हसरत जयपुरी: अधूरी ख्वाहिशों से अमर गीतों की ओर एक अद्भुत यात्रा

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हसरत जयपुरी: अधूरी ख्वाहिशों से अमर गीतों की ओर एक अद्भुत यात्रा

सारांश

हसरत जयपुरी का जीवन एक अद्भुत यात्रा है, जो अधूरी ख्वाहिशों से लेकर अमर गीतों तक फैली हुई है। उनकी रचनाएँ आज भी दिलों में बसी हुई हैं। जानिए उनके जीवन की कहानी।

Key Takeaways

  • हसरत जयपुरी का असली नाम इकबाल हुसैन था।
  • उन्होंने अपनी पहली मोहब्बत की अधूरी ख्वाहिश से नाम रखा 'हसरत'।
  • उनकी रचनाएँ आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं।
  • हसरत ने 1200+ गीत लिखे हैं जो अमूल्य हैं।
  • उनका निधन 1999 में हुआ।

मुंबई, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 15 अप्रैल 1922 को जयपुर में जन्मे इकबाल हुसैन के अंदर दो भिन्न संस्कृतियाँ बसी थीं। एक ओर जहां उन्होंने स्कूल में अंग्रेजी तालीम प्राप्त की, वहीं दूसरी ओर अपने नाना (प्रसिद्ध शायर फिदा हुसैन) से उर्दू और फारसी की बारीकियाँ सीखी। जब बीस वर्ष की आयु में उनकी पहली मोहब्बत अधूरी रह गई, तो उन्होंने अपना उपनाम 'हसरत'हसरत जयपुरी के नाम से जाना जाने लगा।

1940 में, वे अपनी पत्नी के साथ बंबई चले आए। यह वह समय था जब दिन में वे बसों में टिकट काटते और रात को शहर के शानदार मुशायरों की जान बन जाते। वे खुद को 'रंगीन मिजाज' मानते थे।

एक बार मुशायरे में उन्होंने अपनी दुखद कविता 'मजदूर की लाश' पढ़ी, जहाँ महान अभिनेता पृथ्वीराज कपूर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपने बेटे राज कपूर के पास भेजा।

राज कपूर अपनी फिल्म 'बरसात' (1949) बना रहे थे। उन्होंने हसरत को एक धुन सुनाई और कहा, "तुम्हारे पास 24 घंटे हैं, इस पर एक गाना लिखकर लाओ।" अगले दिन जब हसरत लौटे, तो उन्होंने जो कागज राज साहब को सौंपा, उस पर लिखा था, "जिया बेकरार है, छाई बहार है"। राज कपूर खुशी से झूम उठे। यह गाना बहुत लोकप्रिय हुआ।

हसरत के पास प्यार के हर मौसम के लिए शब्द थे। चाहे शम्मी कपूर का बिंदास अंदाज़ हो ("एहसान तेरा होगा मुझ पर"), देव आनंद का चुलबुलापन हो, या किशोर कुमार की मस्ती ("जिंदगी एक सफर है सुहाना"), हसरत के शब्द सीधे लोगों के दिलों में उतर जाते थे।

1969 की फिल्म 'प्रिंस' के लिए, उन्होंने पेरिस"बदन पे सितारे लपेटे हुए") जो आज भी पार्टियों की जान है।

जब हसरत अपने करियर के शीर्ष पर थे और लाखों कमा रहे थे, तब उनकी पत्नी ने उन्हें सारा पैसा मुंबई की रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए कहा। जब फिल्मों का काम कम हुआ, तब भी उन्होंने किराए की आमदनी से आराम से जीवन यापन किया। उन्होंने कभी भी अपने उसूलों या अपनी कला से समझौता नहीं किया।

17 सितंबर 1999 को, 77 वर्ष की आयु में हसरत जयपुरी ने इस दुनिया को अलविदा कहा। उन्होंने 1,200 से अधिक गीतों का एक ऐसा खजाना छोड़ दिया जो आज भी अमूल्य है।

Point of View

यह उनके अद्वितीय योगदान का प्रमाण है।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

हसरत जयपुरी कौन थे?
हसरत जयपुरी, जिनका असली नाम इकबाल हुसैन था, एक प्रसिद्ध भारतीय गीतकार थे, जिन्होंने 1200 से अधिक गीत लिखे।
हसरत जयपुरी के प्रसिद्ध गीत कौन से हैं?
उनके प्रसिद्ध गीतों में 'जिया बेकरार है', 'एहसान तेरा होगा मुझ पर' और 'बदन पे सितारे लपेटे हुए' शामिल हैं।
हसरत जयपुरी का जन्म कब हुआ था?
हसरत जयपुरी का जन्म 15 अप्रैल 1922 को जयपुर में हुआ था।
हसरत जयपुरी ने कितने गीत लिखे?
उन्होंने 1200 से अधिक गीत लिखे, जो आज भी लोकप्रिय हैं।
हसरत जयपुरी का निधन कब हुआ?
हसरत जयपुरी का निधन 17 सितंबर 1999 को हुआ।
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