'फितूर' शो: देबचंद्रिमा सिंघा रॉय बोलीं — यह हजारों लड़कियों के अनकहे सफर की कहानी है
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री देबचंद्रिमा सिंघा रॉय इन दिनों अपने आगामी शो 'फितूर' को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। 6 जुलाई को मुंबई में शो के प्रोमो पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह कहानी उनके लिए महज एक किरदार नहीं, बल्कि उन हजारों युवतियों की असल भावनाओं का आईना है जो अपने डर और आत्म-संदेह को चुपचाप जीती हैं।
शो से जुड़ाव का कारण
देबचंद्रिमा ने बताया कि जैसे ही उन्होंने 'फितूर' का प्रोमो देखा, उन्हें लगा जैसे यह कहानी उनके अपने अनुभवों से जुड़ी है। उनके अनुसार यह शो उन अनुभवों को परदे पर लाता है जो आज भी कई लड़कियों के जीवन का अहम हिस्सा हैं, लेकिन जिन पर खुलकर बात नहीं होती।
उन्होंने कहा, "इस शो का प्रोमो मेरे दिल को छू गया क्योंकि यह उस सफर को दिखाता है, जिससे कई लड़कियां चुपचाप गुजरती हैं। खासकर जब कोई लड़की गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाती है, तो यह बदलाव उसके लिए काफी अलग होता है। मैं चाहती हूं कि हर लड़की जो इसे देखे, उसे यह महसूस हो कि वह अकेली नहीं है और घबराना सामान्य बात है। समय और आत्मविश्वास के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत कहानी बन जाती है।"
किरदार और कहानी
शो में देबचंद्रिमा सौम्या नाम की एक ऐसी युवती का किरदार निभा रही हैं जो अपनी खोई हुई पहचान को तलाश रही है। जब सौम्या मास्टर डिग्री के लिए को-एड कॉलेज में दाखिला लेती है, तो उसके सामने एक नई और चुनौतीपूर्ण दुनिया खुलती है — जहाँ डर, घबराहट और आत्म-संदेह उसके साथी बन जाते हैं।
मेल लीड रोल में अभिनेता ईशान धवन नज़र आएंगे। उनका किरदार एक निडर, बेपरवाह और स्वतंत्र सोच रखने वाले युवक का है जो जीवन को पूरी तरह अपनी शर्तों पर जीता है। यह दो विपरीत व्यक्तित्वों का टकराव ही शो की केंद्रीय धुरी है।
निर्माताओं का नज़रिया
शो के निर्माताओं ने प्रोमो को इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए लिखा, "एक किरदार की जिंदगी सादगी से भरी हुई है, जबकि दूसरा बेहद बेचैन स्वभाव का है। दोनों अलग-अलग सोच और पृष्ठभूमि से आते हैं और जब ये दो अलग दुनिया आपस में टकराएंगी तो कहानी किस दिशा में जाएगी?" यह पंक्तियाँ शो की उस जिज्ञासा को जगाती हैं जो दर्शकों को बाँधे रखेगी।
युवतियों के लिए संदेश
'फितूर' केवल रोमांस या ड्रामा की परिधि में नहीं बंधा है। यह शो उन अनकहे भावों को सामने लाने की कोशिश करता है जिन्हें युवा महसूस तो करते हैं, लेकिन व्यक्त नहीं कर पाते। देबचंद्रिमा का मानना है कि बदलाव से डरना नहीं चाहिए — आत्मविश्वास के साथ हर नई शुरुआत का सामना किया जाए, यही इस शो का मूल संदेश है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवा दर्शकों के भावनात्मक अनुभवों को केंद्र में रखने वाली कहानियों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।