य बातें

गजेंद्र चौहान ने कृति सेनन के रक्षाबंधन ज्वेलरी विज्ञापन पर खुलकर असहमति जताई और विज्ञापन का खंडन किया।
विज्ञापन में कृति सेनन ने ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहनी थी और एक पेट डॉग को भी राखी बांधी थी।
BJP सांसद कंगना रनौत ने भी विज्ञापन पर आपत्ति जताई, जिससे विवाद और तेज हुआ।
विवाद बढ़ने के बाद ज्वेलरी ब्रांड ने कथित तौर पर विज्ञापन वापस ले लिया।
चौहान का कहना है कि पब्लिक फिगर की निजी पसंद और सार्वजनिक मंच पर जिम्मेदारी अलग-अलग होती है।

अभिनेता गजेंद्र चौहान ने बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन से जुड़े एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन पर खुलकर असहमति जताई है। उनका कहना है कि रक्षाबंधन भारत के पवित्र त्योहारों में से एक है और ऐसे त्योहार से जुड़े विज्ञापन में कलाकारों की प्रस्तुति ऐसी होनी चाहिए जो समाज को सही संदेश दे।

विवाद की पृष्ठभूमि

विवाद की शुरुआत एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन से हुई, जिसमें कृति सेनन अपने ऑन-स्क्रीन भाई को राखी बांधती नजर आईं। विज्ञापन में उन्होंने ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहनी थी। इसके अलावा, विज्ञापन में वह एक पेट डॉग को भी राखी बांधती दिखाई दीं। सोशल मीडिया पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने कृति के पहनावे और विज्ञापन की अवधारणा पर सवाल उठाए। विवाद तब और तेज हो गया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी इस विज्ञापन पर आपत्ति जताई।

गजेंद्र चौहान की प्रतिक्रिया

गजेंद्र चौहान ने कहा, 'किसी व्यक्ति को क्या पहनना है, यह उसकी अपनी निजी पसंद है। अगर कोई व्यक्ति अपनी निजी जिंदगी में कुछ भी पहनता है, तो उस पर सवाल उठाना सही नहीं है। जब कोई व्यक्ति पब्लिक फिगर होता है और कैमरे के सामने किसी ब्रांड या विज्ञापन के जरिए लोगों तक पहुंचता है, तो उसके काम और पहनावे का असर केवल उसकी निजी जिंदगी तक सीमित नहीं रहता।'

उन्होंने आगे कहा, 'मुझे जानकारी मिली थी कि विवाद बढ़ने के बाद ज्वेलरी ब्रांड ने विज्ञापन हटा दिया था। यह अच्छी खबर थी, लेकिन ऐसी ऐड का सामने आना ही देशवासियों के लिए गलत संदेश देने वाला है। विज्ञापन को हटाना बाद का कदम है, लेकिन शुरुआत में ही इस तरह की चीजों का ध्यान रखा जाना चाहिए।'

पब्लिक फिगर की जिम्मेदारी पर जोर

चौहान ने कृति सेनन की ओर से दी गई सफाई पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'खाना-पीना और पहनना व्यक्ति की निजी पसंद होती है, लेकिन पब्लिक फिगर बनने के बाद स्थिति कुछ अलग हो जाती है। पब्लिक फिगर कैमरे के सामने जो कुछ करता है या पहनता है, वह लोगों तक एक संदेश के तौर पर पहुंचता है। इसलिए कलाकारों को यह जिम्मेदारी समझनी चाहिए कि उनकी वजह से कोई गलत संदेश समाज तक न जाए।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, 'किसी कलाकार की निजी जिंदगी में वह क्या पहनता है या क्या करता है, यह उसका अधिकार है। जब वही चीज किसी विज्ञापन के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। कलाकारों को अपनी निजी पसंद और सार्वजनिक मंच के बीच अंतर समझना चाहिए।'

त्योहार की भावना और विज्ञापन नैतिकता

गजेंद्र चौहान ने जोर देकर कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते, प्यार और एक-दूसरे की रक्षा के वादे से जुड़ा त्योहार है। ऐसे पवित्र अवसर से संबंधित विज्ञापनों में कलाकारों का पहनावा और प्रस्तुति ऐसी होनी चाहिए जो त्योहार की भावनाओं के अनुरूप हो और विवाद की स्थिति न पैदा करे। उन्होंने विज्ञापन का खंडन करते हुए कहा कि विज्ञापन के जरिए देशवासियों तक किसी भी तरह का गलत संदेश नहीं जाना चाहिए।

आगे क्या

कथित तौर पर विवाद बढ़ने के बाद संबंधित ज्वेलरी ब्रांड ने विज्ञापन वापस ले लिया। यह घटना भारतीय विज्ञापन उद्योग में त्योहारी सीजन के दौरान सांस्कृतिक संवेदनशीलता और कलाकारों की सार्वजनिक जिम्मेदारी पर बहस को नए सिरे से खड़ा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि विज्ञापन के व्यापक संदेश पर। ब्रांड का विज्ञापन वापस लेना दबाव में झुकने का उदाहरण है, जो भविष्य में रचनात्मक स्वतंत्रता को और संकुचित कर सकता है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में क्या विवादास्पद था?
विज्ञापन में कृति सेनन ने ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहनी थी और एक पेट डॉग को भी राखी बांधती दिखाई दीं। कुछ लोगों ने पहनावे और विज्ञापन की अवधारणा को रक्षाबंधन की भावना के विपरीत बताया।
गजेंद्र चौहान ने इस विज्ञापन पर क्या कहा?
गजेंद्र चौहान ने विज्ञापन का खंडन करते हुए कहा कि पब्लिक फिगर का कैमरे पर पहनावा और व्यवहार समाज को संदेश देता है, इसलिए त्योहारी विज्ञापनों में विशेष जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निजी जिंदगी में किसी के पहनावे पर सवाल उठाना सही नहीं है।
क्या ज्वेलरी ब्रांड ने विज्ञापन हटाया?
कथित तौर पर विवाद बढ़ने के बाद संबंधित ज्वेलरी ब्रांड ने विज्ञापन वापस ले लिया। गजेंद्र चौहान ने इसे 'अच्छी खबर' बताया, लेकिन कहा कि ऐसी स्थिति शुरुआत में ही न आए, यह सुनिश्चित करना जरूरी है।
कंगना रनौत ने इस विवाद में क्या भूमिका निभाई?
BJP सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी इस विज्ञापन पर आपत्ति जताई, जिसके बाद विवाद और व्यापक हो गया। उनकी आलोचना के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।
इस विवाद का बॉलीवुड और विज्ञापन उद्योग पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद त्योहारी सीजन में विज्ञापन बनाते समय सांस्कृतिक संवेदनशीलता और कलाकारों की सार्वजनिक जिम्मेदारी पर नई बहस खड़ी करता है। आलोचकों का कहना है कि दबाव में विज्ञापन वापस लेने की प्रवृत्ति रचनात्मक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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