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परिणीति चोपड़ा का खुलासा: 'कट' के बाद एक सेकंड में स्विच ऑफ हो जाती हूं, इमोशन घर नहीं ले जाती

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परिणीति चोपड़ा का खुलासा: 'कट' के बाद एक सेकंड में स्विच ऑफ हो जाती हूं, इमोशन घर नहीं ले जाती

सारांश

परिणीति चोपड़ा ने खुलासा किया कि 'कट' की आवाज़ सुनते ही वे एक पल में किरदार से बाहर आ जाती हैं — यह उनकी अभिनय की सबसे बड़ी ताकत है। 'शक: ट्रस्ट नो वन' जैसे भावनात्मक प्रोजेक्ट में यह क्षमता उन्हें न सिर्फ बेहतर कलाकार बनाती है, बल्कि मानसिक रूप से भी संतुलित रखती है।

मुख्य बातें

परिणीति चोपड़ा वेब सीरीज 'शक: ट्रस्ट नो वन' के प्रमोशन के दौरान अपनी अभिनय प्रक्रिया पर खुलकर बोलीं।
उनका कहना है कि 'कट' सुनते ही वे एक सेकंड में किरदार की भावनाओं से बाहर आ जाती हैं।
सेट पर साथी कलाकार उनकी इस क्षमता पर अक्सर मज़ाक बनाते हैं और पूछते हैं, 'तुम यह कैसे करती हो?' परिणीति के अनुसार अभिनय के दौरान उनकी भावनाएँ और आंसू पूरी तरह असली होते हैं, पर किरदार का 'हैंगओवर' वे साथ नहीं ले जातीं।
उनका मानना है कि सेट के बाहर की जिंदगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है और उसे जीना जरूरी है।

अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा इन दिनों अपनी बहुचर्चित वेब सीरीज 'शक: ट्रस्ट नो वन' के प्रमोशन में व्यस्त हैं और इस दौरान उन्होंने अपनी अभिनय प्रक्रिया के बारे में एक दिलचस्प बात साझा की है। उनका कहना है कि शूटिंग के दौरान चाहे कितना भी भावनात्मक दृश्य हो, 'कट' की आवाज़ सुनते ही वे पूरी तरह सामान्य हो जाती हैं और किरदार का कोई भी असर अपनी निजी ज़िंदगी पर नहीं पड़ने देतीं।

ऑन-ऑफ स्विच जैसी अभिनय शैली

परिणीति ने बताया कि उनके भीतर का कलाकार बेहद सहजता से 'ऑन' और 'ऑफ' होता है। उन्होंने अपने शब्दों में कहा, 'कट' शब्द सुनते ही वे बिल्कुल सामान्य हो जाती हैं और एक पल के लिए भी किसी भावना को साथ नहीं रखतीं। उन्होंने बताया कि इस आदत पर सेट पर साथी कलाकार और तकनीशियन अक्सर मज़ाक भी करते हैं — कि अभी तक वे रो रही थीं या चीख रही थीं और जैसे ही निर्देशक ने 'कट' बोला, वे खिलखिला उठीं।

उन्होंने कहा, 'कई बार लोग मुझे मेरी ही नकल करके दिखाते हैं और पूछते हैं कि तुम यह कैसे कर लेती हो? मुझे खुद नहीं पता, क्योंकि मैं जानबूझकर ऐसा नहीं करती।'

असली आंसू, पर किरदार का 'हैंगओवर' नहीं

परिणीति ने स्पष्ट किया कि उनकी यह क्षमता किसी भावनाहीनता की निशानी नहीं है। उनके अनुसार अभिनय के दौरान उनके आंसू असली होते हैं, भावनाएँ और शारीरिक मेहनत — दोनों वास्तविक होती हैं। लेकिन जैसे ही 'कट' बोला जाता है, उनके मन में बस एक ही विचार आता है — 'काम खत्म हुआ।'

उन्होंने कहा, 'भगवान का शुक्र है कि ऐसा होता है, वरना मैं बहुत थक जाती। आजकल मैं कई भारी-भरकम किरदार निभा रही हूं। अगर उनका हैंगओवर बना रहे, तो मैं एक कलाकार के रूप में भी और एक इंसान के रूप में भी टूट जाऊं।'

