2 अगस्त 2026
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सुतापा सिकदर का जेन जी को संदेश: 'गालियों में महिलाओं को निशाना बनाना बंद करो'

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सुतापा सिकदर का जेन जी को संदेश: 'गालियों में महिलाओं को निशाना बनाना बंद करो'

सारांश

सुतापा सिकदर ने जेन जी की निडरता को सराहा, लेकिन एक तीखा सवाल भी उठाया — अगर यह पीढ़ी सच में बदलाव चाहती है, तो हिंदी गालियों में महिलाओं को निशाना बनाने की पुरानी आदत अब भी क्यों जारी है?

मुख्य बातें

सुतापा सिकदर ने 2 अगस्त 2026 को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर जेन जी को भाषा सुधार का संदेश दिया।
उन्होंने जेन जी की निडरता और विरोध की भावना की सराहना की।
सुतापा ने कहा कि हिंदी भाषा में महिलाओं के निजी अंगों से जुड़े अपशब्द आज भी प्रचलित हैं।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि बदलाव की शुरुआत हर स्तर पर होनी चाहिए, केवल चुनिंदा मुद्दों पर नहीं।
सुतापा ने कहा कि पितृसत्तात्मक सोच से आगे बढ़ना इस पीढ़ी की ज़िम्मेदारी है।

दिवंगत अभिनेता इरफान खान की पत्नी और लेखिका सुतापा सिकदर ने 2 अगस्त 2026 को अपनी आधिकारिक इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट साझा कर नई पीढ़ी यानी जेन जी को भाषा और सोच में बदलाव लाने की अपील की। उन्होंने युवाओं की निडरता और विरोध की भावना की सराहना करते हुए कहा कि गालियों में महिलाओं को निशाना बनाने की पुरानी आदत आज भी बरकरार है — और यह बदलनी चाहिए।

क्या कहा सुतापा ने अपनी पोस्ट में

सुतापा सिकदर ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि उनका संदेश दोनों लिंगों के लिए है। उन्होंने लिखा, 'यह दोनों जेंडर के लिए है। मैं विरोध का समर्थन करती हूँ और इस निडर पीढ़ी से प्यार करती हूँ। लेकिन एक चीज़ जो पुरानी पीढ़ियों से लेकर अब तक नहीं बदली है, वह है गालियाँ देने का तरीका।'

उन्होंने आगे लिखा कि हिंदी भाषा में आज भी महिलाओं के निजी अंगों को लेकर अपशब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, और यह देखकर वे निराश हैं कि नई पीढ़ी भी इस पुरानी सोच को नहीं बदल पाई।

पितृसत्तात्मक सोच पर सीधा प्रहार

सुतापा ने अपनी पोस्ट में पितृसत्ता पर सीधा निशाना साधा। उनका कहना था कि अगर युवा पीढ़ी बदलाव की बात करती है, तो उसे अपनी भाषा और सोच में भी बदलाव लाना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पीढ़ी 'ज़्यादा कल्पनाशील होगी और पितृसत्तात्मक सोच से आगे बढ़ेगी।'

यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर भाषाई हिंसा और ऑनलाइन ट्रोलिंग को लेकर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि सुतापा सिकदर पहले भी सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखती रही हैं।

बदलाव की शुरुआत हर स्तर पर हो

सुतापा ने कहा कि केवल चुनिंदा मुद्दों पर आवाज़ उठाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने लिखा, 'बदलाव की शुरुआत हर स्तर पर होनी चाहिए। अगर युवा किसी गलत परंपरा या सोच को खत्म करना चाहते हैं, तो उन्हें हर ऐसी आदत पर सवाल उठाना चाहिए जो समाज में समस्या पैदा करती है।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यही आदतें अब अगली पीढ़ी तक भी पहुँच रही हैं, जो उनके लिए चिंता का विषय है।

युवाओं से अंतिम अपील

पोस्ट के अंत में सुतापा ने सीधे जेन जी से कहा, 'किसी को भी गाली देने के लिए महिलाओं को निशाना बनाना सही नहीं है। भाषा के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। पुरानी गालियों को छोड़कर कुछ नया सोचिए।' उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है और कई यूज़र्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएँ साझा की हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह एक बुनियादी असंगति है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। भाषाई हिंसा और ऑनलाइन ट्रोलिंग पर बहस के इस दौर में, यह सवाल और भी प्रासंगिक हो जाता है कि क्या बदलाव केवल नारों तक सीमित है या व्यवहार तक भी पहुँचता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुतापा सिकदर ने जेन जी को क्या सलाह दी?
सुतापा सिकदर ने जेन जी से अपील की कि वे हिंदी गालियों में महिलाओं को निशाना बनाने की आदत बदलें। उन्होंने कहा कि बदलाव की बात करने वाली पीढ़ी को अपनी भाषा और सोच में भी बदलाव लाना होगा।
सुतापा सिकदर ने यह पोस्ट कहाँ और कब शेयर किया?
उन्होंने यह संदेश 2 अगस्त 2026 को अपनी आधिकारिक इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया। पोस्ट में उन्होंने जेन जी की निडरता की तारीफ करते हुए भाषाई बदलाव की माँग रखी।
सुतापा सिकदर ने हिंदी गालियों पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में आज भी महिलाओं के निजी अंगों को लेकर अपशब्दों का इस्तेमाल होता है और यह पुरानी पीढ़ियों से चली आ रही आदत नई पीढ़ी में भी बरकरार है। इस पर उन्होंने खुलकर निराशा जताई।
क्या सुतापा सिकदर ने जेन जी की आलोचना की?
नहीं, उन्होंने जेन जी की आलोचना नहीं की। उन्होंने युवाओं की निडरता और विरोध की भावना की प्रशंसा की, लेकिन भाषा के एक खास पहलू पर सुधार की अपील ज़रूर की।
सुतापा सिकदर कौन हैं?
सुतापा सिकदर दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान की पत्नी और एक जानी-मानी लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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