पूनम पांडे ने ओशिवारा पुलिस अधिकारी को बांधी राखी, बोलीं — 'परिवार से हटकर रखते हैं हमारा ख्याल'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री पूनम पांडे ने रक्षाबंधन 2026 के अवसर पर मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन पहुँचकर एक पुलिस अधिकारी की कलाई में राखी बाँधी। पुलिस स्टेशन से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया के सामने इस भावनात्मक कदम की वजह साझा की और अभिनेत्री कृति सेनन से जुड़े विज्ञापन विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
भाई से दूरी बनी वजह
पूनम पांडे ने खुलासा किया कि उनके और उनके भाई के बीच कई वर्षों से बातचीत बंद है, जिसके कारण वे उन्हें राखी नहीं बाँध पातीं। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले मैं मीडिया समेत पूरे भारतवर्ष को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ। मैं और मेरे भाई काफ़ी सालों से एक-दूसरे से बात नहीं करते हैं, तो मुझे उन्हें राखी बाँधने का मौका नहीं मिलता।' इसी सोच के साथ उन्होंने मुंबई पुलिस को राखी बाँधने का निर्णय लिया।
मुंबई पुलिस की सराहना
अभिनेत्री ने पुलिसकर्मियों के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा, 'मुंबई पुलिस दिन-रात हमारा इतना ख्याल रखती है। ये सोचने वाली बात है कि वे किसी भी त्योहार को कितना भी सेलिब्रेट करते हों, फिर भी अपनी ड्यूटी पर डटे रहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारी के राखी बँधवाने पर उन्हें सच में बहुत अच्छा लगा।
पुलिस के प्रति नकारात्मक धारणा को नकारा
एक पत्रकार ने जब उनसे 'पुलिसवालों से न दोस्ती अच्छी, न दुश्मनी' वाली कहावत का ज़िक्र किया, तो पूनम पांडे ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'मैं ये सब बिल्कुल बेबुनियाद बातें मानती हूँ। जो अपने परिवार से हटकर हमारा ख्याल रखते हैं और जिन्हें अपने परिवार से मिलने का कम मौका मिलता है, उन्हें हम इस तरह से सपोर्ट तो कर ही सकते हैं। मैं सभी से कहूँगी कि कृपया ये सारी बातें मत बोलिए — अगर ये हैं तभी हम हैं।'
कृति सेनन विवाद पर प्रतिक्रिया
कृति सेनन से जुड़े विज्ञापन विवाद पर पूनम पांडे ने संयमित रुख अपनाते हुए कहा, 'सोशल मीडिया पर सब अपनी टिप्पणियाँ करते हैं — इसे साइड में रखना ही बेहतर होगा।' उन्होंने इस मुद्दे पर कोई विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया।
रक्षाबंधन का पौराणिक संदर्भ
अभिनेत्री ने रक्षाबंधन की पौराणिक उत्पत्ति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया, 'एक बार भगवान कृष्ण का हाथ कट गया था और द्रौपदी ने झट से अपना दुपट्टा फाड़कर उनके हाथ में बाँध दिया — तब से दोनों के बीच एक अहम रिश्ता बन गया और भाई-बहनों की रक्षा का संकल्प लेने की परंपरा शुरू हुई।' यह पर्व अब भी उसी भावना का प्रतीक बना हुआ है।