सेट के बाहर की जिंदगी भी उतनी ही अहम

परिणीति का मानना है कि सेट पर निभाए किसी भावनात्मक दृश्य का बोझ पूरे दिन ढोना न तो संभव है और न ही ज़रूरी। उन्होंने कहा, 'मैं उस इमोशन को अपने पूरे दिन के साथ नहीं रख सकती। सेट के बाहर भी मेरी एक ज़िंदगी है और मुझे उसे भी जीना है। अगर मैंने आज कोई भावनात्मक सीन किया, तो इसका मतलब यह नहीं कि मुझे शाम की बर्थडे पार्टी में भी उसी इंटेंस मूड में रहना है।'

'शक: ट्रस्ट नो वन' में निभा रही हैं जटिल किरदार

वेब सीरीज 'शक: ट्रस्ट नो वन' में परिणीति एक जटिल और बहुआयामी भूमिका में नज़र आ रही हैं, जिसके लिए उन्हें लंबे और भावनात्मक रूप से थका देने वाले दृश्यों को बार-बार शूट करना पड़ा। यह उनके करियर के उन दुर्लभ प्रोजेक्ट्स में से एक है जहाँ उन्होंने ओटीटी माध्यम पर अपनी अभिनय क्षमता को नए आयाम दिए हैं।

परिणीति की यह स्वीकारोक्ति उस व्यापक बहस को छूती है जो अक्सर मनोविज्ञान और अभिनय के चौराहे पर होती है — क्या गहरे किरदार निभाने का असर कलाकार की मानसिक सेहत पर पड़ता है? परिणीति का जवाब साफ है: उनके लिए यह एक पेशा है, जिसे वे पूरी तन्मयता से निभाती हैं और उतनी ही सहजता से पीछे छोड़ भी देती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे में परिणीति का 'स्विच ऑफ' वाला दृष्टिकोण न सिर्फ व्यावहारिक है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उल्लेखनीय है। ओटीटी के युग में जहाँ कलाकारों से लंबे और थकाऊ शूटिंग शेड्यूल की अपेक्षा होती है, यह संतुलन करियर की लंबी उम्र के लिए भी ज़रूरी है। मनोरंजन उद्योग में इस पर खुली बातचीत अभी भी बेहद कम होती है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिणीति चोपड़ा की वेब सीरीज 'शक: ट्रस्ट नो वन' किस बारे में है?
'शक: ट्रस्ट नो वन' एक ओटीटी वेब सीरीज है जिसमें परिणीति चोपड़ा एक जटिल और बहुआयामी किरदार निभा रही हैं। यह सीरीज इन दिनों दर्शकों और मीडिया में चर्चा का विषय बनी हुई है।
परिणीति चोपड़ा 'कट' के बाद तुरंत नॉर्मल कैसे हो जाती हैं?
परिणीति के अनुसार यह कोई जानबूझकर की गई कोशिश नहीं है — यह उनकी स्वाभाविक अभिनय प्रक्रिया का हिस्सा है। 'कट' सुनते ही उनका मन खुद-ब-खुद किरदार से अलग हो जाता है और वे सामान्य स्थिति में लौट आती हैं।
क्या परिणीति चोपड़ा के किरदार का असर उनकी निजी जिंदगी पर पड़ता है?
नहीं, परिणीति ने स्पष्ट किया है कि वे किरदार की भावनाओं को सेट के बाहर नहीं ले जातीं। उनका मानना है कि सेट के बाहर की उनकी ज़िंदगी भी उतनी ही अहम है और उसे जीना ज़रूरी है।
भावनात्मक दृश्यों के बाद कलाकारों पर मनोवैज्ञानिक असर क्यों पड़ता है?
कई अभिनेता भारी किरदारों के 'हैंगओवर' की बात करते हैं, जहाँ किरदार की भावनाएँ शूटिंग के बाद भी दिमाग में बनी रहती हैं। परिणीति के अनुसार इससे कलाकार मानसिक और शारीरिक रूप से थक सकता है, इसलिए उनका 'स्विच ऑफ' करने का तरीका उन्हें स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखता है।
परिणीति चोपड़ा ने अपनी अभिनय प्रक्रिया के बारे में यह बात कब और कहाँ कही?
परिणीति चोपड़ा ने यह बात 30 सितंबर 2026 को वेब सीरीज 'शक: ट्रस्ट नो वन' के प्रमोशन के दौरान एक बातचीत में साझा की।
राष्ट्र प्रेस
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