'मैं वापस आऊंगा' के डेब्यू अभिनेता हर्षुल कौल बोले — 'वेदांग रैना के साथ काम करना सपने जैसा था'
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' से बॉलीवुड में कदम रखने वाले नए अभिनेता हर्षुल कौल ने अपने सह-कलाकार वेदांग रैना की भरपूर तारीफ की है। हर्षुल ने बताया कि वेदांग के साथ पर्दे पर उतरना उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं था — और यह अनुभव उन्हें एक अभिनेता के रूप में गहराई से बदल गया।
आफताब का किरदार और दर्शकों की प्रतिक्रिया
फिल्म में हर्षुल कौल ने वेदांग रैना के किरदार कीनू के절친한 दोस्त आफताब की भूमिका निभाई। फिल्म के रिलीज होने के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया उनके लिए बेहद भावनात्मक रही। हर्षुल ने कहा, 'फिल्म रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया और मैसेज के ज़रिए कई लोगों ने मुझसे संपर्क किया। बहुत से लोगों ने कहा कि आफताब की मासूमियत और उसका भावनात्मक सफर फिल्म खत्म होने के बाद भी उनके दिलों में बना रहा। कुछ लोगों ने तो यह भी कहा कि उन्हें लगा जैसे वे इन किरदारों को व्यक्तिगत रूप से जानते हों।'
हर्षुल के अनुसार, ऐसे संदेश उनके लिए बेहद अहम हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सिनेमा का असली उद्देश्य दर्शकों को कुछ महसूस कराना है।
कश्मीरी पंडित समुदाय का गर्व
हर्षुल ने बताया कि एक कश्मीरी परिवार से ताल्लुक रखने के नाते वेदांग रैना की सफलता उनके लिए व्यक्तिगत रूप से प्रेरणादायी रही है। उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा देखा कि हमारे आसपास लोग उनकी सफलता का जश्न मनाते थे। 'द आर्चीज' और फिर 'जिगरा' के बाद हर जगह उनके बारे में बातें होती थीं। इतनी कम उम्र में कश्मीरी पंडित समुदाय का कोई कलाकार इतनी बड़ी सफलता हासिल कर रहा था, यह देखकर मुझे बेहद गर्व होता था।'
हर्षुल ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि महज डेढ़ साल बाद वे वेदांग के साथ पर्दा साझा करेंगे और अपनी पहली ही फिल्म में उनके सबसे करीबी दोस्त का किरदार निभाएंगे।
वेदांग रैना से मिली सीख
हर्षुल ने वेदांग की मेहनत और अनुशासन को अपने करियर की सबसे बड़ी सीख बताया। उन्होंने एक विशेष किस्सा साझा करते हुए कहा, 'मुझे याद है कि 'इश्क मस्ताना' गाने की शूटिंग के दौरान उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पूरी ऊर्जा के साथ डांस किया, परफॉर्म किया और कभी भी अपनी परेशानी को काम पर हावी नहीं होने दिया।'
एक नए कलाकार के रूप में इस प्रतिबद्धता को इतने करीब से देखना हर्षुल के लिए एक अमूल्य अनुभव रहा।
सेट के बाहर भी बनी खास यादें
हर्षुल ने बताया कि वेदांग ने पहले ही दिन से उन्हें सेट पर सहज महसूस कराया और हमेशा सम्मान के साथ पेश आए। उन्होंने कहा, 'शूटिंग के दौरान सेट के बाहर भी हमने कई खूबसूरत पल साथ बिताए। हम कश्मीरी भाषा में बातें करते थे, टेक के बीच खूब हंसते थे और साथ समय बिताते थे। इन छोटे-छोटे पलों ने आफताब और कीनू की इस यात्रा को और भी खास बना दिया।'
यह पहली फिल्म हर्षुल कौल के लिए महज एक डेब्यू नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो उनके अभिनय करियर की नींव बन सकता है — और वेदांग रैना जैसे सह-कलाकार की संगत इस सफर को और भी यादगार बनाती है।