डीडीएलजे की शूटिंग पर शाहरुख खान बने परमीत सेठी के गुरु, सिखाया बोतल खोलने का खास अंदाज़
सारांश
मुख्य बातें
शाहरुख खान और काजोल की क्लासिक फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' (डीडीएलजे) के सेट पर एक ऐसा दिलचस्प किस्सा घटा था, जब सुपरस्टार शाहरुख ने अपने सह-कलाकार परमीत सेठी के लिए एक असली उस्ताद की भूमिका निभाई। फिल्म के 30 साल पूरे होने के मौके पर दिए एक इंटरव्यू में परमीत ने यह याद साझा की, जो दर्शाती है कि पर्दे के पीछे दोनों कलाकारों का रिश्ता कितना गहरा और सहयोगी था।
कौन सा था वह सीन
फिल्म में परमीत सेठी ने कुलजीत का किरदार निभाया था — वह पात्र जिसे सिमरन के पिता बलदेव सिंह अपनी बेटी के लिए पसंद करते हैं। फिल्म के एक सीन में फार्महाउस की배景में शाहरुख और परमीत को बीयर पीते हुए दिखाया जाना था। इस सीन की ख़ास माँग यह थी कि परमीत को मुँह से बोतल खोलनी थी — एक ऐसा शॉट जो दिखने में भले आसान लगे, लेकिन सही टाइमिंग और तकनीक माँगता है।
जब डूबते सूरज के साथ बढ़ा दबाव
परमीत के अनुसार, उस वक्त सूरज ढल रहा था और शूटिंग के लिए बेहद सीमित समय बचा था। प्राकृतिक रोशनी में शॉट पूरा करना ज़रूरी था। ऐसे नाज़ुक मोड़ पर शाहरुख ने उन्हें शांति से समझाया कि मुँह से बोतल खोलने वाला शॉट किस तरीके से करना है। शाहरुख के मार्गदर्शन से परमीत न सिर्फ सही टाइमिंग पकड़ पाए, बल्कि सीन को और प्रभावशाली बनाने में भी सफल रहे।
परमीत ने क्या कहा शाहरुख के बारे में
परमीत सेठी ने शाहरुख खान की तारीफ करते हुए कहा कि वह 'बहुत शांत एक्टर' हैं। उनके शब्दों में, शाहरुख दूसरे कलाकार को अच्छा शॉट देने का पूरा अवसर देते हैं और ज़रूरत पड़ने पर दोबारा टेक लेने में कोई हिचक नहीं दिखाते। यह बात उनकी पेशेवर उदारता और टीम स्पिरिट को दर्शाती है।
शूटिंग से पहले ही बन गई थी दोस्ती
परमीत ने यह भी बताया कि शाहरुख से उनकी मुलाकात डीडीएलजे की शूटिंग शुरू होने से पहले ही हो चुकी थी। वह अपनी पत्नी और अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह के साथ मोरानी ब्रदर्स के वर्ल्ड टूर पर गए थे, जहाँ शाहरुख के स्टेज शो भी आयोजित होते थे। इसी दौरान दोनों के बीच दोस्ती परवान चढ़ी, जो फिल्म की शूटिंग तक और मज़बूत हो गई। गौरतलब है कि डीडीएलजे 1995 में रिलीज़ हुई थी और मुंबई के मराठा मंदिर में दशकों तक लगातार चलती रही — यह किसी भी हिंदी फिल्म का रिकॉर्ड है।
डीडीएलजे की विरासत
यह किस्सा ऐसे समय में सामने आया है जब फिल्म के 30 साल पूरे होने पर बॉलीवुड हलकों में इसे नए सिरे से याद किया जा रहा है। परमीत सेठी के करियर में यह फिल्म एक मील का पत्थर रही, जबकि शाहरुख खान के लिए यह वह भूमिका थी जिसने उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में स्थापित किया। शाहरुख की इस सहयोगी प्रवृत्ति की झलक आज भी उनके साथ काम कर चुके कलाकारों की यादों में ज़िंदा है।