क्या डेविड प्राउज वो हॉलीवुड अभिनेता हैं जिनका चेहरा कभी नहीं दिखा?
सारांश
Key Takeaways
- डेविड प्राउज का किरदार डार्थ वाडर सिनेमा के इतिहास में एक अनोखा उदाहरण है।
- कभी भी चेहरा नहीं दिखाने के बावजूद, वे एक यादगार खलनायक बन गए।
- उनकी कहानी में संघर्ष और पहचान की गहरी बातें हैं।
- सिर्फ शारीरिक संवाद से उन्होंने अपने किरदार को जीवंत किया।
- उनकी मृत्यु ने एक युग का अंत किया, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। मनोरंजन के क्षेत्र में कुछ ऐसे कलाकार होते हैं जिनकी पहचान उनके चेहरे से नहीं बल्कि उनके काम से होती है। डेविड प्राउज ऐसे ही एक ब्रिटिश अभिनेता हैं जिन्होंने कई फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन एक खास किरदार ने उन्हें लोकप्रियता की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। दिलचस्प यह है कि उनका यह प्रसिद्ध किरदार कभी भी पर्दे पर नहीं दिखा।
न केवल उनका चेहरा छिपा रहा, बल्कि उनकी आवाज भी सुनी नहीं गई, फिर भी उनकी उपस्थिति ने सिनेमा के सबसे आइकॉनिक खलनायक डार्थ वाडर को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
1 दिसंबर 2020 को उनका निधन हुआ, और इसके साथ ही फिल्म इतिहास का एक अनोखा अध्याय भी समाप्त हो गया।
डेविड प्राउज की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है जितनी रहस्यमय। उनका जन्म 1935 में इंग्लैंड में हुआ था, और उनके लंबे कद, शारीरिक ताकत और अद्वितीय व्यक्तित्व ने उन्हें भीड़ से अलग रखा। उन्होंने बॉडीबिल्डिंग में नाम कमाया और “मिस्टर यूनिवर्स” जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लिया। यही उनके कद-काठी ने उन्हें फिल्मों में काम दिलाया।
1977 में जब जॉर्ज लुकास स्टार वार्स बना रहे थे, तो उन्हें एक ऐसे अभिनेता की आवश्यकता थी जो लंबा, प्रभावशाली और डरावना लगे—यही वह क्षण था जिसने डेविड प्राउज की किस्मत बदल दी। उन्हें डार्थ वाडर का शरीर निभाने के लिए चुना गया। रुचिकर यह है कि उनकी आवाज का काम जेम्स अर्ल जोन्स ने किया। उनका चेहरा भी नहीं दिखाया गया; वे केवल अपनी शारीरिक मुद्राओं, चाल और हाव-भाव से ही अपने किरदार को जीवंत करते थे।
हालांकि अनेक चुनौतियों के बावजूद, डेविड प्राउज ने एक ऐसा व्यक्तित्व बनाया जिसने स्क्रीन पर आते ही दर्शकों को आतंकित कर दिया। उनके चलने का अंदाज, कंधों की चौड़ाई और हाथों में तलवार रखने का तरीका सब कुछ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता था।
डेविड प्राउज की कहानी का एक और दिलचस्प पहलू उनकी भावनात्मक दूरी है। लंबे समय तक वे स्टार वार्स के निर्माण से अलग-थलग महसूस करते रहे। कहा जाता है कि कुछ गलतफहमियां उनके और मुख्य टीम के बीच हुईं। फिर भी, वे हमेशा फैंस के बीच एक सम्मानित व्यक्तित्व बने रहे।
उनकी मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर “आरआईपी, रियल वाडर” जैसे संदेशों ने यह दिखा दिया कि असली यादें उन किरदारों की होती हैं जो पर्दे पर नहीं दिखते, फिर भी इतिहास को बदल देते हैं। डेविड प्राउज ने बिना चेहरे दिखाए, बिना एक शब्द बोले, सिर्फ शरीर और चाल से एक अद्वितीय किरदार गढ़ा, जिसे दुनिया कभी नहीं भूलेगी।