15 अक्टूबर 2026
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किरण राव का खुलासा: 'लस्ट स्टोरीज 3' में दिखाया आज की पीढ़ी का रिश्तों को लेकर बदलता नज़रिया

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किरण राव का खुलासा: 'लस्ट स्टोरीज 3' में दिखाया आज की पीढ़ी का रिश्तों को लेकर बदलता नज़रिया

सारांश

किरण राव ने 'लस्ट स्टोरीज 3' के प्रमोशन पर खुलकर कहा — आज की युवा पीढ़ी बेपरवाह नहीं, बल्कि भावनाओं को जताने में ज़्यादा आज़ाद है। उन्होंने कहा कि अब रिश्तों के लिए शादी की अनिवार्यता नहीं रही, और यही बदलती सोच उनकी नई फिल्म का केंद्र है।

मुख्य बातें

फिल्ममेकर किरण राव ने 4 अक्टूबर 2026 को 'लस्ट स्टोरीज 3' के प्रमोशन दौरान मुंबई में आधुनिक रिश्तों पर बेबाक राय रखी।
किरण ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी बेपरवाह नहीं, बल्कि भावनाओं को खुलकर जताने में सक्षम है।
उनके अनुसार अब शादी के बिना भी गहरे भावनात्मक और शारीरिक रिश्ते सामान्य माने जाते हैं।
'लस्ट स्टोरीज 3' में दो ऐसे युवा किरदार हैं जो बिना किसी औपचारिक रिश्ते के एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं।
किरण राव की यह फिल्म उनकी पिछली कृतियों की तरह बदलते सामाजिक नज़रिए को केंद्र में रखती है।

फिल्ममेकर किरण राव ने 4 अक्टूबर 2026 को मुंबई में 'लस्ट स्टोरीज 3' के प्रमोशन के दौरान आज की युवा पीढ़ी के रोमांटिक रिश्तों पर बेबाकी से अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि उनकी और आज की पीढ़ी के बीच रिश्तों को देखने के नज़रिए में ज़मीन-आसमान का फ़र्क आ चुका है।

युवा पीढ़ी पर किरण राव का नज़रिया

जब किरण राव से पूछा गया कि उनकी फिल्म के युवा किरदार प्यार और रिश्तों को लेकर बेपरवाह नज़र आते हैं, तो उन्होंने इस धारणा को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, 'मुझे आज की युवा पीढ़ी बेपरवाह नहीं, बल्कि उनमें एक तरह की आज़ादी और बिना झिझक अपनी भावनाओं को ज़ाहिर करने की क्षमता नज़र आती है।' राव के अनुसार, उनकी पीढ़ी के समय लोगों से एक खास तरह के रिश्ते में रहने की उम्मीद की जाती थी, लेकिन अब वह सामाजिक बाध्यता काफ़ी हद तक बदल चुकी है।

फिल्म में किस कहानी को दिखाया

किरण राव ने बताया कि 'लस्ट स्टोरीज 3' में दो ऐसे युवा किरदार हैं जो किसी औपचारिक रिश्ते में बंधे नहीं हैं, लेकिन एक-दूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे में सवाल उठता है कि इसके बाद उनके बीच क्या होता है और जब वे अपनी पसंद के फैसले लेते हैं तो किस तरह की चीजें सामने आती हैं। इसी में कहानी का मज़ा है।' यह कथन उनकी फिल्मी दृष्टि को स्पष्ट करता है — वे सामाजिक बदलाव को कहानी का केंद्र बनाती हैं।

शादी की अनिवार्यता पर टिप्पणी

अपनी पीढ़ी के समय को याद करते हुए किरण राव ने कहा, 'तब शादी के बाद पति-पत्नी के बीच शारीरिक और भावनात्मक जुड़ाव को ही सामान्य माना जाता था, लेकिन अब ऐसा ज़रूरी नहीं है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि आज लोग शादी से पहले भी किसी के साथ गहरे और मज़बूत रिश्ते में रह सकते हैं — जिसमें भावनात्मक और शारीरिक दोनों तरह का जुड़ाव शामिल हो सकता है। यह बदलाव, उनके अनुसार, आज की दुनिया को उनकी पीढ़ी के समय से स्पष्ट रूप से अलग करता है।

