दीपिका चिखलिया: रामायण सेट पर राम-लक्ष्मण से ज्यादा रावण से होती थी बातचीत, सीता की छवि के कारण भूखे रहना पड़ा

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दीपिका चिखलिया: रामायण सेट पर राम-लक्ष्मण से ज्यादा रावण से होती थी बातचीत, सीता की छवि के कारण भूखे रहना पड़ा

सारांश

दीपिका चिखलिया की सीता ने राष्ट्र को मुग्ध किया, लेकिन सेट पर अकेलापन और सामाजिक प्रतिबंध थे। रावण अभिनेता अरविंद त्रिवेदी से ही सबसे ज़्यादा बातचीत, और मॉरिशस में एक घटना जहाँ भक्तों ने उन्हें खाना छूने से रोका — यह वह कीमत थी जो एक आइकन को चुकानी पड़ी।

Key Takeaways

  • दीपिका चिखलिया का जन्म 29 अप्रैल 1965 को मुंबई में हुआ था।
  • रामानंद सागर की 'रामायण' में माता सीता की भूमिका के लिए 40 लड़कियों के बीच से चुनी गईं।
  • सेट पर दीपिका ने अरविंद त्रिवेदी (रावण) से सबसे ज़्यादा बातचीत की, अरुण गोविल (राम) से नहीं।
  • मॉरिशस के एक इवेंट में भक्तों ने उन्हें और अरुण गोविल को खाना छूने से रोका, 'सीता की पवित्रता' का हवाला देते हुए।
  • लंबे समय तक भूखे रहने के बाद उनके लिए अलग से शुद्ध खाने की व्यवस्था की गई।

मुंबई, 28 अप्रैल — रामानंद सागर की 'रामायण' आज भी दर्शकों के हृदय में स्थान रखती है। अभिनेता अरुण गोविल और अभिनेत्री दीपिका चिखलिया आज भी भगवान राम और माता सीता के नाम से पहचाने जाते हैं। इस धार्मिक सीरीज़ का प्रभाव इतना गहरा था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्वयं दीपिका चिखलिया से इसकी वीसीआर कैसेट माँगी थी। लेकिन माता सीता की भूमिका निभाने का अर्थ केवल प्रसिद्धि नहीं था — इसने अभिनेत्री के जीवन को पूरी तरह रूपांतरित कर दिया, जिसमें कठोर सामाजिक प्रतिबंध भी शामिल थे।

शुरुआत और ऑडिशन की कठिन यात्रा

29 अप्रैल 1965 को मुंबई में जन्मी दीपिका को शुरुआत में यह अंदाज़ा नहीं था कि माता सीता की भूमिका उनके पूरे जीवन को बदल देगी। अपने शुरुआती करियर में, उन्होंने टेलीविज़न अभिनेत्री बनने का निर्णय लिया, लेकिन उस समय टेलीविज़न को 'इडियट बॉक्स' कहा जाता था और फिल्मों में काम करने वाली अभिनेत्रियों की तुलना में टीवी कलाकारों को कम सम्मान मिलता था। यही कारण था कि दीपिका का परिवार इस निर्णय से असंतुष्ट था।

दीपिका ने 1980 में टीवी सीरीज़

Point of View

वहीं इसने अभिनेत्रियों पर अकल्पनीय सामाजिक दबाव भी डाले। सीता की 'पवित्रता' की अवधारणा दीपिका को एक जीवंत व्यक्ति से प्रतीक में बदल गई — एक ऐसी स्थिति जहाँ भक्तों ने उन्हें खाना छूने से रोका क्योंकि वह 'झूठी' हो गई। यह 1980-90 के भारत में धार्मिक आइकनोग्राफी के अंधेरे पक्ष को उजागर करता है, जहाँ महिलाएँ अपनी मानवता के लिए अपनी प्रतिष्ठा का त्याग करने को बाध्य थीं।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

दीपिका चिखलिया को रामायण में माता सीता की भूमिका के लिए कैसे चुना गया?
दीपिका को माता सीता की भूमिका के लिए कई दौरों के ऑडिशन से गुज़रना पड़ा। पहले ऑडिशन में 40 लड़कियाँ थीं, दूसरे में संख्या आधी हो गई, और तीसरे ऑडिशन में केवल कुछ ही लड़कियाँ बचीं। कुछ हफ्तों के लंबे इंतज़ार के बाद दीपिका को सीरीज़ के लिए हस्ताक्षरित किया गया।
रामायण सेट पर दीपिका चिखलिया की अभिनेता अरुण गोविल के साथ क्या संबंध था?
सेट पर दीपिका और अरुण गोविल के बीच बहुत कम बातचीत होती थी। दीपिका ने खुलासा किया कि अरुण गोविल और सुनील लहरी (लक्ष्मण) बहुत अच्छे दोस्त थे, जबकि वह स्वयं को रिज़र्व रखती थीं और रामानंद सागर की पत्नी तथा उनके बेटे की बहू से अधिक बातचीत करती थीं।
दीपिका चिखलिया किन अभिनेताओं के साथ सबसे अधिक बातचीत करती थीं?
दीपिका चिखलिया सेट पर अरविंद त्रिवेदी (जिन्होंने रावण का किरदार निभाया था) के साथ सबसे अधिक बातचीत करती थीं, हालांकि उनसे भी गहरी दोस्ती नहीं थी।
मॉरिशस की घटना में क्या हुआ था?
मॉरिशस के एक इवेंट में, भक्तों ने दीपिका चिखलिया और अरुण गोविल को बुफे के दौरान खाना छूने से रोका, यह कहते हुए कि खाना 'झूठा' हो गया है क्योंकि माता सीता की छवि के अनुसार वह शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। इसके बाद उनके लिए अलग से शुद्ध खाने की व्यवस्था की गई, लेकिन इस बीच दोनों को काफी लंबे समय तक भूखा रहना पड़ा।
रामायण सीरीज़ का राजीव गांधी से क्या संबंध था?
रामायण के प्रभाव का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्वयं दीपिका चिखलिया से इसकी वीसीआर कैसेट माँगी थी, जो सीरीज़ की राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रासंगिकता को दर्शाता है।
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