निर्देशक की मंशा

किरण राव ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस कहानी को जानबूझकर 'बदलती दुनिया के बीच' रखा है। उनके शब्दों में, 'मैं चाहती थीं कि कहानी नई पीढ़ी की ताज़गी, उनकी आज़ादी और रिश्तों को देखने के खुले नज़रिए को दिखाए। मेरे लिए यह सिर्फ एक रोमांटिक कहानी नहीं, बल्कि उस दौर की तस्वीर भी है जिसमें आज के युवा अपने रिश्तों और पसंद को पहले से ज़्यादा खुलकर जी रहे हैं।' यह टिप्पणी उनकी पिछली फिल्मों — जैसे 'धोबी घाट' और 'लापता लेडीज़' — की उस परंपरा से मेल खाती है जिसमें वे समाज के बदलते ताने-बाने को बड़े पर्दे पर पेश करती हैं।

आगे क्या

'लस्ट स्टोरीज 3' अपनी रिलीज़ की ओर बढ़ रही है और किरण राव के ये विचार फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बढ़ा रहे हैं। उनके बयान ने सोशल मीडिया पर रिश्तों, शादी और आधुनिक पीढ़ी की स्वतंत्रता को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या वाकई इन कहानियों को उनकी जटिलता के साथ पर्दे पर उतार रहा है। 'लापता लेडीज़' की सफलता के बाद किरण राव पर यह ज़िम्मेदारी और बड़ी हो जाती है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरण राव ने 'लस्ट स्टोरीज 3' के प्रमोशन में रिश्तों पर क्या कहा?
किरण राव ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी रिश्तों को लेकर बेपरवाह नहीं, बल्कि भावनाओं को बिना झिझक जताने में सक्षम है। उनके अनुसार अब शादी के बिना भी गहरे भावनात्मक और शारीरिक रिश्ते सामान्य माने जाते हैं।
'लस्ट स्टोरीज 3' में किस तरह की कहानी है?
किरण राव के अनुसार फिल्म में दो ऐसे युवा किरदार हैं जो किसी औपचारिक रिश्ते में बंधे नहीं हैं, लेकिन एक-दूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं। फिल्म इसी आकर्षण और उससे उपजने वाले सवालों को केंद्र में रखती है।
किरण राव को आज की पीढ़ी और अपनी पीढ़ी में क्या फ़र्क नज़र आता है?
किरण राव के अनुसार उनकी पीढ़ी में शादी के बाद ही शारीरिक और भावनात्मक जुड़ाव को सामान्य माना जाता था, जबकि आज की पीढ़ी अपनी भावनाओं और पसंद को पहले से कहीं ज़्यादा खुलकर जाहिर करती है।
किरण राव ने यह कहानी क्यों चुनी?
किरण राव ने बताया कि वे चाहती थीं कि उनकी कहानी नई पीढ़ी की ताज़गी, आज़ादी और रिश्तों को देखने के खुले नज़रिए को दिखाए। उनके लिए यह सिर्फ एक रोमांटिक कहानी नहीं, बल्कि बदलते दौर की तस्वीर है।
किरण राव की पिछली फिल्में कौन सी रही हैं?
किरण राव इससे पहले 'धोबी घाट' (2011) और 'लापता लेडीज़' जैसी फिल्में बना चुकी हैं, जो बदलते सामाजिक परिवेश को केंद्र में रखती हैं। 'लापता लेडीज़' को व्यापक प्रशंसा और दर्शकों की सराहना मिली थी।
राष्ट्र प्रेस
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